Kanpur: सरसौल ब्लॉक में खाद का संकट, सहकारी समितियों में स्टॉक नहीं, किसान निजी दुकानों से खरीदने को मजबूर
Kanpur News: सरसौल में बुवाई के समय किसान खाद की किल्लत से जूझ रहे हैं। सरकारी समितियां खाली पड़ी हैं, जिससे किसानों को निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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कानपुर में सरसौल ब्लॉक के किसानों पर बुवाई के इस अहम समय में खाद का गंभीर संकट आ पड़ा है। एक ओर खेतों की बुवाई चरम पर है। वहीं दूसरी ओर समितियां खाद से खाली पड़ी हैं, जिससे किसान सुबह से शाम तक भटकने के बाद भी खाली हाथ लौट रहे हैं। सरकारी खाद न मिलने से परेशान होकर किसान मजबूरन निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदने को विवश हैं।
फुफवार सुईथोक के किसान महेश कुशवाहा ने बताया कि सरकारी दरों पर यूरिया खाद की कीमत 265 रुपये है, लेकिन दुकानदार इसके लिए 320 रुपये वसूल रहे हैं। इसी तरह, डीएपी की सरकारी दर 1360 रुपये है, जबकि किसानों को यह 1600 से 1700 रुपये तक में बेची जा रही है। यह स्थिति किसानों की मेहनत की फसल उगने से पहले ही उनकी जेब पर भारी बोझ डाल रही है।
महीनों से समिति के लगा रहे हैं चक्कर
किसानों का आरोप है कि समितियां अब सिर्फ नाम की रह गई हैं और असल में खाद का कालाबाजारी चल रहा है। फुफवार गांव के गोविंद ने बताया कि उन्हें टौंस में घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाद नहीं मिली, जिसके बाद उन्हें मजबूरी में निजी दुकान से खाद खरीदकर बुवाई करनी पड़ी। बांबी गांव के रामकुमार ने भी बताया कि वे धान की फसल के लिए डीएपी की तलाश में महीनों से समिति के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक खाद नहीं मिली है।