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Kanpur: आईपीएल सट्टा और ऑनलाइन गेम खिलाने में आठ गिरफ्तार, 14 की तलाश जारी
Mon, 13 Apr 2026 10:10 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Mon, 13 Apr 2026 10:10 PM IST
सार
Kanpur News: चर्चित बेटिंग एप के क्लोन तैयार कर लोगों को सट्टा खिला रहे थे। जीतने वालों में साइबर ठगी की रकम खपा रहे थे।
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पकड़े गए सट्टेबाज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बर्रा पुलिस ने दुबई से संचालित बेटिंग एप से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार कर सोमवार को जेल भेजा। यह सभी आईपीएल सट्टे और ऑनलाइन गेम में जीतने वालों को साइबर ठगी की रकम से भुगतान करने और दांव लगवाने का काम करते थे। पकड़े गए आरोपियों में गुजैनी का सत्यम तिवारी, बर्रा पांच का अनमोल विश्वकर्मा, डब्ल्यू-1 साकेतनगर का नितिन गुप्ता, धर्मेंद्रनगर का अभिषेक वर्मा, नेहरूनगर निवासी हितेश निगम, बनिया बाजार कैंट निवासी स्नेहिल बजाज, आवास विकास हंसपुरम का सुल्तान अहमद और नौशाद शामिल हैं। सभी को बर्रा पीले पुल के पास से पकड़ा गया।
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि आरोपी प्रतिबंधित गेमिंग एप लोटस 365, रेडी बुक, कार्तिकेय और दुबई ईएक्सएच पर सट्टा खिला रहे थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उनके वॉट्सएप ग्रुप पर बैंक खाते के नंबर और भेजी जाने वाली धनराशि की डिटेल आती थी। इसके बाद जीतने वाले व्यक्ति के बताए गए खाते में उतनी रकम जमा कर देते थे। इसके बदले उन्हें हर माह 25 से 50 हजार रुपये की सैलरी मिलती थी। खास बात ये है कि पकड़े गए शातिर सट्टा जीतने वालों को साइबर ठगी की रकम भेजकर खपा रहे थे।
आरोपियों ने कबूला है कि वह चर्चित बेटिंग एप के क्लोन तैयार कर लोगों को सट्टा खिला रहे थे। जो लोग भी एप पर सट्टा खेलने आते हैं उन्हें पहले छोटी-छोटी रकम तो जिता दी जाती लेकिन बड़ी रकम लगाने पर उसे हरा दिया जाता है। लोगों को सट्टे और ऑनलाइन गेमिंग की लत लगाने के लिए लग्जरी लाइफ वाले वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाते थे। इनमें लोगों को आसानी से जीतता हुआ दिखाया जाता था।
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डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि आरोपी प्रतिबंधित गेमिंग एप लोटस 365, रेडी बुक, कार्तिकेय और दुबई ईएक्सएच पर सट्टा खिला रहे थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उनके वॉट्सएप ग्रुप पर बैंक खाते के नंबर और भेजी जाने वाली धनराशि की डिटेल आती थी। इसके बाद जीतने वाले व्यक्ति के बताए गए खाते में उतनी रकम जमा कर देते थे। इसके बदले उन्हें हर माह 25 से 50 हजार रुपये की सैलरी मिलती थी। खास बात ये है कि पकड़े गए शातिर सट्टा जीतने वालों को साइबर ठगी की रकम भेजकर खपा रहे थे।
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आरोपियों ने कबूला है कि वह चर्चित बेटिंग एप के क्लोन तैयार कर लोगों को सट्टा खिला रहे थे। जो लोग भी एप पर सट्टा खेलने आते हैं उन्हें पहले छोटी-छोटी रकम तो जिता दी जाती लेकिन बड़ी रकम लगाने पर उसे हरा दिया जाता है। लोगों को सट्टे और ऑनलाइन गेमिंग की लत लगाने के लिए लग्जरी लाइफ वाले वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाते थे। इनमें लोगों को आसानी से जीतता हुआ दिखाया जाता था।
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पकड़े गए शातिरों के अकाउंट में तीन महीने के भीतर एक अरब से ज्यादा का ट्रांजेक्शन मिला है। पुलिस इन सभी से पूछताछ करके पूरे नेटवर्क का खुलासा करने का प्रयास कर रही है। आरोपी चर्चित बेटिंग एप के क्लोन तैयार कर सट्टा खिलवा रहे थे। आरोपियों के गैंग का नाम ब्रांच 24 है। पुलिस इनकी अन्य ब्रांच की भी तलाश कर रही है। - रघुवीर लाल, पुलिस कमिश्नर