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ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से छीना वर्दी और कंबल बनाने का काम
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 04 Jan 2017 10:10 AM IST
सार
- शाहजहांपुर की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से भी छीना अंगीठी बनाने का काम
- ऊनी स्वेटर, मोजा, ब्लेजर बनाने का भी नहीं मिला आर्डर
- कानपुर में बने गर्म कपड़ों की सेना में खूब होती है मांग
- प्राइवेट कंपनियों को आर्डर दिए जाने की संभावना
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विस्तार
कानपुर की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री और ऑर्डिनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री से सेना के गर्म कपड़े, वर्दी और कंबल बनाने का काम छीन लिया गया है। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड ने वर्ष 2017 के लिए इन दोनों फैक्ट्रियों को आर्डर नहीं दिया है। इसी तरह से शाहजहांपुर की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री भी इस साल सेना के लिए अंगीठी नहीं बनाएगी। माना जा रहा है कि इन उत्पादों को बनाने का आर्डर प्राइवेट कंपनियों को दिया जा सकता है।
शहर की दोनों ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां सेना के सभी विंगों के लिए वर्दी, कंबल, स्वेटर, जर्सी, ब्लेजर, मोजा, दस्ताने आदि बनाने के लिए प्रसिद्ध रही हैं। यहां बने गर्म कपड़ों की सेना में खूब डिमांड होती है। सेना में कपड़ों की कुल खपत का 20 फीसदी माल यहां से सप्लाई होता था। इस साल दोनों फैक्ट्रियों को ये उत्पाद बनाने का आर्डर नहीं मिला है।
इसी तरह शाहजहांपुर की फैक्ट्री में बनी अंगीठियां बर्फीले एरिया में तैनात रहने वाले सैनिकों के लिए सबसे मुफीद थीं। ये वजन में हल्की थीं और लेकर चलने में आसान थीं। इस बार इस फैक्ट्री को भी अंगीठी बनाने का आर्डर नहीं मिला है। तीनों फैक्ट्रियों में उक्त उत्पादों के निर्माण में लगे कर्मचारियों को दूसरे कामों में शिफ्ट किया जाएगा।
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शहर की दोनों ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां सेना के सभी विंगों के लिए वर्दी, कंबल, स्वेटर, जर्सी, ब्लेजर, मोजा, दस्ताने आदि बनाने के लिए प्रसिद्ध रही हैं। यहां बने गर्म कपड़ों की सेना में खूब डिमांड होती है। सेना में कपड़ों की कुल खपत का 20 फीसदी माल यहां से सप्लाई होता था। इस साल दोनों फैक्ट्रियों को ये उत्पाद बनाने का आर्डर नहीं मिला है।
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इसी तरह शाहजहांपुर की फैक्ट्री में बनी अंगीठियां बर्फीले एरिया में तैनात रहने वाले सैनिकों के लिए सबसे मुफीद थीं। ये वजन में हल्की थीं और लेकर चलने में आसान थीं। इस बार इस फैक्ट्री को भी अंगीठी बनाने का आर्डर नहीं मिला है। तीनों फैक्ट्रियों में उक्त उत्पादों के निर्माण में लगे कर्मचारियों को दूसरे कामों में शिफ्ट किया जाएगा।
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निजीकरण की कवायद तो नहीं
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निजीकरण की कवायद तो नहीं
कर्मचारियों ने आशंका जताई है कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के निजीकरण की कवायद शुरू हो चुकी है। धीरे धीरे काम छीना जाएगा। रक्षा फैक्ट्रियों के तमाम काम प्राइवेट कंपनियों से कराए जाने की तैयारी काफी पहले से चल रही है। अंगीठी और गर्म कपड़ों का आर्डर आर्डनेंस फैक्ट्रियों को न मिलना इसी का नतीजा माना जा रहा है।
ऑल इंडिया इंप्लाइज डिफेंस फेडरेशन सेंट्रल एग्जिक्यूटिव मेंबर शेखर चंद्र राय ने कहा कि रक्षा फैक्ट्रियों के निजीकरण का प्रयास चल रहा है। तीन फैक्ट्रियों से उनका परम्परागत काम छीना जाना निंदनीय है। उनका संगठन इसका लगातार विरोध करता आया है। तीनों फैक्ट्रियों से काम छीने जाने की वजह से सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडराएगा।
कर्मचारियों ने आशंका जताई है कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के निजीकरण की कवायद शुरू हो चुकी है। धीरे धीरे काम छीना जाएगा। रक्षा फैक्ट्रियों के तमाम काम प्राइवेट कंपनियों से कराए जाने की तैयारी काफी पहले से चल रही है। अंगीठी और गर्म कपड़ों का आर्डर आर्डनेंस फैक्ट्रियों को न मिलना इसी का नतीजा माना जा रहा है।
ऑल इंडिया इंप्लाइज डिफेंस फेडरेशन सेंट्रल एग्जिक्यूटिव मेंबर शेखर चंद्र राय ने कहा कि रक्षा फैक्ट्रियों के निजीकरण का प्रयास चल रहा है। तीन फैक्ट्रियों से उनका परम्परागत काम छीना जाना निंदनीय है। उनका संगठन इसका लगातार विरोध करता आया है। तीनों फैक्ट्रियों से काम छीने जाने की वजह से सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडराएगा।