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बेटे के जज बनने पर मां-बाप के खुशी के छलके आंसू, तीन बार परीक्षा देने के बाद प्रवीण हुए सफल

Sun, 21 Jul 2019 07:46 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 21 Jul 2019 07:46 PM IST
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जज बनने के बाद परिजनों के साथ प्रवीण - फोटो : अमर उजाला
कानपुर देहात के रूरा निवासी प्रवीण सिंह गौर का चयन पीसीएस (जे) में होने पर मां बाप बेहद खुश हैं। बातचीत के दौरान उनके खुशी के आंसू छलक गए। इस सफलता पर उनके घर में बधाई देने का सिलसिला शुरु है। 
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पिता अमर सिंह डेरापुर तहसील में वरिष्ठ वकील हैं। उन्होंने बताया कि प्रवीण की प्राथमिक शिक्षा रूरा में हुई। इसके यहीं के आरपीएस इंटर कालेज से 10वीं व 12 वीं पढ़ाई की। हाईस्कूल में प्रवीण ने 64.3, 12 वीं में 65.4 फीसद अंक प्राप्त किए।
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तीन बार परीक्षा देने के बाद भी नहीं हुआ चयन तो और मेहनत कर दी शुरु

इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्व विद्यालय से बीए में 68.4 अंक प्राप्त करने के बाद एलएलबी के लिए बीएचयू में दाखिला लिया। 65 फीसद अंक से उत्तीर्ण होने के बाद वह एलएलएम करने के लिए 2010 में बंगलुरु चले गए। इसके बाद वह बीएचयू में पीएचडी करने लगे।

प्रवीण बताया कि इस दौरान उन्होंने तीन बार पीसीएस जे की परीक्षा दी। एक बार व मेन परीक्षा भी उत्तीर्ण कर लिए लेकिन उनका इटरव्यू में नहीं हो पाया। प्रवीण ने हार नहीं मानी तीसरी बार भी उन्होंने परीक्षा दी। जिसमें 239 रैंक पाकर वह सफल हो गए। उन्होंने सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया।  

 

प्रवीण 6-7 घंटे करते थे पढ़ाई, गर्व से चौड़ा हो गया मां बाप का सीना

प्रवीण सिंह गौर ने जज बनकर न केवल रूरा बल्कि जिले का नाम रोशन किया है। वह बताते हैं कि तैयारी को लेकर रोजना छह से सात घंटे पढ़ाई करते थे। दो बार परीक्षा में सफल न होने पर भी उन्होंने हार नहीं मानी। बड़े भाई दुर्गेश सिंह गौर(जिला कृषि अधिकारी)  समय-समय पर हौसला बढ़ाते रहे। 

बेटे की सफलता के बाद मां सुमन सिंह गौर व पिता अमर सिंह फूले नहीं समा रहे है। मां बोली मेरा जीवन सफल हो गया। दोनों बेटे अफसर बन गए। मां ने बतया कि बड़े बेटे दुर्गेश सिंह गौर ने 2015 में पीसीएस की परीक्षा पास की थी। आज वह झांसी में जिला कृषि अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। 
 
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