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UP: बहू को बेटी माना…उसने मेरा घर उजाड़ दिया, बेटे के हत्यारों को सजा मिलते ही फफक पड़े पिता, कही ये बात

Sat, 17 Jan 2026 09:51 AM IST
हिमांशु अवस्थी आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर
आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 17 Jan 2026 09:51 AM IST
सार

Kanpur News: बेटे के कातिल पत्नी और प्रेमी को उम्रकैद मिलने पर पीड़ित पिता ने न्यायपालिका का आभार जताया। कोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि विश्वास की हत्या करने वाले ऐसे जघन्य अपराध समाज के ताने-बाने को नष्ट कर रहे हैं।

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Kanpur I treated my daughter in law like my own daughter she ruined my home the father broke down in tears
प्रतीक हत्याकांड में पत्नी और प्रेमी को आजीवन कारावास - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में कोर्ट का फैसला सुनकर प्रतीक के पिता पुनीत कुमार शर्मा की आंखों से आंसू छलक आए। रूंधे गले से बोले, कोर्ट से मिला इंसाफ, अब बेटे की आत्मा को मिलेगी शांति। बहू जिसे बेटी मानता था, उसी ने मेरे इकलौते बेटे की हत्या कर शव का अंतिम संस्कार तक कर दिया। आखिरी समय में बेटे को देख भी नहीं सका। एक बाप के लिए जवान बेटे की मौत से बड़ा कोई सदमा नहीं हो सकता। खबर सुनकर तो मेरा भी मर जाने का मन किया, लेकिन बेटे को इंसाफ दिलाने और मासूम बच्चों की परवरिश का ख्याल आया।

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इस पर सबकुछ भूलकर इसी में जुट गया। परिवार में भाइयों ने साथ दिया और बच्चों की अच्छी तरह से परवरिश हो रही है। कोर्ट की तारीखों पर इंसाफ के लिए दौड़ता रहा और आज कोर्ट का फैसला सुनने के बाद कलेजे को ठंडक पड़ी। घटना को याद करते हुए पुनीत ने बताया कि बेटा गोविंद नगर में मेडिकल स्टोर चलाता था। आयुष हॉस्पिटल में भर्ती होने वाले मरीजों के पर्चे लेकर आता था और दवा में कमीशन लेता था। इसी दौरान आयुष और प्रतीक की मुलाकात हुई। धीरे-धीरे आयुष ने मेलजोल बढ़ाया और घर में भी आने-जाने लगा।

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बेटे-बहू और बच्चों की गुमशुदगी दर्ज कराई थी
मेरे रिश्तेदार लखनऊ में भर्ती थे तो मैं उन्हें देखने गया था। प्रतीक भी नेहा और बच्चों के साथ लखनऊ आया फिर फैजाबाद ससुराल जाने की बात कहकर चला गया।  दो-तीन दिन बाद नेहा तो बच्चों संग लौटी लेकिन प्रतीक नहीं था। पूछने पर गाड़ी खराब होने और बनवाकर आने की बात कही। दो दिन बाद नेहा भी बच्चों को लेकर गई और वापस नहीं लौटी। फोन भी बंद थे। आशंका पर बेटे-बहू और बच्चों की गुमशुदगी दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने जब घटना का खुलासा किया, तो पैरों तले जमीन ही खिसक गई।

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ऐसे अपराध सामाजिक व्यवस्था के लिए घातक
कोर्ट ने कहा, मौजूदा दौर में ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं जो सामाजिक व्यवस्था के लिए घातक हैं क्योंकि पति-पत्नी का रिश्ता केवल विश्वास पर ही आधारित होता है, ऐसे अपराधों से वैवाहिक संबंधों में अविश्वास व भय का माहौल बनता है जो भारतीय सामाजिक व्यवस्था के लिए घातक है। इस मामले में नेहा ने आयुष के साथ मिलकर प्रतीक की सोची-समझी साजिश के तहत हत्या कर आनन-फानन में शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। अपराध विरल से विरलतम श्रेणी का नहीं लेकिन गंभीर प्रकृति का है इसलिए दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई जाती है।

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सजा के समय दिया प्रार्थना पत्र खारिज
एडीजीसी संजय कुमार झा ने बताया कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर कड़ी दर कड़ी जोड़ी गई क्योंकि गवाह झूठ बोल सकता है लेकिन परिस्थितियां नहीं। कोर्ट ने भी इसे माना। जून 2024 में चार्जशीट दाखिल हुई, अगस्त 2024 में आरोप तय होने के बाद सात गवाह पेश कराए गए और 19 माह में न्यायिक कार्यवाही पूरी कर ली गई। सजा पर सुनवाई के दौरान नेहा की ओर से एक नए अधिवक्ता ने सफाई साक्ष्य देने के लिए एक प्रार्थना पत्र दिया लेकिन अभियोजन के विरोध के बाद कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

तारीखों में घटनाक्रम

  • 06 मार्च 2024 को प्रतीक पत्नी बच्चों संग घर से निकला।
  • 10 मार्च 2024 को प्रतीक की होटल में की गई हत्या।
  • 12 मार्च 2024 को नेहा बच्चों संग अकेले वापस लौटी।
  • 16 मार्च 2024 को नेहा बच्चों को लेकर घर से चली गई।
  • 21 मार्च 2024 को पिता ने दिया था गुमशुदगी का प्रार्थना पत्र।
  • 16 अप्रैल 2024 को नौबस्ता थाने में दर्ज हुई हत्या की रिपोर्ट।
  • 17 अप्रैल 2024 को नेहा और आयुष को गिरफ्तार किया गया।
  • 08 जून 2024 को पत्नी व प्रेमी के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट।
  • 21 अगस्त 2024 को दोनों पर कोर्ट ने तय किए आरोप।
  • 13 जनवरी 2026 को कोर्ट ने दोनों को दोषी करार दिया।
  • 16 जनवरी 2026 को कोर्ट ने दोनों को सुनाई उम्रकैद की सजा।
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