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कानपुर देहात : कर्ज माफी की आस में किसान ने नहीं जमा की थी एक भी किस्त

Thu, 02 Jun 2022 01:36 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jun 2022 01:36 AM IST
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Kanpur Dehat : The farmer had not deposited a single installment in the hope of loan waiver
राजपुर/सिकंदरा। कर्ज माफी की आस में ऊमरपुर के किसान ने वर्ष 2014 में केसीसी पर लिए ऋण की एक भी किस्त नहीं अदा की। बाद में सह खातेदार पिता की मौत हो गई। समय बीतने के साथ लोन बढ़ता गया।
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आर्थिक स्थिति कमजोर होने से किसान बैंक जाने से कतराता रहा। मार्च में लोन बढ़कर 2.98 लाख पहुंच गया तो बैंक के अधिकारियों ने उससे संपर्क किया। इससे किसान को जमीन जाने की चिंता सताने लगी और वह तनाव में आ गया। इससे परेशान होकर सोमवार की रात उसने फांसी लगा ली। यहीं चर्चा बुधवार को घर-परिवार व आसपड़ोस में होती रही।
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ऊमरपुर निवासी इंद्र कुमार (52) ने सोमवार रात नलकूप के पास लगे नीम के पेड़ पर फांसी लगा ली थी। मंगलवार सुबह परिजनों को घटना की जानकारी हुई। परिजनों ने आर्थिक तंगी और बैंक का लोन होने की वजह से तनाव में यह कदम उठाने की बात कही थी।
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दिवंगत के छोटे भाई राजकुमार ने बताया कि पिता छब्बेलाल ने राजपुर की बड़ौदा बैंक से आठ वर्ष पूर्व किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से 1.33 लाख रुपये लोन लिया था। इसमें भाई इंद्र कुमार सह खातेदार था। दो वर्ष बाद पिता की मौत हो गई।
वहीं, इंद्र कुमार की पत्नी रामदुलारी ने बताया कि दो बेटियों की शादी करने और और घर की आर्थिक स्थित ठीक नहीं होने की वजह से पति लोन नहीं अदा कर पा रहे थे। पिता की मौत के बाद कर्ज माफी की आस में किश्तें जमा नहीं की।
मार्च में बैंक के रिकवरी अधिकारी गांव आए और उन्होंने 2.98 लाख रुपये ऋण होने की जानकारी दी। इसके बाद से पति तनाव में आ गए। आर्थिक तंगी से रुपये का जुगाड़ न होने व जमीन जाने की चिंता उन्हें सता रही थी।
लोन माफी की आस तो टूटी ही जिंदगी भर का गम भी मिला। बैंक के रिकवरी अफसर शिवम कटियार ने बताया कि लोन की कोई किश्त अदा नहीं की गई। ऋणी ने बैंक से संपर्क कर लोन अदा करने में रुचि भी नहीं दिखाई।
वर्ष 2019 में खाता एनपीए कर दिया गया। इसके बाद जानकारी कराई गई तो छब्बेलाल की मौत की बात पता चली। मेगा लोक अदालत में एक मुश्त समाधान योजना के तहत किसान को नोटिस भेजा गया था, लेकिन परिजनों ने नोटिस लेने से इन्कार कर दिया था।

40 फीसदी मूलधन जमा कर लोन से मिलेगा छुटकारा
बैंक आफ बड़ौदा के रिकवरी अफसर शिवम कटियार ने बताया कि किसान छब्बे लाल ने बेटे इंद्र कुमार के साथ संयुक्त रूप से जनवरी 2014 में 1.33 लाख रुपये लोन स्वीकृति कराया। बाद में उसने 10 हजार 406 रुपये की एक किश्त और निकाली। कुल 1 लाख 43 हजार 406 रुपये मूलधन बकाया था। अब लोन बढ़कर 2.98 लाख पहुंच गया है। वर्तमान में बैंक की स्कीम के तहत सौ फीसदी ब्याज माफी के साथ 40 फीसदी धनराशि जमा करने पर किसान को लोन से छुटकारा मिल सकता है। करीब 60 हजार रुपये जमा करने पर पूरा लोन अदा हो जाएगा।
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