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Kanpur: पहली बार तीन महीने के बच्चे के दिल का छेद किया गया बंद, बगैर चीरा लगाए किया गया उपचार

Sat, 13 Jul 2024 11:19 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 13 Jul 2024 11:19 PM IST
सार

कानपुर के कॉर्डियोलॉजी में आए सबसे छोटे मरीज के दिल के छेद का बगैर चीरा लगाए उपचार किया गया। जांघ की नस से हृदय तक कैथेटर पहुंचाया गया। चार एमएम के छेद में छह एमएम की डिवाइस फिट की गई।

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Kanpur: For the first time, hole in the heart of three-month-old child was closed
बाल रोगी रज्जन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में पहली बार एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में सबसे कम उम्र तीन माह के बच्चे के दिल के छेद को उपकरण लगाकर बंद किया गया है। अमूमन दिल का छेद बंद करने का यह इलाज छह महीने की उम्र के बाद किया जाता है। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि इतने छोटे बच्चे का इलाज चुनौतीपूर्ण होता है। दिल के छेद की दिक्कत में पांच साल के पहले इलाज होना भी जरूरी होता है।

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बच्चा बालरोग विभाग से रेफर होकर आया था। राष्ट्रीय बाल सुरक्षा योजना के तहत इलाज निशुल्क हुआ है। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि मिंदौली, फतेहपुर के रहने वाले राजू के बेटे रज्जन (तीन माह) को बार-बार निमोनिया होने की शिकायत थी। यह निमोनिया दवा से ठीक नहीं होता। इसके साथ ही मां का दूध पीने में बच्चे को पसीना आता है। यह लक्षण दिल पर जोर पड़ने का होता है। बच्चे को बालरोग से तीन दिन पहले रेफर किया गया। इको जांच कराई तो दिल का छेद पता चला। छेद बंद करने के लिए स्टेनलैस स्टील की डक्ट ऑक्युडर डिवाइस इस्तेमाल की जाती है।

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उन्होंने बताया कि बाल एनेस्थीसिया विशेषज्ञ ने बच्चे को हल्की बेहोशी का इंजेक्शन दिया, जिससे वह हाथ-पैर न चला सके। इसके बाद जांघ की नस से एक विशेष प्रकार के कैथेटर को हृदय तक पहुंचाया गया। फिर दिल के छेद में डिवाइस को फिट कर दिया गया। बच्चे के चार मिमी का छेद था। इसमें छह मिमी की डिवाइस फिट की गई। यह छेद महाधमनी और बाईं पल्मोनरी आर्टरी के बीच में था। महाधमनी शुद्ध रक्त शरीर को सप्लाई करती है और पल्मोनर आर्टरी अशुद्ध रक्त फेफड़ों को सफाई के लिए भेजती है। उपकरण लगाने में एक घंटा लगा। 24 घंटे निगरानी में रखने के बाद बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया गया।
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इस विधि से इलाज का पहला मामला
हर महीने पांच-छह बच्चों के दिल के छेद का इलाज राष्ट्रीय बाल सुरक्षा योजना के तहत होता है। इतने छोटे बच्चे का इस विधि से इलाज करने का यह पहला केस है। अगर रोगी के लक्षण पहचान कर उसे जितनी जल्दी लाएं, बेहतर होता है।- प्रोफेसर राकेश कुमार वर्मा, निदेशक कार्डियोलॉजी
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