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कानपुर : मोहन स्टील के निदेशक केजरीवाल बंधुओं को नहीं मिली अग्रिम जमानत

Sat, 02 Oct 2021 12:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 02 Oct 2021 12:35 AM IST
सार

कोर्ट से गैर जमानती वारंट और कुर्की की आदेशिका जारी होने के बाद तीनों भाइयों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की मांग की थी।

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Kanpur: Mohan Steel director Kejriwal brothers did not get anticipatory bail
demo pic - फोटो : Social Media

विस्तार

7800 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में आरोपी मोहन स्टील प्रा.लि. के निदेशकों मोहन कृष्ण केजरीवाल, गोपाल कृष्ण केजरीवाल व श्रीकृष्ण केजरीवाल की अग्रिम जमानत अर्जी कंपनी मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत के न्यायाधीश प्रमोद कुमार ने खारिज कर दी है। कोर्ट से गैर जमानती वारंट और कुर्की की आदेशिका जारी होने के बाद तीनों भाइयों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की मांग की थी।

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सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) के डिप्टी डायरेक्टर व विवेचनाधिकारी प्रशांत बालियान की ओर से 15 मई 2020 को कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया गया था। इसमें 29 व्यक्तियों और 40 कंपनियों समेत कुल 69 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें मोहन स्टील प्रा. लि. के तीनों निदेशक भाई भी आरोपी हैं। 
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केजरीवाल बंधुओं की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत अर्जी में तर्क रखा गया कि उन्हें गलत तथ्यों पर फंसाया गया है। उन्होंने कोई ऋण नहीं लिया, उनकी किसी बैंक से देनदारी नहीं है न हीं उन्होंने कोई गारंटी ले रखी है। मुख्य आरोपी विक्रम कोठारी, सुनील वर्मा व उदय देसाई हैं, जो व्यापार करते थे उन्हें उच्च अदालतों से अंतरिम राहत मिल चुकी है। 
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वहीं एसएफआईओ के स्थायी अधिवक्ता कौशल किशोर शर्मा ने तर्क रखा कि मोहन स्टील प्रा. लि. के निदेशक तीनों भाइयों ने रोटोमैक ग्रुप व फ्रॉस्ट इंटरनेशनल कंपनी के साथ मिलकर व्यापार संचालित कर झूठे तथ्यों को पब्लिक सेक्टर बैंकों के सामने रखा, लेटर ऑफ क्रेडिट के रूप में बैंकों से क्रेडिट सुविधा ली और बैंकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। धोखाधड़ी सभी आरोपियों द्वारा मिलकर की गई है और सभी को कुछ न कुछ लाभ मिला है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपराध को गंभीर मानते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

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