UP: जो राम को मानेगा…वह धर्म को जानेगा, कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने सनातन बोर्ड बनाने की मांग की, कही ये बात
Kanpur News: कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कानपुर में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में कहा कि मंदिर के पैसे में सरकार का अधिकार नहीं है। इसका उपयोग अस्पताल और गोशाला बनाने में हो। उन्होंने सनातन बोर्ड बनाने की मांग की, और आरोप लगाया कि कुछ लोग कुर्सी के लिए सनातन का विरोध कर रहे हैं।
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इंडस्ट्रियल एरिया चार खंभाकुआं स्थित अमर उजाला कार्यालय में बुधवार को कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर महाराज का आगमन हुआ। इस दौरान उन्होंने देश के विकास के लिए सनातन बोर्ड के गठन को जरूरी बताया। साथ ही कई मुद्दों पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी। कहा कि जिस तरह अयोध्या में श्रीराम का भव्य और अलौकिक मंदिर बना है उसी तरह मथुरा में भी भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर बनेगा।
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि जब 16 नवंबर 2024 को प्रयागराज के मंच से सनातन बोर्ड के गठन की मांग उठाई थी तो लोगों ने उपहास किया था। इसके बाद 27 जनवरी 2025 को इसके समर्थन में मांग उठी। 16 अक्तूबर 2025 को हिमाचल प्रदेश के हाईकोर्ट ने भी कहा कि मंदिर के धन से सड़क बनाने के कार्य नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर के धन पर सरकार का कब्जा नहीं होना चाहिए। सनातन बोर्ड के गठन से ही आने वाली पीढ़ी को हम सुरक्षित रख सकेंगे। दावा किया कि एक माह बाद नवंबर में हम सनातन बोर्ड के गठन की प्रक्रिया में एक कदम और आगे बढ़ेंगे। उन्होंने आशा जताई कि सभी सरकारें मिलकर सनातन बोर्ड बनाएंगी।
प्रश्न: सनातन बोर्ड की देश में क्यों जरूरत है।
- बोर्ड के जरिए मंदिरों में आने वाले धन का उपयोग आधुनिक गुरुकुलम और गोशाला बनाने में होगा। गुरुकुलम में हमारे बच्चे संस्कारवान बनेंगे। गोशाला में गोवंश एक जगह रह सकेंगे और सड़कों पर नहीं भटकेंगे। उनकी उचित देखभाल होगी। सनातन बोर्ड के जरिए मंदिरों में आने वाले धन से अस्पताल बन सकेंगे जहां गरीबों की सेवा हो सकेगी।
प्रश्न: धर्म परिवर्तन कैसे रुकेगा।
- जो गरीबी की वजह से धर्म परिवर्तन करते हैं उन्हें सिर्फ सनातन बोर्ड के गठन से ही रोका जा सकेगा। इस बोर्ड से ऐसी व्यवस्था होगी जिससे गरीब सनातनियों की मदद हो सके।
प्रश्न: आज जाति और धर्म की राजनीति होती है, ऐसा क्यों, यह कैसे रुकेगा।
- प्रधानमंत्री कौन है, राष्ट्रपति कौन है, यह लोग ब्राह्मण नहीं हैंं। इस बोर्ड में कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं होना चाहिए क्योंकि नेता वोट बैंक के लिए धर्म और जाति की राजनीति करते हैं। बोर्ड में चारों शंकराचार्य, पीठों के पीठाधीश्वर होंगे। मंदिरों के धन के व्यय को लेकर नियमावली भी होनी चाहिए।
प्रश्न: सनातन का विरोध क्यों हो रहा है।
- जो लोग एमएलए और एमपी बनना चाहते हैं वह अपनी जाति का सहारा लेकर बनते हैं। वहीं लोग हमारे समाज को बांट रहे हैं। उनकी दृष्टि में सनातन उन लोगों का नहीं है लेकिन जो सनातन को समझते हैं वह जानते हैं कि सनातन से ही देश का उद्धार और विकास होगा।
- कोई रणनीति नहीं, धर्म ही रणनीति है। जो धर्म को जान लेगा वह राम को मान लेगा। जो कुर्सी से प्यार करे बैठा है वह अपने पिता को भी नहीं मानेगा। उसे तो सिर्फ अपनी जाति का वोट चाहिए, उसे कुछ नहीं दिखेगा और मुझे तो वोट चाहिए नहीं। ऐसे लोग सनातन को टारगेट इसलिए करते हैं कि वह भगवान को भी जाति वर्ग का दुश्मन बना रहे हैं जो पूर्ण रूप से गलत है।
प्रश्न: आज के युवा भटक क्यों रहे हैं।
- मैकले की शिक्षा ने देश के नव युवकों को बिगाड़ दिया है। आज के युवा डॉक्टर और इंजीनियर तो बन रहे हैं लेकिन वह मां-पिता की पीड़ा को नहीं समझ रहे। उनके मां-पिता अकेले हो गए हैं। हमें श्रवण कुमार, श्रीराम, विवेकानंद जैसे महानुभावों को पाठ्यक्रम में पढ़ाना चाहिए।
प्रश्न: मंदिरों में हर साल करोड़ों रुपया आता है। फिर भी कोई उसे जनहित में खर्च नहीं करता। यह कैसे होगा।
- हमारा ट्रस्ट विश्व शांति सेवा चैरिटेबल अभी 125 कन्याओं को पढ़ा रही है लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा जैसा है। ऐसे ही कार्य देश के सभी मंदिरों के ट्रस्टों को करना चाहिए जिससे सनातनियों का विकास हो सके।
चार लाख मदरसे तो गुरुकुलम क्यों नहीं
कहा कि देशभर के प्रमुख मंदिरों में हर साल करीब दो लाख करोड़ से अधिक रुपये आते हैं। सनातन बोर्ड गठन के बाद इस धन का उपयोग सनातन के विकास में किया जाना चाहिए। जब देश में चार लाख मदरसे हैं तो गुरुकुलम क्यों नहीं हैं। वर्तमान पीढ़ी को रामायण, महाभारत और सनातन के विषय में जानकारी देनी चाहिए। यह पाठ्यक्रम में शामिल हो।