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विषधन में धान की सर्वाधिक पैदावार पर नहीं खुला खरीद केंद्र
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बिल्हौर। तहसील क्षेत्र के चौबेपुर, शिवराजपुर, बिल्हौर और ककवन में इस बार किसानों को उनकी धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,868 प्रति क्विंटल रुपये मिल सके, इसके लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर कुल 42 केंद्र बनाए गए पर ककवन ब्लॉक में इस बार सिर्फ दो ही केंद्र खोले गए। वहीं, विषधन इलाके में जहां सर्वाधिक धान की पैदावार होती है, वहां इस बार अफसरों की लापरवाही के चलते एक भी केंद्र नहीं खोला गया।
ककवन विकास खंड क्षेत्र में निचली गंग नहर और कई रजबहे होने के कारण बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान धान की पैदावार करते हैं। पर्याप्त सिंचाई के साधन होने से यहां बहुतायत में धान फसल पैदावार भी होती है। विषधन, दलेलपुर, वछना, पिटैयापुर, भवन निवादा, उट्टा, मनावा, कुरेह, नया निवादा, डरेकापुरवा, ब्राह्मणपुरवा, कसिगवां, औरोंताहरपुर, गढ़ी, रौंस, मलखरा, हालामऊ, मलखरिया, खरपतपुर, मौजमपुर, लोधनपुरवा, वासू निवादा, उत्तमपुर, सिहुरा, ढुलमऊ आदि ऐसे गांव हैं, जहां शत प्रतिशत किसान धान की पैदावार करते हैं। हालामऊ निवासी धान किसान कुलदीप यादव ने बताया कि विषधन में धान खरीद केंद्र न होने से किसानों को ककवन करीब 15 किमी. का चक्कर लगाकर अपनी फसल ले जानी पड़ेगी। यदि विषधन, उट्ठा में केंद्र खुले से किसानों का इसका लाभ होगा।
वहीं ब्राह्मणपुरवा गांव निवासी किसान ओम मिश्र ने बताया कि बारिश न होने से इस बार कई सिंचाई के बाद धान फसल तैयार हो सकी है। महंगी लागत लगी है, लेकिन सरकारी केंद्र न खुलने और निजी आढ़तों पर एक हजार रुपये प्रति क्विंटल धान बिक्री होने से इस बार घाटा होना तय है, सरकार को गांव-गांव दिनवार खरीद की व्यवस्था करनी चाहिए।
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ककवन विकास खंड क्षेत्र में निचली गंग नहर और कई रजबहे होने के कारण बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान धान की पैदावार करते हैं। पर्याप्त सिंचाई के साधन होने से यहां बहुतायत में धान फसल पैदावार भी होती है। विषधन, दलेलपुर, वछना, पिटैयापुर, भवन निवादा, उट्टा, मनावा, कुरेह, नया निवादा, डरेकापुरवा, ब्राह्मणपुरवा, कसिगवां, औरोंताहरपुर, गढ़ी, रौंस, मलखरा, हालामऊ, मलखरिया, खरपतपुर, मौजमपुर, लोधनपुरवा, वासू निवादा, उत्तमपुर, सिहुरा, ढुलमऊ आदि ऐसे गांव हैं, जहां शत प्रतिशत किसान धान की पैदावार करते हैं। हालामऊ निवासी धान किसान कुलदीप यादव ने बताया कि विषधन में धान खरीद केंद्र न होने से किसानों को ककवन करीब 15 किमी. का चक्कर लगाकर अपनी फसल ले जानी पड़ेगी। यदि विषधन, उट्ठा में केंद्र खुले से किसानों का इसका लाभ होगा।
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वहीं ब्राह्मणपुरवा गांव निवासी किसान ओम मिश्र ने बताया कि बारिश न होने से इस बार कई सिंचाई के बाद धान फसल तैयार हो सकी है। महंगी लागत लगी है, लेकिन सरकारी केंद्र न खुलने और निजी आढ़तों पर एक हजार रुपये प्रति क्विंटल धान बिक्री होने से इस बार घाटा होना तय है, सरकार को गांव-गांव दिनवार खरीद की व्यवस्था करनी चाहिए।
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