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Dialysis Crisis: ‘जिंदगी की सांसें, मशीन पर अटकीं’, हैलट में आधी मशीनें खराब, तो उर्सला में सात माह की वेटिंग

Sun, 31 May 2026 10:25 AM IST
Himanshu Awasthi मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Sun, 31 May 2026 10:25 AM IST
सार

Kanpur Health Update: हैलट और उर्सला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा बदहाल है। हैलट में आधा सिस्टम खराब पड़ा है, तो वहीं उर्सला में मरीजों को डायलिसिस के लिए सात महीने तक की लंबी वेटिंग लिस्ट का सामना करना पड़ रहा है। एचआईवी और हेपेटाइटिस-बी जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए तो यहां कोई विकल्प ही नहीं है।

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Kanpur Health Update Half the Dialysis Machines Down at Hallett While Ursula Faces a Seven Month Waiting List
हैलट स्थित डायलिसिस यूनिट कक्ष, उर्सला इमरजेंसी की डायलिसिस यूनिट - फोटो : amar ujala

विस्तार

केस- एक

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मिर्जापुर, कल्याणपुर निवासी 28 वर्षीय मनीषा तिवारी की दोनों किडनी पिछले साल नवंबर में खराब हो गईं। लिवर भी 80 प्रतिशत डैमेज है। डॉक्टर ने हर हफ्ते दो बार डायलिसिस कराने के लिए कहा तो उनके पति रवि तिवारी ने उर्सला की डायलिसिस यूनिट में आवेदन किया, पर करीब सात महीने में भी नंबर नहीं आया। एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले उनके पति रवि ने बताया कि मजबूरन एक नर्सिंगहोम में डायलिसिस करानी पड़ रही है। एक डायलिसिस में 2500 रुपये खर्च होते हैं। सामान अलग से खरीदना पड़ता है।

केस- दो
शांतिनगर, कैंट निवासी रुचि को पिछले महीने डॉक्टरों ने डायलिसिस कराने के लिए कहा। प्राइवेट जॉब करने वाले पति नारायण दास ने बताया कि उन्होंने उर्सला की डायलिसिस यूनिट और छावनी अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में नाम लिखाया, पर दोनों जगह नाम वेटिंग लिस्ट में ही है। मजबूरन एक नर्सिंगहोम में 2400 रुपये शुल्क जमा कर डायलिसिस कराई। इसके लिए हर हफ्ते पांच हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।

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Kanpur Health Update Half the Dialysis Machines Down at Hallett While Ursula Faces a Seven Month Waiting List
उर्सला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में की जा रही डायलिसिस - फोटो : amar ujala

केस- तीन
फतेहपुर जिले में जहानाबाद के पास स्थित ग्राम कापिल निवासी 36 वर्षीय अमित कुमार सिक्योरिटी गार्ड थे। पिछले साल अक्तूबर में किडनी खराब होने से नौकरी छूट गई। आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से उर्सला की डायलिसिस यूनिट में नि:शुल्क डायलिसिस के लिए आवेदन किया। वहां वेटिंग लिस्ट में नाम लिख लिया है। डॉक्टरों से गुहार भी लगाई, पर नंबर नहीं आया। यहां उम्मीद टूटती देख मजबूरन बार- बार बांदा जाकर डायलिसिस कराना पड़ रहा है।

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केस- चार
मसवानपुर निवासी 65 वर्षीय बीबीजान के दोनों गुर्दे डेढ़ महीने पहले खराब हो गए। डॉक्टरों ने हर हफ्ते दो बार डायलिसिस कराने के लिए लिखा। पति अब्दुल रसीद ने बताया कि उर्सला की डायलिसिस यूनिट में उनकी पत्नी का नाम वेटिंग लिस्ट में लिखा गया, लेकिन नंबर नहीं आ पाया। इस बीच पत्नी की हालत बिगड़ गई तो उन्हें हैलट इमरजेंसी में भर्ती कराया। वहां से उन्हें वार्ड नंबर-15 बी में शिफ्ट किया गया। शनिवार को पत्नी की डायलिसिस हो पाई।

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हैलट स्थित डायलिसिस यूनिट कक्ष - फोटो : amar ujala

कानपुर के हैलट और उर्सला में किडनी मरीजों को डायलिसिस के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मरीजों की संख्या के हिसाब से इन अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधाएं नाकाफी हैं। मशीनों की खराबी और लंबी प्रतीक्षा सूची मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। अमर उजाला की पड़ताल में यह हकीकत सामने आई है। हैलट डायलिसिस इकाई की छह में से तीन मशीनें खराब मिलीं। मंडलीय जिला चिकित्सालय उर्सला में डायलिसिस के लिए सात महीने तक की प्रतीक्षा चल रही है।

सामान्य किडनी मरीजों के लिए हैं 19 बेड
इन अस्पतालों में हेपेटाइटिस-बी और एचआईवी पीड़ित किडनी मरीजों के लिए डायलिसिस की सुविधा नहीं है। सरकारी अस्पतालों में कुल 21 बेड उपलब्ध हैं। इनमें से 19 बेड सामान्य किडनी मरीजों के लिए हैं। शेष दो बेड हेपेटाइटिस-सी के मरीजों की डायलिसिस के लिए हैं। सरकारी अस्पतालों में सीमित बेड के कारण मरीज निजी अस्पतालों में महंगी डायलिसिस कराने को मजबूर हैं।

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हैलट हॉस्पिट कानपुर - फोटो : amar ujala

अधिकतम छह मरीजों की ही डायलिसिस हो पाती है
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की डायलिसिस इकाई 21 नवंबर 1981 को शुरू हुई थी। इसमें मात्र छह बेड हैं। शनिवार को जायजा लेने पर तीन मशीनें खराब पाई गईं। शेष तीन मशीनों पर दो पालियों में अधिकतम छह मरीजों की ही डायलिसिस हो पाती है। यहां हैलट के मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है। तीमारदारों को 450 रुपये उपयोगकर्ता शुल्क जमा कराना पड़ता है और सामान भी लाना पड़ता है।

काफी लंबी है प्रतीक्षा सूची
मंडलीय जिला चिकित्सालय उर्सला में दो डायलिसिस इकाइयां हैं। अस्पताल द्वारा संचालित गहन चिकित्सा इकाई में स्थापित यूनिट में तीन बेड हैं, जहां 400 रुपये शुल्क लिया जाता है। इसी अस्पताल में हेरिटेज हॉस्पिटल लिमिटेड सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल पर 12 बेड की डायलिसिस इकाई संचालित करता है। चिकित्सक राकेश कुमार ने बताया कि यहां सुबह से रात तक चार-चार घंटे की तीन पालियों में 36 मरीजों को डायलिसिस के लिए बुलाया जाता है।

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उर्सला अस्पताल - फोटो : amar ujala

डायलिसिस यूनिट की तीनों खराब मशीनें ठीक कराई जा रही हैं। शनिवार को दो मशीनें ठीक करने का कार्य शुरू हुआ है।  -डॉ. विनय कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, हैलट

डायलिसिस यूनिट में वेटिंग रहती है। बेडों की संख्या बढ़ाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है।  -डॉ. बीसी पाल, निदेशक, उर्सला

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