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यूपी: ‘दलदल में दम तोड़ते बेजुबान’, गोवंश के शवों को नोंचते मिले कुत्ते, निरीक्षण में सामने आया खौफनाक मंजर
Wed, 02 Sep 2026 10:53 AM IST
Himanshu Awasthi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Himanshu Awasthi
Updated Wed, 02 Sep 2026 10:53 AM IST
सार
Kanpur News: भीतरगांव विकास खंड स्थित बेहटा-गंभीरपुर गौआश्रय स्थल से बेहद झकझोर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। नायब तहसीलदार, बीडीओ और सचिव के औचक निरीक्षण के दौरान गोशाला के अंदर दलदल में फंसे और तड़पते हुए कई गोवंश मिले। परिसर में खुले में पड़े मृत गोवंशों के शवों को कुत्ते नोंचते नजर आए।
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जानकारी करते नायब तहसीलदार शिखा शुक्ला, बीडीओ गिरीश मिश्रा और अन्य
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कानपुर जिले के भीतरगांव विकास खंड स्थित बेहटा-गंभीरपुर गौआश्रय स्थल से इंसानियत को झकझोर देने वाली और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलती भयावह तस्वीरें सामने आई हैं। जब नायब तहसीलदार शिखा शुक्ला और भीतरगांव के बीडीओ गिरीश चंद्र मिश्रा सचिव बृजेश यादव के साथ आश्रय स्थल के अंदर पहुंचे, तो दलदल के बीच बेबसी से तड़पते और खाली पेट जिंदगी की आखिरी सांसें गिनते कई गोवंश मिले।
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कोई दलदल में फंसा मुंह से फेन निकाल रहा था, तो कोई हांफते-हांफते बेदम हो चुका था।पिछले एक सप्ताह में कई गोवंशों की तड़प-तड़पकर मौत हो चुकी है, जिनके शव परिसर के अंदर खुले में पड़े मिले। कहीं एक शव को कुत्ते नोच रहे थे, तो कहीं कुत्ते जमीन में गड्ढा खोदकर दबाए गए शव को बाहर निकालते दिखे।
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तड़प-तड़पकर हो जाती है मौत
बेहटा-गंभीरपुर के इस गौ-आश्रय स्थल में कुल 105 गोवंश मौजूद हैं, जिनकी देखरेख के लिए तीन केयरटेकर नियुक्त हैं। इसके बावजूद हालात यह दर्शाते हैं कि जो गोवंश एक बार दलदल में गिर जाता है। उसे उठाने की जहमत कोई नहीं उठाता और कुछ ही दिनों में तड़प-तड़पकर उसकी मौत हो जाती है। बीमार गोवंशों की आंखों की बेबसी और उनके मुंह से निकलता फेन, जमीनी स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही को उजागर करता है, जो मुख्यमंत्री की इस प्राथमिकता वाली योजना पर पानी फेर रहे हैं।