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Kanpur: गर्मी से धड़कनें बेअंदाज, दिल में आ रहा भूचाल, एक मिनट में 170 से 180 बार धड़क रहा दिल
Tue, 30 Apr 2024 02:24 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 30 Apr 2024 02:24 PM IST
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कानपुर में भीषण गर्मी
- फोटो : अमर उजाला
गर्मी के मौसम में लोगों की धड़कनें बढ़ रही हैं। घबराए रोगी कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट की इमरजेंसी पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान के उछाल मारने के बाद गर्मी से धड़कन बढ़ने वाले रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। इलाज के बाद रोगियों की स्थिति सामान्य हो जाती है। उनका कहना है कि अधिक गर्मी पड़ने पर हृदय के अंदर विद्युत प्रवाह में शॉर्ट सर्किट की स्थिति पैदा हो जाती है, जिससे रोगी को लगता कि दिल में उथल-पुथल मच गई। धड़कनें अनियमित हो जाती हैं।
सामान्य रूप से दिल की धड़कन एक मिनट में 60 से सौ के बीच होनी चाहिए। लेकिन कार्डियोलॉजी में इस वक्त जो रोगी आ रहे हैं, उनकी धड़कनें 170-180 के बीच हैं। इससे हृदय को पंपिंग में दिक्कत होती है। इसी वजह से रोगी चक्कर और गश आने के लक्षण लेकर आ रहे हैं। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि हार्ट के ढंग से पंपिंग न कर पाने की वजह से शरीर की ब्लड सप्लाई में दिक्कत आ सकती है।
इससे आक्सीजन की कमी के साथ खून का थक्का जमने खतरा रहता है। इससे ब्रेन स्ट्रोक भी पड़ सकता है। डॉ. शर्मा का कहना है कि वैसे तो यह दिक्कत 50 वर्ष अधिक आयु के लोगों को होती है लेकिन इस वक्त युवा भी यह समस्या लेकर आ रहे हैं। इसके अलावा महिलाओं की भी संख्या अच्छी-खासी है।
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सामान्य रूप से दिल की धड़कन एक मिनट में 60 से सौ के बीच होनी चाहिए। लेकिन कार्डियोलॉजी में इस वक्त जो रोगी आ रहे हैं, उनकी धड़कनें 170-180 के बीच हैं। इससे हृदय को पंपिंग में दिक्कत होती है। इसी वजह से रोगी चक्कर और गश आने के लक्षण लेकर आ रहे हैं। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि हार्ट के ढंग से पंपिंग न कर पाने की वजह से शरीर की ब्लड सप्लाई में दिक्कत आ सकती है।
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इससे आक्सीजन की कमी के साथ खून का थक्का जमने खतरा रहता है। इससे ब्रेन स्ट्रोक भी पड़ सकता है। डॉ. शर्मा का कहना है कि वैसे तो यह दिक्कत 50 वर्ष अधिक आयु के लोगों को होती है लेकिन इस वक्त युवा भी यह समस्या लेकर आ रहे हैं। इसके अलावा महिलाओं की भी संख्या अच्छी-खासी है।
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ऐसी होती है दिक्कत
हृदय के ऊपरी चैंबर से तरंगें निकलकर निचले चैंबर में आती हैं। हृदय के एट्रिया और वेंट्रियल के बीच में विद्युत प्रवाह का रास्ता होता है। इसे कंडक्शन पाथ कहते हैं। यही विद्युत तरंगें धड़कन पैदा करती हैं। कंडक्शन पाथ पहुंचने पर तरंगों में अनियमितता आने लगती है। इसे शॉर्ट सर्किट कहते हैं और धड़कनें अचानक बढ़ जाती हैं।
हृदय के ऊपरी चैंबर से तरंगें निकलकर निचले चैंबर में आती हैं। हृदय के एट्रिया और वेंट्रियल के बीच में विद्युत प्रवाह का रास्ता होता है। इसे कंडक्शन पाथ कहते हैं। यही विद्युत तरंगें धड़कन पैदा करती हैं। कंडक्शन पाथ पहुंचने पर तरंगों में अनियमितता आने लगती है। इसे शॉर्ट सर्किट कहते हैं और धड़कनें अचानक बढ़ जाती हैं।
ऐसे करें बचाव
- खूब पानी पीयें
- बेवजह धूप में न निकलें
- नारियल पानी, जूस आदि पीते रहें।
- ब्लड प्रेशर के रोगी नहीं हैं तो नमक का सेवन थोड़ा बढ़ा दें।
- बाहर हैं तो बीच-बीच में पानी जरूर पीते रहें।
- खूब पानी पीयें
- बेवजह धूप में न निकलें
- नारियल पानी, जूस आदि पीते रहें।
- ब्लड प्रेशर के रोगी नहीं हैं तो नमक का सेवन थोड़ा बढ़ा दें।
- बाहर हैं तो बीच-बीच में पानी जरूर पीते रहें।