कानपुर: अधिवक्ताओं ने किया न्यायिक कार्य बहिष्कार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में भी कामकाज ठप
Kanpur News: कानपुर बार और लायर्स एसोसिएशन के प्रांतीय सम्मेलन में लिए गए निर्णय के तहत बुधवार को अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का पूर्ण बहिष्कार किया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हाईकोर्ट बेंच स्थापना संघर्ष समिति ने भी समर्थन देते हुए 22 जिलों और सभी तहसीलों में कामकाज ठप रखा।
विस्तार
कानपुर में बार एसोसिएशन व लायर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में 10 व 11 सितंबर को दो दिन चले प्रांतीय सम्मेलन में अधिवक्ताओं की मांगे न माने जाने तक सप्ताह में हर बुधवार को न्यायिक कार्य बहिष्कार करने की घोषणा की गई थी। इसी घोषणा के तहत बुधवार को कानपुर में सभी अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर दिया। प्रदेश के सभी जिलों में हड़ताल होने का दावा किया जा रहा है।
अधिवक्ता बार एसोसिएशन कार्यालय के बाहर इकट्ठा हुए और अधिवक्ता एकता जिंदाबाद, हमारी मांगें पूरी करो के नारे लगाते हुए अपनी एकजुटता दिखाई। इसके बाद वकीलों ने अलग-अलग समूह बनाया। एक समूह अदालतों की ओर, एक रजिस्ट्री कार्यालय और एक समूह तहसील की ओर रवाना हो गया। यहां अधिवक्ताओं ने घूम घूम कर नारेबाजी करते हुए सभी अधिवक्ताओं से न्यायिक कार्य न करने का आह्वान किया।
कचहरी में सन्नाटे सा माहौल रहा
मंगलवार को ही बार व लाॅयर्स एसोसिएशन ने एक नोटिस जारी करके सभी अधिवक्ताओं को आगाह किया था कि अगर प्रांतीय सम्मेलन में लिए गए निर्णय के तहत बुधवार को कार्य बहिष्कार के दौरान किसी भी अधिवक्ता ने कोई न्यायिक कार्य किया, तो दोनों संस्थाओं से उसकी सदस्यता निलंबित कर दी जाएगी। सख्ती के चलते पूरी कचहरी में सन्नाटे सा माहौल रहा। टाइपिस्ट, स्टांप वेंडर व फोटोकापी की भी ज्यादातर दुकानें बंद रहीं।
कानपुर में पास हुए प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा
बार एसोसिएशन के महामंत्री बिनय मिश्रा ने बताया कि प्रांतीय सम्मेलन की आंच पूरे प्रदेश में फैल चुकी है। मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना का प्रस्ताव भी प्रांतीय सम्मेलन में पास हुआ था। बार एसोसिएशन को मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के लिए वर्षों से संघर्ष कर रही हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर से जारी एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें बताया गया है कि समिति की ओर से हुई वर्चुअल बैठक में कानपुर में पास हुए प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिले व तहसीलों के अधिवक्ताओं ने बुधवार को न्यायिक कार्य बहिष्कार कर दिया है।