{"_id":"6acd0e6d5a1f66f9340894e2","slug":"kanpur-husband-made-co-borrower-for-28-45-lakh-loan-without-his-knowledge-case-registered-against-12-people-2026-10-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"कानपुर: पति को बिना बताए 28.45 लाख के लोन में सह ऋणी बनाया, 12 पर रिपोर्ट दर्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानपुर: पति को बिना बताए 28.45 लाख के लोन में सह ऋणी बनाया, 12 पर रिपोर्ट दर्ज
Mon, 12 Oct 2026 10:23 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Mon, 12 Oct 2026 10:23 PM IST
सार
मकान के मूल दस्तावेजों के दुरुपयोग का आरोप है। कोर्ट के आदेश पर 12 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चकेरी के काजीखेड़ा निवासी नवी हसन ने पत्नी शकीला अली पर मकान के मूल दस्तावेजों का कथित दुरुपयोग कर 28.45 लाख का ऋण लेने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि बिना जानकारी और सहमति के उन्हें सह-ऋणी दर्शाया गया। मामले में कोर्ट के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने पिरामल फाइनेंस कंपनी के अधिकारियों-कर्मचारियों समेत 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
नवी हसन ने बताया कि सितंबर 2017 में पिता ने पंजीकृत दानपत्र के जरिये उन्हें मकान दिया था। पत्नी से 2023 में विवाद के बाद दोनों अलग रहने लगे। जून 2025 में पत्नी घर छोड़कर चली गईं। आरोप है कि उन्होंने मकान के मूल दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ऋण लिया। आवेदन में नवी को सह-ऋणी दिखाया गया, जबकि संपर्क के लिए पत्नी का दूसरा मोबाइल नंबर और ईमेल दर्ज किया गया।
नवी का कहना है कि उन्होंने न ऋण के लिए आवेदन किया, न दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और न सहमति दी। बावजूद 28,45,683 रुपये पत्नी के खाते में भेजे गए। ऋण की किस्तें भी पत्नी ही जमा करती रहीं। मामले में पत्नी शकीला, उनके भाई मो. रिजवान और मो. फहीम के अलावा पिरामल फाइनेंस के शाखा प्रबंधक, अधिकृत अधिकारी उत्कर्ष श्रीवास्तव और क्रेडिट, बिक्री, केवाईसी, फील्ड और ऋण वितरण से जुड़े कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है। कोतवाली इंस्पेक्टर अरुण कुमार द्विवेदी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नवी हसन ने बताया कि सितंबर 2017 में पिता ने पंजीकृत दानपत्र के जरिये उन्हें मकान दिया था। पत्नी से 2023 में विवाद के बाद दोनों अलग रहने लगे। जून 2025 में पत्नी घर छोड़कर चली गईं। आरोप है कि उन्होंने मकान के मूल दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ऋण लिया। आवेदन में नवी को सह-ऋणी दिखाया गया, जबकि संपर्क के लिए पत्नी का दूसरा मोबाइल नंबर और ईमेल दर्ज किया गया।
विज्ञापन
नवी का कहना है कि उन्होंने न ऋण के लिए आवेदन किया, न दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और न सहमति दी। बावजूद 28,45,683 रुपये पत्नी के खाते में भेजे गए। ऋण की किस्तें भी पत्नी ही जमा करती रहीं। मामले में पत्नी शकीला, उनके भाई मो. रिजवान और मो. फहीम के अलावा पिरामल फाइनेंस के शाखा प्रबंधक, अधिकृत अधिकारी उत्कर्ष श्रीवास्तव और क्रेडिट, बिक्री, केवाईसी, फील्ड और ऋण वितरण से जुड़े कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है। कोतवाली इंस्पेक्टर अरुण कुमार द्विवेदी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
विज्ञापन