कानपुर अग्निकांड: राख में ढूंढते रहे अवशेष...22 बकरियों के जलने का था दावा, 19 जिंदा मिलीं, यहां पर थीं बंधी
मड़ौली गांव में पीड़ित परिवार ने दर्ज एफआईआर में बकरियों का जिक्र किया था। उसमें 22 बकरियों का जलने का दावा था, लेकिन 19 जिंदा मिलीं हैं। बता दें कि एसआईटी को गांव निवासी एक व्यक्ति के घर में ही बकरियां बंधी मिलीं।
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कानपुर देहात के मड़ौली ग्राम पंचायत के चालहा गांव में 13 फरवरी को कब्जा हटाने के दौरान झोपड़ी में आग लगने से जलकर मां-बेटी की मौत हो गई थी। पीड़ित परिवार ने घटना में 22 बकरियों के भी जलकर मरने की बात एफआईआर में दर्ज कराई थी।
वहीं, मामले की विवेचना कर रही एसआईटी ने गुरुवार को गांव के ही एक व्यक्ति के घर से पीड़ित परिवार की 19 बकरियां बरामद कर लीं। एक बकरी की बीमारी के चलते मौत की बात सामने आई है। एसआईटी ने बकरियां पीड़ित परिवार को सौंप दी है।
अब एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर बकरियां वहां कैसे पहुंचीं। वहीं, एसआईटी ने पीड़ित परिवार के अंश, गांव के प्रधान समेत आठ लोगों के गुरुवार को बयान दर्ज किए। अब तक 26 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
12 नामजद समेत 39 लोगों पर दर्ज हुई थी रिपोर्ट
मड़ौली गांव में 13 फरवरी को सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के दौरान झोपड़ी में आग लगने से प्रमिला दीक्षित और उनकी बेटी नेहा की जलकर मौत हो गई थी। मामले में एसडीएम रहे ज्ञानेश्वर प्रसाद, रूरा थानाध्यक्ष दिनेश गौतम, लेखपाल अशोक कुमार समेत 12 नामजद समेत 39 लोगों पर हत्या समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
22 बकरियों के जलकर मरने का था दावा
लेखपाल व बुलडोजर चालक दीपक कुमार इस समय माती जेल में बंद है। मामले की जांच हरदोई एसपी राजेश द्विवेदी की अगुवाई में गठित एसआईटी के विवेचक सीओ विकास जायसवाल की टीम कर रही है। घटना के बाद प्रमिला के बेटे शिवम दीक्षित ने झोपड़ी में 22 बकरियों के जलकर मरने की बात कही थी।
जांच के दौरान नहीं मिले थे अवशेष
इसका जिक्र एफआईआर में भी किया था। घटना के समय के वीडियो व फोटो देखने से इसकी पुष्टि नहीं हो रही थी। फोरेंसिक टीम को जांच के दौरान मौके से बकरियों के अवशेष भी नहीं मिले थे। इसके चलते पुलिस और एसआईटी को बकरियों के गायब होने का शक था।
19 बकरियां जिंदा मिलीं
मामले की विवेचना में जुटी एसआईटी को गुरुवार को पता लगा कि गांव के नन्हें के घर में कुछ दिन पहले तक 35 बकरियां थी। अब उसके पास 55 बकरियां हो गई हैं। इसी आधार पर एसआईटी के अधिकारी उसके घर पहुंचे, तो वहां 19 बकरियां ज्यादा बंधी मिलीं।
एसआईटी ने घटनास्थल का लिया जायजा
जांच में यह बकरियां शिवम की होने की बात सामने आई। नन्हें टीम को यह नहीं बता सका कि आखिर यह बकरियां उसके घर कैसे पहुंचीं। अब एसआईटी इस बिंदु पर जांच कर रही है। इधर, एसआईटी ने गुरुवार को फिर से चालहा गांव में घटनास्थल का जायजा लिया।
प्रमिला के पति के नहीं दर्ज हुए हैं बयान
मड़ौली गांव पहुंचकर प्रमिला के छोटे बेटे अंश, गांव के प्रधान मान सिंह समेत आठ लोगों के बयान दर्ज किए। सूत्रों का कहना है कि अंश के परिवार के लगभग सभी लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, लेकिन प्रमिला के पति कृष्ण गोपाल के झुलसे होने के चलते उनके बयान नहीं दर्ज हो सके हैं।
पुलिसकर्मियों की मेडिकल रिपोर्ट ली
घटना के दौरान मौके मौजूद रहे पुलिसकर्मियों का मेडिकल कराया गया था। इसमें निलंबित तत्कालीन थानाध्यक्ष रूरा दिनेश गौतम, महिला दरोगा उमा यादव, दो हेड कांस्टेबलों व पांच सिपाहियों व एक महिला सिपाही शामिल थे। एसआईटी ने इन पुलिसकर्मियों की मेडिकल रिपोर्ट भी कब्जे में ले ली है।
कल होगी मां-बेटी की तेरहवीं
मां बेटी की मौत के बाद शनिवार को उनका तेरहवीं संस्कार होगा। शिवम ने मां व बहन का अंतिम संस्कार किया था। शिवम ने बताया कि बुधवार को नौबार हुआ था। 25 फरवरी को मृतकों की आत्म शांति के लिए शांति पाठ व तेरहवीं भोज होगा।
अपने बयानों से मुकरे प्रधान
मामले की विवेचना कर रही एसपी के नेतृत्व वाली एसआईटी के सामने मड़ौली गांव के प्रधान मंडलायुक्त वाली दूसरी एसआईटी को दिए बयानों से मुकर गए। गुरुवार को विवेचना कर रही एसआईटी के अधिकारियों ने प्रधान मान सिंह के बयान दर्ज किए। इस दौरान प्रधान ने कहा कि कागज पर किए गए हस्ताक्षर तो उनके हैं, लेकिन दर्ज बयानों में अंतर है।