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बात सेहत की: नसों के अंदर बने गुब्बारे फटने से ब्रेन हेमरेज, बीपी-डायबिटीज के मरीजों को खतरा, GSVM का अध्ययन

Thu, 06 Nov 2025 10:18 AM IST
हिमांशु अवस्थी रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 06 Nov 2025 10:18 AM IST
सार

Kanpur News: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंसेस विभाग के 1000 ब्रेन हेमरेज रोगियों के अध्ययन में सामने आया है कि बीपी और डायबिटीज के कारण मस्तिष्क की नसों में माइक्रो एन्यूरिज्म (गुब्बारे) बन जाते हैं। इससे 150-180 बीपी पर भी ब्रेन हेमरेज हो सकता है और ठंड बढ़ने के बाद हैलट में ऐसे मामलों की संख्या दोगुनी हो गई है।

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Kanpur GSVM study Bursting of balloons inside veins can cause brain hemorrhage risk to BP diabetes patients
ब्रेन हेमरेज - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के रोगियों के मस्तिष्क की नसों के अंदर छोटे-छोटे गुब्बारे बन जाते हैं। बीपी अधिक होते ही ये फटते हैं और ब्रेन हेमरेज हो जाता है। सामान्य व्यक्ति का सिस्टोलिक बीपी सामान्य 120 होना चाहिए, लेकिन सामान्य व्यक्ति 250 से 300 तक बर्दाश्त कर सकता है। जिनकी नसों में गुब्बारे हैं, उन्हें 150 से 180 बीपी पर ब्रेन हेमरेज हो जाता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंसेस विभाग के 1000 रोगियों के अध्ययन में यह निचोड़ निकला है।

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हैलट इमरजेंसी में ब्रेन हेमरेज के औसत तीन रोगी आते हैं। रात में ठंड बढ़ने पर इनका औसत छह हो गया है। न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि ब्रेन हेमरेज के मामलों के अध्ययन में मस्तिष्क के तीन हिस्सों में ब्लीडिंग पाई गई। 99 फीसदी रोगियों के इन तीन हिस्सों में भी ब्लीडिंग हुई थी। नसों में गुब्बारे बनने को माइक्रो एन्यूरिज्म कहते हैं। उन्होंने बताया कि नस फटने से सबसे अधिक ब्लीडिंग मस्तिष्क के बेसल गैंगलिया हिस्से में हुई।

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ब्रेन हेमरेज के 1000 केस की हिस्ट्री देखी
दूसरे नंबर पर पोंस क्षेत्र में माइक्रो एन्यूरिज्म पाया गया। इसके बाद मस्तिष्क के पीछे के तरफ के हिस्से में फेरीपेलम में ब्लीडिंग मिली है। उन्होंने बताया कि बीपी और डायबिटीज के रोगियों की रक्तवाहिनियों की अंदर की दीवार कमजोर हो जाती है। इसमें हल्के गुब्बारे बनते हैं। ये गुब्बारे अधिक प्रेशर होने पर फट जाते हैं। उन्होंने बताया कि एक साल के अंदर ब्रेन हेमरेज के 1000 केस की हिस्ट्री देखी गई।

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बहुत से रोगी बिस्तर पर ही रहते हैं
ब्रेन हेमरेज के पांच फीसदी मामलों में सर्जरी करनी पड़ती है। मस्तिष्क के ऑपरेशन से रोगियों की जान बच तो जाती है लेकिन उन्हें जीवन भर दिव्यांगता का सामना करना पड़ता है। बहुत से रोगी बिस्तर पर ही रहते हैं। जिनकी नस कम फटी होती है, उनका दवाओं से इलाज किया जाता है।

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बीच में दवाएं न छोड़ें रोगी
डॉ. मनीष सिंह का कहना है कि ब्रेन हेमरेज से बचना आसान है। इसमें सिर्फ बीपी नियंत्रित रखना है। अगर रोगी लापरवाही में बीच में दवाएं न छोड़ें और गर्मी, जाड़े में खुराक दुरुस्त कराते रहें तो इस मुसीबत से बच सकते हैं। बीपी नियंत्रण से हृदय, आंख और शरीर के दूसरे अंग सुरक्षित रहते हैं।

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