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कानपुर: आईआईटी ने देशभर के छात्रों से मांगा पॉवर ग्रिड हाईटेक करने का आइडिया, मिलेगी छह लाख की फेलोशिप
Thu, 14 Oct 2021 10:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 14 Oct 2021 10:50 PM IST
सार
आइडिया पसंद आने पर फेलोशिप के रूप में 50 हजार रुपये प्रतिमाह साल भर तक दिए जाएंगे। ग्रिड को स्मार्ट बनाने की तकनीक विकसित करने के लिए आईआईटी ने इनोवेशन फेलोशिप इन स्मार्ट ग्रिड टेक्नोलॉजी लांच की है।
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आईआईटी कानपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पॉवर ग्रिड को और मजबूत व हाईटेक करने के साथ ही साइबर अटैक से बचाने के लिए आईआईटी कानपुर ने देशभर के छात्रों से आइडिया मांगा है। आइडिया को आईआईटी के वैज्ञानिक समझेंगे और उसे अपनी तकनीक देकर विकसित करेंगे।
साथ ही आइडिया पसंद आने पर फेलोशिप के रूप में 50 हजार रुपये प्रतिमाह साल भर तक दिए जाएंगे। ग्रिड को स्मार्ट बनाने की तकनीक विकसित करने के लिए आईआईटी ने इनोवेशन फेलोशिप इन स्मार्ट ग्रिड टेक्नोलॉजी लांच की है।
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साथ ही आइडिया पसंद आने पर फेलोशिप के रूप में 50 हजार रुपये प्रतिमाह साल भर तक दिए जाएंगे। ग्रिड को स्मार्ट बनाने की तकनीक विकसित करने के लिए आईआईटी ने इनोवेशन फेलोशिप इन स्मार्ट ग्रिड टेक्नोलॉजी लांच की है।
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इस प्रतियोगिता में चार वर्षीय स्नातक कोर्स करने वाले छात्र बेहतर व इनोवेटिव आइडिया के साथ प्रतिभाग कर सकते हैं। बेहतर आइडिया का चयन संस्थान में स्थित स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (सिक) करेगा। संस्थान आइडिया देने वाले अभ्यर्थी को सिक में इंक्यूबेट करेगा और उसके आइडिया को स्टार्टअप के रूप में विकसित करेगा।
यह है उद्देश्य
आईआईटी का मुख्य उद्देश्य ट्रांसमिशन व वितरण नेटवर्क को मजबूत करना है। इसे साइबर सिक्योरिटी से भी जोड़ने की तैयारी है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण, ईवी चार्जिंग स्टेशन, माइक्रोग्रिड, इंटेलीजेंट सेंसर और नियंत्रक को अत्याधुनिक करना है।
इस पर एक साल से आईआईटी काम कर रहा है। संस्थान के वैज्ञानिक प्रो. अंकुश शर्मा सिर्फ शोध नहीं बल्कि पावर से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। ग्रिड टेक्नोलॉजी को स्मार्ट बनाने के लिए आईआईटी और पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) के बीच समझौता भी हुआ है।
यह है उद्देश्य
आईआईटी का मुख्य उद्देश्य ट्रांसमिशन व वितरण नेटवर्क को मजबूत करना है। इसे साइबर सिक्योरिटी से भी जोड़ने की तैयारी है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण, ईवी चार्जिंग स्टेशन, माइक्रोग्रिड, इंटेलीजेंट सेंसर और नियंत्रक को अत्याधुनिक करना है।
इस पर एक साल से आईआईटी काम कर रहा है। संस्थान के वैज्ञानिक प्रो. अंकुश शर्मा सिर्फ शोध नहीं बल्कि पावर से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। ग्रिड टेक्नोलॉजी को स्मार्ट बनाने के लिए आईआईटी और पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) के बीच समझौता भी हुआ है।