Kanpur Honey Trap: 150 बैंक खाते ऑपरेट कर रहा था साइबर ठगों का गिरोह, सरगना की तलाश में हरियाणा जाएगी पुलिस
क्राइम ब्रांच ने 29 लाख की ठगी की वारदात का राजफाश किया था, जिसमें दो आरोपियों को जेल भेजा गया था। वहीं, जांच में सामने आया है कि साइबर ठगों का गिरोह 150 बैंक खाते ऑपरेट कर रहा था। इनमें एक साल में दो करोड़ रुपये से अधिक का ट्रांजेक्शन मिला है।
विस्तार
कानपुर में सोशल मीडिया पर दोस्ती कर अश्लील वीडियो बनाकर वसूली करने के मामले में क्राइम ब्रांच की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। साइबर ठगी का गिरोह करीब डेढ़ सौ बैंक खाते ऑपरेट कर रहा था। इन खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर कराते थे। रकम आने के बाद एटीम से निकालकर खाते बंद कर देते थे।
गोविंदनगर निवासी एक कारोबारी को फेसबुक पर एक कथित महिला ने दोस्ती जाल में फंसाया और उनके अश्लील वीडियो बना लिए थे। ब्लैकमेल कर 29 लाख रुपये वसूल लिए। क्राइम ब्रांच ने तीन दिन पहले घटना का खुलासा करते हुए हरियाणा निवासी अशोक कुमार व मथुरा के भगवत को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरोह में दो दर्जन शातिर सक्रिय हैं। अभी तक की तफ्तीश के मुताबिक फेक आईडी पर खुलवाए गए खातों की संख्या डेढ़ सौ पहुंच चुकी है। इसके बारे में जांच एजेंसी को जानकारी हुई है। खातों की संख्या और बढ़ सकती है।
एक साल के भीतर इन खातों में करीब दो करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन मिला है। सभी खातों को खंगालना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। बता दें कि आरोपी जब ठगी करते थे, तो रकम को कई अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करते थे। एटीएम से रकम निकाल लेते थे। इसलिए रिकवरी नहीं हुई।
गिरोह के सरगना की तलाश में हरियाणा जाएगी पुलिस
गिरोह में हरियाणा निवासी मुन्ना, एहसान व मुबारक नाम के तीन शातिर भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक यही तीनों गिरोह को ऑपरेट करते हैं। देश के करीब एक दर्जन राज्यों में इनका नेटवर्क फैला हुआ है। ये कई बार जेल गए लेकिन पैसों की रिकवरी नहीं हो सकी।
उसका कारण है कि ठगी की रकम आते ही वह तमाम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। यह पता करना पुलिस के लिए चुनौती बन जाता है कि रकम किन किन खातों में भेजी गई। गिरोह पर पुलिस गैंगस्टर की कार्रवाई करेगी।
दो साल में सौ से अधिक ठगी
पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह करीब दो वर्षों से साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। किसी को ब्लैकमेल करके, तो किसी के खाते का विवरण व ओटीपी हासिल कर रकम पार करते थे। इस तरह से करोड़ों रुपये पार किए। चूंकि आरोपी फेक आईडी के सिमों का इस्तेमाल करते थे। इसलिए इनको ट्रेस करना पुलिस के लिए मुश्किल होता था।
रकम आते ही अलग-अलग खातों में करते थे ट्रांसफर
आरोपी जब ठगी करते थे तो रकम को कई अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करते थे। एटीएम से रकम निकाल लेते थे। इसलिए रिकवरी नहीं हुई। जो खाते इस्तेमाल करते थे, वे फेक आईडी पर होते थे। किसी मजदूर, रिक्शा चालक आदि के खाते किराये पर भी लेते थे।