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Kanpur Nikay Chunav: मुस्लिमों ने जताया भाजपा पर भरोसा, मतों के ध्रुवीकरण से बदल गए समीकरण

Sun, 14 May 2023 11:57 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 14 May 2023 11:57 AM IST
सार

Kanpur News: निकाय चुनाव को लेकर भाजपा ने मुस्लिम बहुल इलाकों में 11 प्रत्याशी उतारकर नया दांव खेला था। इसका लाभ भी परिणामों में देखने को मिला है। मुस्लिम वर्ग ने पहले से ही यह तय कर लिया था कि जो जिताऊ प्रत्याशी होगा, उसे ही वोट देंगे।

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Kanpur Nikay Chunav, Muslims expressed trust in BJP, polarization of votes changed the equation
वोट डालने पहुंचीं मुस्लिम महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर नगर निकाय चुनाव में महापौर की सीट को लेकर इस बार भारतीय जनता पार्टी में जितना असमंजस रहा, उतना पहले कभी नहीं था। पार्टी इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थी कि इस बार भी महापौर उसी का बनेगा। हालांकि टिकट वितरण से लेकर परिणाम आने से पहले तक तरह-तरह की चर्चाएं थीं।

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भाजपा के अंदर महापौर प्रत्याशी प्रमिला पांडेय के लेकर सब कुछ ठीक नहीं है। हालांकि प्रमिला को मिली रिकॉर्ड जीत ने सारे राजनीतिक समीकरण बदल दिए। कहा जा रहा है कि इस जीत के कई फैक्टर हैं। सबसे बड़ी वजह विपक्षी दलों के वोटों का बिखराव और मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण।
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मुस्लिमों ने जताया भाजपा पर भरोसा
मुस्लिम वर्ग ने पहले से ही यह तय कर लिया था कि जो जिताऊ प्रत्याशी होगा, उसे ही वोट देंगे। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को यह लग रहा था कि मुस्लिम वर्ग के वोट पर सिर्फ उन्हीं का अधिकार है। हालांकि इस बार समीकरण बदल गए। भाजपा ने पहली बार 11 वार्डों में मुस्लिम प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा था।

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बूथ स्तर की राजनीति का भी मिला फायदा
भाजपा का कोई भी मुस्लिम प्रत्याशी जीत तो नहीं पाया, लेकिन मोदी और योगी की ओर से दी जा रही सुरक्षा और भरपेट भोजन की गारंटी ने ऐसा कर दिखाया, जिसकी विपक्षी दलों के साथ भाजपा को भी उम्मीद नहीं थी। इसी तरह पार्टी पदाधिकारियों की टीम ने भी बूथ स्तर तक जिस तरह से रणनीति बनाई, उसमें कामयाबी मिली।

संगनठ की रणनीति भी आई काम
कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह को पार्टी ने उनके अनुभव के आधार पर पहले झांसी नगर निगम में फिर कानपुर नगर निगम चुनाव में जिम्मेदारी दी। इसका पार्टी को फायदा भी मिला। इसी तरह वर्तमान क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल की संगठनात्मक रणनीति वार्डों से लेकर महापौर प्रत्याशी के लिए वोट जुटाने में सफल रही।

विधानसभा अध्यक्ष का प्रचार भी आया काम
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक प्रमिला के पक्ष में प्रचार भी काम आया। कहा जा रहा है कि भाजपा के अंदर चल रही अंदरूनी खींचतान भी उस दिन से काफी हद तक कम हो गई, जब टिकट वितरण को लेकर नाराज चल रहे सांसद सत्यदेव पचौरी को अपने साथ लेकर जनसभा में पहुंचे।

अम्मा का विनती करना, माफी मांगना भी आया काम
पार्टी में अंदरखाने चल रहे विरोध को खत्म करने और विरोधियों को अपने पक्ष में करने के लिए महापौर पद पर विजयी प्रमिला पांडेय (अम्मा) ने भी बड़ी ही कूटनीति से काम लिया। नीतू सिंह का टिकट काटकर जब उन्हें दिया गया तो सांसद पचौरी की नाराजगी दूर करने के लिए वे उनके घर गईं और उनके पैर पकड़कर माफी मांगी।

सिंधी समाज ने भी जिताया
संघ की नाराजगी उन पर कहीं भारी न पड़ जाए, प्रमिला ने बिना देरी किए नीतू सिंह के ससुर और क्षेत्रीय संघ चालक वीरेंद्रजीत के घर जाकर हाथ जोड़कर विनती की। इसी तरह मतदान के दिन सिंधी कॉलोनी में हुए विवाद के दौरान भी उन्होंने सिंधी समाज के वोट को अपने पक्ष में करने के लिए हाथ जोड़कर रोते हुए माफी भी मांगी।

मुस्लिम इलाकों में कम वोटिंग, मत विभाजन का दिखा असर
मुस्लिम बहुल इलाकों में इस बार वोटिंग प्रतिशत के कम होने और मतों का सपा-कांग्रेस में विभाजन होना भाजपा उम्मीदवार की बड़ी जीत की वजह बना। मुस्लिमों के महापौर पद के प्रत्याशियों के प्रति कोई खास दिलचस्पी न लेने और वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों की वजह से मतदान प्रतिशत कम हुआ।

सपा-कांग्रेस के मतों के बीच हुआ बंटवारा
समाजवादी पार्टी को छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले चार बार के पार्षद हाजी सुहेल अहमद और उनकी टीम की वजह से सपा-कांग्रेस के मतों के बीच प्रभावी बंटवारा हुआ। ऑल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल के महासचिव हाजी मोहम्मद सलीस का कहना है कि तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों को ऐसा लगने लगा कि मुस्लिमों के बीच अधिक प्रचार करने से उन्हें हिंदू वोट नहीं मिलेगा।

सांसद डिंपल यादव के रोड शो का रूट
उन्हें ध्रुवीकरण का डर सताने लगा था। इसलिए मुस्लिमों की महापौर पद के प्रत्याशियों के लिए कोई खास दिलचस्पी नहीं रही। मुस्लिम वोट देने अगर निकले भी, तो सिर्फ अपने वार्ड के प्रत्याशियों की वजह से मतदान केंद्र गए। सपा सांसद डिंपल यादव के रोड शो का रूट भी इसी हिसाब से निर्धारित किया गया था।

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