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Kanpur Orphanage Case: दो साल का समय है, निकाह करो या बीए पर यतीमखाना छोड़ो, लड़कियों ने लगाए ये गंभीर आरोप

Thu, 07 Sep 2023 12:15 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 07 Sep 2023 12:15 PM IST
सार

Kanpur News: जनरल सेकेट्री अख्तर हुसैन अख्तर ने बताया कि शिकायतकर्ता लड़कियों से बातचीत की गई है।  फेल लड़कियों को उसी कक्षा में प्रवेश दिलाया जाएगा न कि किसी अन्य कोर्स में। वहीं, लड़कियां हमें बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं।

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Kanpur Orphanage Case, Two years time, get married or leave orphanage on BA, girls made these serious allegat
परेड चौराहा ( सांकेतिक) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर में परेड स्थित यतीमखाना में रह रहीं लड़कियों ने यतीमखाना प्रबंधन पर नर्सिंग की पढ़ाई न कराने का आरोप लगाया है। पुलिस कमिश्नर को पत्र भेजकर उन्होंने इस संबंध में शिकायत की है। लड़कियों का कहना है कि प्रबंधन ने दो टूक कह दिया है कि आपको दो साल का ग्रेस पीरियड दिया जाता है।

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इस दौरान आप शादी कर लो या बीए की पढ़ाई कर यहां से निकल जाओ। यतीमखाना में 18 वर्ष से अधिक उम्र की 18 लड़कियां रह रही हैं। इनमे से छह लड़कियां नर्सिंग करना चाह रही हैं पर प्रबंधन ने इससे इंकार कर दिया। यतीमखाना की अध्यक्ष अर्जुमन फारूकी ने बताया कि 18 वर्ष से ऊपर उम्र की लड़कियों को कोई व्यावसायिक कोर्स कराने का प्रावधान हमारे यहां नहीं है।
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जिन लड़कियों ने नर्सिंग में प्रवेश लेने के लिए कहा है, वे इस वर्ष बीए में फेल हो गई हैं। लड़कियों ने पूरे स्टाफ के साथ गलत व्यवहार किया है। बीए उन्हें करना है तो वे कर सकती हैं, लेकिन बीए करने के लिए वे तैयार नहीं है। जनरल सेकेट्री अख्तर हुसैन अख्तर ने बताया कि शिकायतकर्ता लड़कियों से बातचीत की गई है।

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18 साल से ऊपर की उम्र होने नहीं रह सकती हैं लड़कियां
फेल लड़कियों को उसी कक्षा में प्रवेश दिलाया जाएगा न कि किसी अन्य कोर्स में। जो लड़कियां हमें बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। उन्हें ये बता दिया गया है कि अब नियमावली के अनुसार व्यवहार किया जाएगा। नियमावली के अनुसार, 18 साल से ऊपर की उम्र होने पर लड़कियां यहां नहीं रह सकती हैं।

यतीमखाना का संचालन बंद कर दिया
दो साल का ग्रेस पीरियड दिया गया है, ताकि वे स्नातक करें या फिर उनकी शादी कर दी जाएगी। अब जेजे एक्ट में आवेदन कर दिया है। अब जो भी होगा, सब नियमों के अनुसार होगा। बता दें कि जेजे एक्ट में पंजीकरण न होने से प्रशासन ने यतीमखाना का संचालन बंद कर दिया है। यहां की लड़कियों को उनके रिश्तेदारों को सौंप दिया गया है।

ये लड़कियां रह रही हैं। जबसे हम गर्मियों की छुट्टियों के बाद से यतीमखाना आए हैं, तो यहां के लोगों का व्यवहार हमारे प्रति बदल गया। यहां सब कहते हैं कि तुम लोग यहां से चली जाओ। बीमार पड़ने पर इलाज भी ढंग से नहीं कराते हैं।  -चमन, छात्रा

आज भी हमें बुलाकर बहुत डांटा कि हमने शिकायत क्यों की। कहा कि अब आप लोगों को नहीं रख पाएंगे। हम फेल नहीं हुए हैं बल्कि जब यतीमखाना बंद होने का मसला चल रहा था तो उस वक्त हमें घर भेज दिया गया था। इससे हमारी बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा भी छूट गई थी। -समरीन, छात्रा

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