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कानपुर: दूसरी लहर में 69 फीसदी बच्चों को कोरोना ने दिया मानसिक आघात, शोध में सामने आई ये बात
Sun, 02 Jan 2022 11:30 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 02 Jan 2022 11:30 PM IST
सार
प्रो. बृजभूषण ने बताया कि जुलाई 2021 में बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर अध्ययन किया गया। 68.9 फीसदी किशोर पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस से प्रभावित थे।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
कोरोना की दूसरी लहर ने 69 फीसदी बच्चों को मानसिक आघात पहुंचाया है। बच्चे खुद संक्रमित नहीं हुए लेकिन घर परिवार, आस-पड़ोस के लोगों को अस्पताल में भर्ती होता देख या एंबुलेंस के सायरन ने उनके मन में कुठाराघात किया।
आईआईटी के ह्यूमेनिटीज और सोशल साइंस के प्रोफेसर बृजभूषण ने यह शोध किया है। शोध जल्द ही जर्नल फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी के नवीनतम संस्करण में प्रकाशित होगा। प्रो. बृजभूषण ने नौ से 20 साल की उम्र के 412 बच्चों और युवाओं को इस शोध में शामिल किया।
इनमें 226 लड़के और 186 लड़कियां रहीं। इनमें 43 फीसदी शहरी और 57 ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को शामिल किया गया है। इनमें से 89 फीसदी के एक से अधिक भाई-बहन थे और 50 फीसदी बच्चे अपने माता-पिता और दादा-दादी के साथ रह रहे थे। प्रो. बृजभूषण ने बताया कि जुलाई 2021 में बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर अध्ययन किया गया। 68.9 फीसदी किशोर पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस से प्रभावित थे।
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आईआईटी के ह्यूमेनिटीज और सोशल साइंस के प्रोफेसर बृजभूषण ने यह शोध किया है। शोध जल्द ही जर्नल फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी के नवीनतम संस्करण में प्रकाशित होगा। प्रो. बृजभूषण ने नौ से 20 साल की उम्र के 412 बच्चों और युवाओं को इस शोध में शामिल किया।
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इनमें 226 लड़के और 186 लड़कियां रहीं। इनमें 43 फीसदी शहरी और 57 ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को शामिल किया गया है। इनमें से 89 फीसदी के एक से अधिक भाई-बहन थे और 50 फीसदी बच्चे अपने माता-पिता और दादा-दादी के साथ रह रहे थे। प्रो. बृजभूषण ने बताया कि जुलाई 2021 में बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर अध्ययन किया गया। 68.9 फीसदी किशोर पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस से प्रभावित थे।
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ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में मानसिक आघात अधिक था। वहीं, अस्पताल में भर्ती लोगों को देख, टीवी पर खबरें देखने वाले शहरी क्षेत्रों के बच्चों में उत्तेजना काफी अधिक मिली लेकिन इनमें 39.79 फीसदी में पोस्ट ट्रॉमेटिक ग्रोथ भी देखने को मिली। पोस्ट ट्रॉमेटिक ग्रोथ का मतलब विषम परिस्थितियों के बाद आया सकारात्मक बदलाव होता है।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों में एक से अधिक भाई बहन थे या जिन्होंने टीवी में खबरों को कम देखा, उनमें सकारात्मक बदलाव आए। कोरोना उनके मन में उतना डर नहीं बना पाया। संयुक्त परिवार में रहने वाले बच्चा इस नकारात्मकता से जल्द उबर गया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एकल परिवार की संरचना को तोड़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों में एक से अधिक भाई बहन थे या जिन्होंने टीवी में खबरों को कम देखा, उनमें सकारात्मक बदलाव आए। कोरोना उनके मन में उतना डर नहीं बना पाया। संयुक्त परिवार में रहने वाले बच्चा इस नकारात्मकता से जल्द उबर गया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एकल परिवार की संरचना को तोड़ने की आवश्यकता है।