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कानपुर: चिड़ियाघर में हीमोप्रोटोजोआ का संक्रमण, चार काले हिरणों की मौत, चलते-फिरते गिरे और चली गई जान

Tue, 06 Oct 2026 10:59 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Shikha Pandey Updated Tue, 06 Oct 2026 10:59 PM IST
सार

कानपुर चिड़ियाघर में चार काले हिरणों की मौत हो गई। भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान की तीन सदस्यीय टीम ने जांच की।

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Kanpur: Hemoprotozoa infection at the zoo; four blackbucks die
चिड़ियाघर में काले हिरणों की मौत का मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चिड़ियाघर में 15 दिन में चार काले हिरणों की मौत हो गई। मंगलवार को भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आरवीआरआई), इज्जतनगर-बरेली के वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम चिड़ियाघर पहुंची। बाड़े का निरीक्षण करने के साथ ही एक काले हिरण का पोस्टमार्टम भी किया। उन्होंने मौत का कारण हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण (खून में होने वाले संक्रमण) बताया है। टीम विसरा जांच के लिए अपने साथ बरेली ले गई।
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चिड़ियाघर में पिछले सप्ताह तीन काले हिरणों की मौत हुई थी। डॉक्टरों ने मौत का संभावित कारण टॉक्सीनिया बताया था। एक हिरण का विसरा जांच के लिए बरेली की लैब भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। इसी बीच एक और नर हिरण की दो दिन पहले मौत हो गई। हिरणों की चलते-फिरते मौत हो जा रही है। जू के डॉ. नासिर और कटियार इनका इलाज कर रहे थे।
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Kanpur: Hemoprotozoa infection at the zoo; four blackbucks die
वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम चिड़ियाघर पहुंची - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भी मौत न थमने पर चिड़ियाघर प्रशासन ने आरवीआरआई के वैज्ञानिकों को बुलाया। मंगलवार को सुबह 11 बजे वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एम. करीकलन, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार और तकनीशियन आदर्श कुमार चिड़ियाघर पहुंचे।
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Kanpur: Hemoprotozoa infection at the zoo; four blackbucks die
वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम चिड़ियाघर पहुंची - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने सबसे पहले हिरण के बाड़े का निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने प्रारंभिक जांच में संक्रमण को हीमोप्रोटोजोआ से संबंधित बताया है। संक्रमण की रोकथाम के लिए टीम ने चिड़ियाघर के पशु चिकित्सकों को उपचार और दवा संबंधी परामर्श दिया। साथ ही हिरणों के नमूने भी जांच के लिए गए हैं। वहीं, चिड़ियाघर प्रशासन बाड़े में चूना और दवाओं का छिड़काव कर रहा है। अब आरवीआरआई की जांच रिपोर्ट से साफ होगा कि हिरणों में संक्रमण की वास्तविक वजह क्या है?
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एक ही बाड़े में 87 से अधिक हिरण
एक ही बाड़े में काले हिरणों की संख्या 87 से अधिक है। जगह की कमी के चलते सभी हिरणों को एक ही बाड़े में रखा गया है। भारी बारिश के बाद चिड़ियाघर में काले हिरणों की मौत लगातार जारी है। पहले वे सुस्त पड़ रहे फिर भोजन कम करते हैं और तीन से चार दिन बाद ही अचानक चलते-फिरते जमीन पर गिर जाते हैं। इसके बाद मौत हो जाती है। बाड़े में हिरणों की संख्या ज्यादा होने से संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया है। अगस्त महीने में मल की जांच में हिरणों में परजीवी यानी पेट के कीड़े भी मिले थे। डी-वॉर्मिंग की दवाओं का अपेक्षित असर नहीं होने के बाद अलग घोल तैयार कर उपचार किया गया था जिसके बाद कुछ सुधार दिखाई दिया था।

आरवीआरआई के विशेषज्ञों ने बाड़े में जाकर जांच की जिसमें उन्होंने हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण होना बताया है। उन्होंने उपचार और दवा संबंधी परामर्श दिया है। जल्द ही जांच रिपोर्ट में कारण भी स्पष्ट पता चल जाएगा। - डॉ. कन्हैया पटेल, निदेशक चिड़ियाघर

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