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कानपुर: एमपीडीएस बीमारी के केस चार गुना बढ़े, कम उम्र में टेंशन से जबड़े हो रहे जाम, हैलट अस्पताल की रिपोर्ट

Wed, 30 Sep 2026 12:29 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Wed, 30 Sep 2026 12:29 PM IST
सार

Kanpur News: हैलट अस्पताल में तनाव और नींद की कमी के कारण मायोफेशियल पेन डिस्फंक्शन सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि अब बुजुर्गों की जगह युवा और बच्चे इस बीमारी की चपेट में अधिक आ रहे हैं

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Kanpur MPDS cases have quadrupled stress is causing jaw locking at a young age Hallet Hospital report
सांकेतिक - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

तनाव व नींद की कमी से मायोफेशियल पेन डिस्फंक्शन सिंड्रोम (एमपीडीएस) के रोगी बढ़ रहे हैं। इस तरह के रोगियों के जबड़ों में खिंचाव और जोड़ों का दर्द होता है। हैलट में काफी संख्या में इस समस्या से परेशान रोगी पहुंच रहे हैं। अध्ययन में पता चला कि इनमें युवाओं और बच्चों की संख्या अधिक है। दो वर्ष पहले तक इस सिंड्रोम से पीड़ित उम्रदराज लोग ही आते थे। इनकी संख्या सप्ताह में चार से पांच होती थी, जो अब बढ़कर 15 से 20 हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार अब कम उम्र में ही बच्चों पर पढ़ाई से लेकर सौ में सौ नंबर लाने का दबाव डाला जाता है।

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इसके अलावा कई बार बच्चे जो करना चाहते हैं, उन्हें करने नहीं दिया जाता, ऊपर से अभिभावक अपनी इच्छाएं उन पर थोप देते हैं। इससे बच्चों में तनाव बढ़ रहा है और एमपीडीएस की समस्या बढ़ती जा रही है। दंत रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अशरफुल्लाह ने बताया कि इसके शुरुआती लक्षण लगातार सिरदर्द, चेहरे में खिंचाव और खाना चबाने में दर्द की शिकायत हैं।  अक्सर अभिभावक इसे आम कमजोरी या दांत-कान का दर्द मानकर टाल देते हैं, जबकि यह मायोफेशियल पेन डिस्फंक्शन सिंड्रोम हो सकता है। यह बीमारी जबड़े के जोड़ों और चेहरे की मांसपेशियों से जुड़ी है।

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ऑथ्रोसिंटेसिस विधि से गंभीर मामलों में करते हैं इलाज
बच्चों में चेहरे, कान व गर्दन में लगातार दर्द, मुंह कम खुलना या खोलने में रुकावट, जबड़े के जोड़ से टिक-टिक या कट-कट की आवाज आना, सुबह उठते ही सिरदर्द होना और आपस में दांत कसने की आदत इसके मुख्य लक्षण हैं। बच्चे अक्सर खाना खाते समय गाल में दर्द, सुबह चेहरा भारी लगने या उबासी लेने में तकलीफ की शिकायत करते हैं। उन्होंने बताया कि ऑथ्रोसिंटेसिस विधि से हम गंभीर मामलों में इलाज करते हैं। इनमें इंजेक्शन लगाकर जबड़े के जोड़ों की सफाई करते हैं। टेंस थेरेपी से भी इलाज किया जाता है।

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बन जाती हैं छोटी-छोटी गांठें
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अपराजिता ने बताया कि एमपीडीएस चेहरे, गर्दन और जबड़े की मांसपेशियों एवं जोड़ों का एक विकार है। पढ़ाई या परीक्षा के तनाव, सोते समय दांत पीसने, अत्यधिक चुइंगम, पेन-पेंसिल चबाने या अंगूठा चूसने जैसी आदतों के कारण जबड़े की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। मांसपेशियों में खिंचाव और ऐंठन से खून का बहाव प्रभावित होता है जिससे छोटी-छोटी गांठें (ट्रिगर पॉइंट्स) बन जाती हैं। ये गांठें पूरे चेहरे, सिर और गर्दन में दर्द का कारण बनती हैं।

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बचपन में न दिया ध्यान तो बाद़ में ठीक करना मुश्किल
डॉ. अपराजिता ने बताया कि बच्चों में मांसपेशियां और हड्डियां लचीली होने के कारण प्राथमिक उपचार से ये बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है। यदि बचपन में इस पर ध्यान न दिया जाए तो वयस्क होने पर जबड़े के जोड़ हमेशा के लिए घिस सकते हैं जो एक स्थायी नुकसान बन जाता है और बाद में इसे ठीक करना बेहद मुश्किल होता है। यदि बच्चा दर्द बताए तो तुरंत विशेषज्ञ को दिखाएं। बच्चे को नरम व आसानी से चबाने योग्य भोजन दें, दर्द की जगह पर गुनगुने पानी की बोतल से सिकाई करें और घर में तनावमुक्त माहौल बनाएं।

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