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कानपुर: मेट्रो ने पहले दिन लगाए 117 फेरे, 30 हजार से ज्यादा ने किया सफर

Thu, 30 Dec 2021 12:32 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 30 Dec 2021 12:32 AM IST
सार

मोतीझील से सुबह छह बजे आईआईटी तक का पहला टिकट स्वरूप नगर के डॉ. राघव पांडेय ने खरीदा। वहीं मकरावटगंज निवासी सुनीता वार्ष्णेय पहला टिकट खरीदकर कानपुर मेट्रो की पहली महिला यात्री बनीं।

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Kanpur Metro Start News: More than 30 thousand passengers traveled on the first day of Metro
कानपुर मेट्रो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी मेट्रो रेल कारपोरेशन ने बुधवार से मेट्रो का सफर आम यात्रियों के लिए समर्पित कर दिया। पहले दिन चार मेट्रो ट्रेनों ने सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक 117 फेरे लगाए। इस दौरान 30 हजार से अधिक यात्रियों ने मेट्रो का सफर किया। 
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मोतीझील से सुबह छह बजे आईआईटी तक का पहला टिकट स्वरूप नगर के डॉ. राघव पांडेय ने खरीदा। वहीं मकरावटगंज निवासी सुनीता वार्ष्णेय पहला टिकट खरीदकर कानपुर मेट्रो की पहली महिला यात्री बनीं। आईआईटी मेट्रो स्टेशन पर पहला टिकट इंद्रानगर निवासी एंद्री द्विवेदी और भव्या द्विवेदी ने अपने पिता डीके द्विवेदी के साथ खरीदा।
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उन्होंने मोतीझील तक सफर किया। ई-वॉलेट से पहला टिकट सुशील सिंह ने गुरुदेव स्टेशन से खरीदा। टिकट बिक्री के मामले में मोतीझील मेट्रो स्टेशन अव्वल रहा। यहां से सबसे ज्यादा यात्री सवार हुए। दूसरे नंबर पर आईआईटी स्टेशन और तीसरे नंबर पर रावतपुर मेट्रो स्टेशन रहा। पहले दिन टिकट बिक्री से आठ से साढ़े आठ लाख रुपये की आमदनी का अनुमान है। 
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हर 10 मिनट पर मिलेगी मेट्रो
अभी दोनों टर्मिनल के बीच चार मेट्रो ट्रेनों का संचालन हो रहा है। हर 10 मिनट में यात्रियों को ट्रेनें मिल रही हैं। नए साल में दो मेट्रो ट्रेनें और आ जाएंगी, तब हर पांच मिनट में यात्रियों को मेट्रो मिलेगी। सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक मेट्रो का संचालन होगा। नवंबर 2024 में जब दोनों कॉरिडोर बन जाएंगे, तब 39 मेट्रो दोनों रूटों पर संचालित होने लगेंगी।

ट्रेन में नहीं हुआ एनाउंसमेंट
सुबह आईआईटी से मोतीझील के लिए चली मेट्रो के अंदर स्टेशन आने का एनाउंसमेंट नहीं हुआ, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी रही। जैसे ही ट्रेन रुकती और दरवाजा खुलता लोग स्टेशन जानने के लिए बाहर झांकने लगते। या एक दूसरे से पूछते कौन सा स्टेशन आया है।

टिकट का सर्वर हुआ डाउन
मोतीझील स्टेशन पर सुबह 6:07 बजे अचानक टिकट काउंटर का सर्वर डाउन हो गया। इससे कुछ यात्रियों को प्रिंटेड टिकट नहीं मिल पाया। काउंटर से कुछ यात्रियों को मैनुअल टिकट काटकर दिया गया। गार्ड ने टिकट देखने के बाद उक्त यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर जाने दिया।

 

नवंबर 2024 में मेट्रो बन जाएगी लाइफलाइन
आईआईटी से मोतीझील तक मेट्रो शुरू होना सिर्फ आगाज है। नवंबर 2024 तक मेट्रो पूरी तरह से शहर की लाइफ लाइन बन जाएगी। यह आगाज मेट्रो के पहले कॉरिडोर का सिर्फ एक हिस्सा है। कॉरिडोर साढ़े 23 किलोमीटर आईआईटी से नौबस्ता तक है। मोतीझील के आगे के स्टेशन भूमिगत हो जाएंगे। फिर बारादेवी में एलीवेटेड ट्रैक होगा और वहां से नौबस्ता तक मेट्रो सड़क के ओवरहेड ही चलेगी। दूसरा कॉरिडोर सीएसए से बर्रा-दो तक साढ़े आठ किमी का होगा। रावतपुर स्टेशन दोनों कॉरिडोर का मिलन केंद्र होगा। इस रूट के आठ स्टेशनों में चार एलीवेटेड और चार भूमिगत ट्रैक होंगे। यहां से यात्री रूट को बदल सकेंगे। नवंबर 2019 में शुरू हुआ मेट्रो का काम नवंबर 2024 में पूरा हो जाएगा। 

हमने कानपुरवासियों को निर्धारित समय सीमा में एक विश्वस्तरीय मेट्रो सेवा उपलब्ध कराने का वादा पूरा कर लिया है। लेकिन हमें अभी रुकना नहीं है। जल्द ही निर्धारित अवधि में मेट्रो के दोनों कॉरिडोर्स का काम पूरा कर लिया जाएगा।- कुमार केशव, एमडी, यूपीएमआरसी


 

मेट्रो के पहले यात्री बोले
मेट्रो का पहला यात्री बनने की ख्वाहिश थी, लिहाजा सुबह छह बजे की मेट्रो पकड़ने के लिए सुबह साढ़े पांच बजे ही मेट्रो स्टेशन पहुंच गया था। आईआईटी तक सफर करने जा रहा हूं। कोई काम नहीं है, सिर्फ फर्स्ट राइड लेकर साक्षी बनने की खुशी होगी। आईआईटी के आसपास काम होगा तो मेट्रो से ही जाऊंगा।- डॉ. राघव पांडेय, स्वरूप नगर

हल्की बारिश और कड़ाके की ठंड मेट्रो में पहला सफर करने के उत्साह के आगे नहीं टिकी। पति दिनेश वार्ष्णेय के साथ आईआईटी तक सफर कर वापस आ जाऊंगी। यूपीएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने गिफ्ट दिया, जिससे अभिभूत हूं। कानपुर मेट्रो में यूरोप और यूएसए से बेहतर सुविधाएं हैं।- सुनीता वार्ष्णेय, मकरावटगंज

बच्चों की जिद थी कि मेट्रो में घूमना है। मैं बच्चों को लेकर 5.15 बजे स्टेशन आ गया था। मोतीझील तक गया। मजा आ गया। लगा ही नहीं कि कानपुर में हूं। धीरे-धीरे मेट्रो कानपुर की लाइफ लाइन बन जाएगी। सड़कों से वाहनों का लोड कम होगा। मेट्रो ट्रेन को साफ रखना सबकी जिम्मेदारी है। बच्चों को भी मैंने यही बताया है।- डीके द्विवेदी, इंद्रानगर
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