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कानपुर देहात : दूज पर भाइयों को तिलक कर मांगी दीर्घायु, बहनों को मिले उपहार
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नन्हे भाई को रोचना करती बहन। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। होली के बाद भइया दूज का पर्व शनिवार को हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। मुहूर्त के अनुसार दोपहर 12:15 बजे के बाद बहनों ने रोली व गुलाल से भाइयों के माथे पर तिलक किया और उनकी दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने भी बहनों का आशीर्वाद लिया और उन्हें उपहार दिए।
भाई दूज का पर्व मनाने के लिए सुबह से ही बहनों ने तैयारी शुरू कर दी थी। पर्व मनाने को लेकर बहनों में खास उत्साह रहा। ससुराल से भी बहनें भाइयों के घर पहुंचीं। बहनों ने थाल में गुझिया, मिठाइयां, रोली, गुलाल आदि सजाकर पूजा की।
भाइयों के माथे पर रोली व गुलाल का तिलक लगाया और गुझिया व मिठाई खिलाई। इसके साथ भाइयों की दीर्घायु और कल्याण की कामना की। वहीं धार्मिक मान्यता के अनुसार घर आए भाइयों को बहनों ने भोजन कराया। बताते हैं कि बहनों के घर दूज को भोजन करने से भाई के कष्ट दूर होते हैं।
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जेल में नहीं हुई मिलाई, रोली टीका भेजा
जेल में बहनों की भाइयों से मुलाकात की छूट नहीं दी गई। इसकी वजह से बहनें जेल में बंद भाइयों से मुलाकात नहीं कर सकीं। गेट पर केवल रोली दिया। इसके लिए बाहर ही काउंटर बनाया गया था। यहां जेल कर्मी जयनारायण यादव, चंद्रशेखर ने पैकेट जमा किए। डिप्टी जेलर शिवाजी सिंह ने बताया कि बहनों के रोली टीका से जुड़े पैकट बाद में भाइयों को दिए गए। (संवाद)
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भाई दूज का पर्व मनाने के लिए सुबह से ही बहनों ने तैयारी शुरू कर दी थी। पर्व मनाने को लेकर बहनों में खास उत्साह रहा। ससुराल से भी बहनें भाइयों के घर पहुंचीं। बहनों ने थाल में गुझिया, मिठाइयां, रोली, गुलाल आदि सजाकर पूजा की।
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भाइयों के माथे पर रोली व गुलाल का तिलक लगाया और गुझिया व मिठाई खिलाई। इसके साथ भाइयों की दीर्घायु और कल्याण की कामना की। वहीं धार्मिक मान्यता के अनुसार घर आए भाइयों को बहनों ने भोजन कराया। बताते हैं कि बहनों के घर दूज को भोजन करने से भाई के कष्ट दूर होते हैं।
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जेल में नहीं हुई मिलाई, रोली टीका भेजा
जेल में बहनों की भाइयों से मुलाकात की छूट नहीं दी गई। इसकी वजह से बहनें जेल में बंद भाइयों से मुलाकात नहीं कर सकीं। गेट पर केवल रोली दिया। इसके लिए बाहर ही काउंटर बनाया गया था। यहां जेल कर्मी जयनारायण यादव, चंद्रशेखर ने पैकेट जमा किए। डिप्टी जेलर शिवाजी सिंह ने बताया कि बहनों के रोली टीका से जुड़े पैकट बाद में भाइयों को दिए गए। (संवाद)