{"_id":"5f908f128ebc3e9b9a4fac51","slug":"kanpur-news-dehat-news-knp58990756","type":"story","status":"publish","title_hn":"धान खरीद केंद्रों पर सन्नाटा, निजी आढ़तियों की चांदी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धान खरीद केंद्रों पर सन्नाटा, निजी आढ़तियों की चांदी
विज्ञापन
धौरसलार-खजुरी मार्ग पर निजी आढ़ती की जमा धान।
- फोटो : DEHAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिवराजपुर (बिल्हौर)। सरकार द्वारा 15 अक्तूबर से धान खरीद की शुरुआत तो कर दी गई, पर खरीद प्रक्रिया में जटिलता के चलते ज्यादातर किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। बड़े पैमाने पर बिचौलिये किसानों की धान खरीद गुपचुप ढंग से केंद्रों में बेचकर भारी मुनाफा कमा रहे हैं।
विकासखंड शिवराजपुर में करीब आधा दर्जन से भी अधिक खरीद केंद्र बनाए गए हैं, जिसमें कृषि उत्पादन मंडी समिति मधई नेवादा के अलावा काकूपुर रब्बन, भौसाना आदि गांवों में निजी खरीद केंद्र भी खोले गए हैं पर कृषि उत्पादन मंडी समिति केंद्र को छोड़ दें तो अन्य खरीद केंद्र पर किसानों का एक दाना भी नहीं खरीदा जा रहा है। लोगों को यह भी पता नहीं है की उनके गांव या अगल-बगल कोई सरकारी धान खरीद केंद्र भी चल रहा है।
सदिकामऊ गांव के बड़की सिंह, मझिले सिंह, बहरमापुर गांव के राजन तिवारी आदि ने बताया की सरकारी खरीद केंद्रों में धान लेकर पहुंचने पर मौजूद कर्मचारियों द्वारा इतने नियम बता दिए जाते हैं। इससे परेशान होकर किसान अपनी धान बाजार मूल्य पर जो कि 11 सौ से लेकर 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल बेचने पर मजबूर हैं। किसानों ने बताया कि केंद्रों पर धान लेकर पहुंचने उनकी फसल में कई प्रकार की खामियां बताकर टरका दिया जाता है, जिससे वह मजबूरन निजी आढ़तियों को अपनी धान बिक्री कर देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विकासखंड शिवराजपुर में करीब आधा दर्जन से भी अधिक खरीद केंद्र बनाए गए हैं, जिसमें कृषि उत्पादन मंडी समिति मधई नेवादा के अलावा काकूपुर रब्बन, भौसाना आदि गांवों में निजी खरीद केंद्र भी खोले गए हैं पर कृषि उत्पादन मंडी समिति केंद्र को छोड़ दें तो अन्य खरीद केंद्र पर किसानों का एक दाना भी नहीं खरीदा जा रहा है। लोगों को यह भी पता नहीं है की उनके गांव या अगल-बगल कोई सरकारी धान खरीद केंद्र भी चल रहा है।
विज्ञापन
सदिकामऊ गांव के बड़की सिंह, मझिले सिंह, बहरमापुर गांव के राजन तिवारी आदि ने बताया की सरकारी खरीद केंद्रों में धान लेकर पहुंचने पर मौजूद कर्मचारियों द्वारा इतने नियम बता दिए जाते हैं। इससे परेशान होकर किसान अपनी धान बाजार मूल्य पर जो कि 11 सौ से लेकर 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल बेचने पर मजबूर हैं। किसानों ने बताया कि केंद्रों पर धान लेकर पहुंचने उनकी फसल में कई प्रकार की खामियां बताकर टरका दिया जाता है, जिससे वह मजबूरन निजी आढ़तियों को अपनी धान बिक्री कर देते हैं।
विज्ञापन