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कानपुर: कटरी में केडीए की हजार बीघा जमीन पर कब्जे, जांच पड़ताल में हुआ खुलासा, अधिकारियों मिलीभगत
Sun, 04 Oct 2020 02:02 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 04 Oct 2020 02:02 PM IST
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जमीन से कब्जे हटाती जेसीबी
- फोटो : amar ujala
कानपुर में केडीए अफसरों, कर्मियों की मिलीभगत से गंगा कटरी के शंकरपुर सराय, शिवधरखेड़ा की अरबों की जमीन पर अवैध कब्जे हो गए हैं। इन्हीं दोनों गांव में ही करीब 1000 बीघा जमीन पर अवैध कब्जे हैं। शनिवार को जांच में मिलीभगत से कब्जे होने के संकेत मिले।
जांच जारी है, इसमें कई अधिकारियों, कर्मियों के नाम उजागर होने की संभावना है। विशेष कार्याधिकारी भैरपाल सिंह के नेतृत्व में टीम जांच कर रही है। केडीए के रिकॉर्ड के अनुसार शंकरपुर सराय में विकास प्राधिकरण की करीब 1800 एकड़ जमीन है।
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जांच जारी है, इसमें कई अधिकारियों, कर्मियों के नाम उजागर होने की संभावना है। विशेष कार्याधिकारी भैरपाल सिंह के नेतृत्व में टीम जांच कर रही है। केडीए के रिकॉर्ड के अनुसार शंकरपुर सराय में विकास प्राधिकरण की करीब 1800 एकड़ जमीन है।
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इसी के पास स्थित शिवधरखेड़ा में करीब 700 एकड़ जमीन है। केडीए की तरफ से अब तक हुई जांच में शंकरपुर सराय क्षेत्र में ही करीब 1000 बीघा जमीन पर अवैध कब्जे का पता चला है। केडीए में पहले 85 गांव क्षेत्रों की जमीनें आती थीं।
बाद में शासनादेश में संशोधन के बाद डूब क्षेत्र की जमीन भी विकास प्राधिकरण के स्वामित्व में आई। गंगा बैराज से शुक्लागंज तक गंगा कटरी की डूब क्षेत्र की लाखों बीघा जमीन भी केडीए को मिल गई, पर केडीए ने न तो इसे अवैध कब्जों से बचाने का ठोस प्रयास किया और न ही वहां आवासीय सहित अन्य योजनाएं लाया।
चार साल पहले वहां नीदरलैंड की तर्ज पर मॉडर्न सिटी विकसित करने की योजना बनी, पर बाद में उसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। मिलीभगत के चलते भूमाफिया वहां धड़ल्ले से कब्जे करने लगे और प्लाटिंग कर डाली। कई ने तो फर्जी दस्तावेज भी तैयार करा लिए और इन्हें बेच कर मोटी रकम कमाई।
बाद में शासनादेश में संशोधन के बाद डूब क्षेत्र की जमीन भी विकास प्राधिकरण के स्वामित्व में आई। गंगा बैराज से शुक्लागंज तक गंगा कटरी की डूब क्षेत्र की लाखों बीघा जमीन भी केडीए को मिल गई, पर केडीए ने न तो इसे अवैध कब्जों से बचाने का ठोस प्रयास किया और न ही वहां आवासीय सहित अन्य योजनाएं लाया।
चार साल पहले वहां नीदरलैंड की तर्ज पर मॉडर्न सिटी विकसित करने की योजना बनी, पर बाद में उसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। मिलीभगत के चलते भूमाफिया वहां धड़ल्ले से कब्जे करने लगे और प्लाटिंग कर डाली। कई ने तो फर्जी दस्तावेज भी तैयार करा लिए और इन्हें बेच कर मोटी रकम कमाई।