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Kanpur: सेंट्रल पर पंखे नहीं, लखनऊ-वाराणसी में ठंडा पानी दूभर, स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की कमी, CAG रिपोर्ट

Tue, 18 Aug 2026 03:48 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Tue, 18 Aug 2026 03:48 PM IST
सार

Kanpur News: संसद में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के चार प्रमुख रेलवे स्टेशनों  पर यात्री सुविधाओं की पोल खुल गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये स्टेशन रेलवे बोर्ड के न्यूनतम मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं, और चौंकाने वाली बात यह है कि बजट की कमी न होने के बावजूद अधिकारियों ने करोड़ों रुपये बिना खर्च किए वापस लौटा दिए।

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Kanpur No fans at Central station cold water hard to come by in Lucknow and Varanasi CAG report
कानपुर सेंट्रल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण के दावों के बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश के चार प्रमुख रेलवे स्टेशनों की यात्री सुविधाओं की असलियत उजागर की है। कैग की गत 12 अगस्त को संसद में पेश की गई रिपोर्ट में साफ हुआ है कि उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) और उत्तर रेलवे (एनआर) के सबसे बड़े कमाऊ स्टेशन आज भी रेलवे बोर्ड के 2018 के न्यूनतम आवश्यक सुविधा मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।

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रिपोर्ट में बताया गया है कि कानपुर सेंट्रल पर पंखे तक नहीं हैं। कानपुर सेंट्रल स्टेशन से रोजाना लाखों यात्रियों की आवाजाही होती है। यहां प्लेटफॉर्म की चौड़ाई के अनुपात में पंखों की भारी कमी पाई गई है। मंडल मुख्यालय प्रयागराज जंक्शन पर खामियां कानपुर से भी गंभीर हैं। प्रयागराज जंक्शन पर बैठने की सीटें, बारिश व धूप से बचाव के लिए प्लेटफॉर्म शेड और पंखों की बड़ी कमी दर्ज की गई है।

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इनकी भारी कमी उजागर हुई
उत्तर रेलवे के लखनऊ स्टेशन पर भीषण गर्मी में ठंडा पानी देने वाले वॉटर कूलर मानक से कम मिले। वहीं, चारबाग व लखनऊ जंक्शन पर यात्रियों को दिशा-निर्देश देने वाले साइन बोर्ड गायब या अधूरे पाए गए। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र वाराणसी जंक्शन पर बुनियादी जरूरत यानी पीने के पानी के नल, वॉटर कूलर और साइन बोर्ड की भारी कमी उजागर हुई है। राहत भरी बात यह भी है कि वाराणसी के ही बनारस स्टेशन ने सभी 16 न्यूनतम मानक पूरे किए हैं।

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बजट की कमी नहीं, पैसा बिना खर्च किए लौटाया
रिपोर्ट के अनुसार, यात्री सुविधाओं में कमी की वजह बजट का न होना नहीं है बल्कि अधिकारियों की लापरवाही है। कानपुर और प्रयागराज का संचालन करने वाले एनसीआर ने बीते पांच वर्षों में यात्री सुविधाओं के तहत मिले बजट का 50% से 82% तक हिस्सा बिना खर्च किए सरेंडर कर दिया। वर्ष 2020-21 में 918.87 करोड़ रुपये के बजट में 163.71 करोड़ खर्च किए गए और 755.16 करोड़ बिना काम कराए वापस लौटा दिए गए। इसी तरह से वर्ष 2023-24 में 994.70 करोड़ रुपये में से केवल 500.27 करोड़ खर्च हुए और 494.43 करोड़ वापस लौटा दिए गए।

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स्वच्छता, सुरक्षा और बैठकों के मोर्चे पर भी बदहाली
एनसीआर के सभी 32 चयनित स्टेशनों पर पान और गुटके की पीक के दाग मिले। 21 स्टेशनों पर शौचालय गंदे मिले। 11 स्टेशनों पर वॉटर बूथ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए गए। 29 स्टेशनों पर आवारा कुत्तों का जमावड़ा मिला। 20 स्टेशनों पर अनधिकृत प्रवेश द्वार मिले। रिपोर्ट के अनुसार, जनता और यात्रियों की शिकायतें उठाने के लिए बनी मंडल रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति की बैठकें कराने में भी घोर लापरवाही बरती गई। प्रयागराज मंडल में वर्ष 2022-23 और 2023-24 में एक भी बैठक आयोजित नहीं की गई।

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