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Kanpur: डॉक्टरों ने पर्चा काउंटर पर लगाया ताला, 55 रोगी बिना दिखाए लौटे, डॉक्टरों ने हैलट परिसर में किया मार्च
Wed, 21 Aug 2024 10:45 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 21 Aug 2024 10:45 PM IST
सार
कोलकाता की घटना से आक्रोशित हड़ताली जूनियर डॉक्टरों ने पर्चा काउंटर पर ताला लगा दिया। जिससे 55 रोगी बिना दिखाए ही लौट गए। हैलट प्रबंधन ने स्थिति को देखते हुए इमरजेंसी में ओपीडी चालू की।
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जूनियर डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोलकाता की घटना से आक्रोशित हड़ताली जूनियर डॉक्टरों ने हैलट के ओपीडी रोगी पर्चा काउंटर पर ताला लगा दिया। इससे रोगी पर्चे नहीं बन पाए। जूनियर डॉक्टर ओपीडी चैनल गेट पर बैठे रहे। इससे रोगी अंदर नहीं जाने पाए। बाहर से दिखाने आए 55 नए रोगी बिना दिखाए ही लौट गए। हैलट ओपीडी के अंदर सीनियर डॉक्टर अपने चैंबर में खाली बैठे रहे। इस स्थिति को देखते हुए हैलट प्रबंधन ने इमरजेंसी ओपीडी चालू करा दी है।
बुधवार को जूनियर डॉक्टरों ने सुबह से ही इमरजेंसी के बगल रोगी पर्चा काउंटर भवन के चैनल गेट पर ताला जड़ दिया। यहां नारे लिखा पोस्टर लगाकर बाहर बैठ गए। जूनियर डॉक्टरों का एक समूह भी ओप़ीडी गेट पर आकर बैठ गया। ओपीडी के चैनल गेट को बंद कर दिया। इस पर ताला लगा था। हैलट में मुख्य रोगी पर्चा काउंटर के अलावा ओपीडी के अंदर भी वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए रोगी पर्चा काउंटर है। ये दोनों काउंटर बंद रहे।
हैलट की मुख्य ओपीडी के बंद रहने के कारण मेडिसिन, सर्जरी, अस्थि रोग, बालरोग, नेत्र रोग, त्वचा रोग, दंत रोग, नाक, कान, गला रोग से संबंधित रोगी स्वास्थ्य परीक्षण नहीं करा पाए। ओपीडी में दिखाने के लिए जो गंभीर रोगी आए थे, वे इमरजेंसी चले गए। वहां पर डॉक्टरों ने उन्हें देखा। लेकिन ज्यादातर रोगियों को इमरजेंसी ओपीडी में चलने का पता ही नहीं था। हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि इमरजेंसी ओपीडी चालू करा दी है।
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बुधवार को जूनियर डॉक्टरों ने सुबह से ही इमरजेंसी के बगल रोगी पर्चा काउंटर भवन के चैनल गेट पर ताला जड़ दिया। यहां नारे लिखा पोस्टर लगाकर बाहर बैठ गए। जूनियर डॉक्टरों का एक समूह भी ओप़ीडी गेट पर आकर बैठ गया। ओपीडी के चैनल गेट को बंद कर दिया। इस पर ताला लगा था। हैलट में मुख्य रोगी पर्चा काउंटर के अलावा ओपीडी के अंदर भी वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए रोगी पर्चा काउंटर है। ये दोनों काउंटर बंद रहे।
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हैलट की मुख्य ओपीडी के बंद रहने के कारण मेडिसिन, सर्जरी, अस्थि रोग, बालरोग, नेत्र रोग, त्वचा रोग, दंत रोग, नाक, कान, गला रोग से संबंधित रोगी स्वास्थ्य परीक्षण नहीं करा पाए। ओपीडी में दिखाने के लिए जो गंभीर रोगी आए थे, वे इमरजेंसी चले गए। वहां पर डॉक्टरों ने उन्हें देखा। लेकिन ज्यादातर रोगियों को इमरजेंसी ओपीडी में चलने का पता ही नहीं था। हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि इमरजेंसी ओपीडी चालू करा दी है।
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बुधवार को इस इमरजेंसी ओपीडी में 169 रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। 67 रोगियों को इमरजेंसी में भर्ती किया गया। इसके साथ ही जेके कैंसर इंस्टीट्यूट, कार्डियोलॉजी और चेस्ट हॉस्पिटल में ओपीडी नहीं चली। रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. संजय वर्मा ने बताया कि ओपीडी नहीं चली। इमरजेंसी में 10 रोगी देखे गए और तीन रोगियों को भर्ती किया गया। कार्डियोलॉजी इमरजेंसी में सिर्फ हार्ट अटैक के रोगियों को देखा गया। जूनियर डॉक्टरों ने हैलट परिसर में मार्च किया। नाटक के मंचन के जरिये कोलकाता की घटना की भर्त्सना की।
हैलट और कैंसर इंस्टीट्यूट में नहीं मिला इलाज, रोगी की मौत
गोपालनगर, यशोदानगर के रहने वाले अशोक कुमार गुप्ता (70) को मंगलवार को हालत बिगड़ने पर हैलट लाया गया था। वह कैंसर संदिग्ध थे। उनके दामाद रतन ने बताया कि रोगी को डेढ़ महीने पहले निजी चिकित्सक को दिखाया गया था। रोगी के गाल ब्लैडर और लिवर के बीच गांठ थी। इस पर कैंसर होने का शक था। बाॅयोप्सी नहीं हुई थी। हैलट में डॉक्टरों ने कागज देखे और कहा कि कैंसर संदिग्ध हैं। जेके कैंसर इंस्टीट्यूट ले जाएं। वहां ले गए तो बताया गया कि डॉक्टरों की हड़ताल है, रोगी को पीलिया है, हैलट ले जाओ। बहुत देर भटकने के बाद घर ले गए। रास्ते में मौत हो गई।
गोपालनगर, यशोदानगर के रहने वाले अशोक कुमार गुप्ता (70) को मंगलवार को हालत बिगड़ने पर हैलट लाया गया था। वह कैंसर संदिग्ध थे। उनके दामाद रतन ने बताया कि रोगी को डेढ़ महीने पहले निजी चिकित्सक को दिखाया गया था। रोगी के गाल ब्लैडर और लिवर के बीच गांठ थी। इस पर कैंसर होने का शक था। बाॅयोप्सी नहीं हुई थी। हैलट में डॉक्टरों ने कागज देखे और कहा कि कैंसर संदिग्ध हैं। जेके कैंसर इंस्टीट्यूट ले जाएं। वहां ले गए तो बताया गया कि डॉक्टरों की हड़ताल है, रोगी को पीलिया है, हैलट ले जाओ। बहुत देर भटकने के बाद घर ले गए। रास्ते में मौत हो गई।