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Kanpur News: फौजी की हत्या में दो भाइयों समेत तीन को उम्रकैद, 26-26 हजार रुपये अर्थदंड लगाया
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कानपुर देहात। घाटमपुर क्षेत्र में करीब 12 साल पहले एक गांव में छुट्टी लेकर आए फौजी की जमीन के विवाद में कुल्हाड़ी व लाठी डंडों से हत्या कर दी गई थी। मामले में अदालत ने शुक्रवार को दो भाइयों समेत तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 26-26 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता विवेक कुमार त्रिपाठी व देवेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि कानपुर नगर के घाटमपुर क्षेत्र के इस्माइलपुर कदीम गांव निवासी नरेश सिंह ने थाने मेंं रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि उसके भाई धीरेंद्र कुमार सेना में असम में तैनात था।
वह 26 अक्तूबर 2011 को छुट्टी में गांव आया था। दोपहर में वह अपने कमरे के पास खड़ा था। उसी समय उसकी जमीन पर गांव निवासी महावीर जानवरों का गोबर डालकर कब्जा करने की कोशिश कर रहा था।
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इसका धीरेंद्र ने विरोध किया तो महावीर ने बेटों रामदास, हरिशंकर व पारिवारिक मुन्ना के साथ मिलकर लाठी डंडों और कुल्हाड़ी से उस पर हमला कर दिया। इसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किए थे। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम चंद्रशेखर की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान महावीर की मृत्यु हो गई थी।
बुधवार को अदालत ने तीनों आरोपियों रामदास, हरिशंकर व अन्य आरोपी मुन्ना को हत्या के आरोप में दोषी करार दिया था। शुक्रवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों भाइयों राम दास व हरिशंकर व मुन्ना को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक दोषी पर 26-26 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। वहीं, अर्थदंड अदा न करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा सुनाई है।
तीन प्रत्यक्षदर्शी समेत नौ गवाहों ने दिलाई सजा
सहायक शासकीय अधिवक्ता विवेक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि अभियोजन की ओर से घटना के समय मौजूद रहने वाले तीन प्रत्यक्षदर्शी गवाहों नरेश सिंह, रविंद्र व लउआ समेत नौ अभियोजन के गवाहों को अदालत में पेश किया गया। इन्होंने घटना को साबित किया ।
बचाव पक्ष के गवाह सजा से नहीं बचा सके
सहायक शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि बचाव पक्ष की ओर चार गवाहों मलखान सिंह, घनश्याम, कामता प्रसाद व जीत कुमार को अदालत में पेश कर उनके बयान दर्ज कराए गए थे। इन गवाहों ने दोषियों के घटनास्थल पर न होने की बात अदालत में रखी गई थीं। अभियोजन की ओर से इनसे जिरह की गई तो यह अपनी बात को साबित नहीं कर सके थे।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता विवेक कुमार त्रिपाठी व देवेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि कानपुर नगर के घाटमपुर क्षेत्र के इस्माइलपुर कदीम गांव निवासी नरेश सिंह ने थाने मेंं रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि उसके भाई धीरेंद्र कुमार सेना में असम में तैनात था।
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वह 26 अक्तूबर 2011 को छुट्टी में गांव आया था। दोपहर में वह अपने कमरे के पास खड़ा था। उसी समय उसकी जमीन पर गांव निवासी महावीर जानवरों का गोबर डालकर कब्जा करने की कोशिश कर रहा था।
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इसका धीरेंद्र ने विरोध किया तो महावीर ने बेटों रामदास, हरिशंकर व पारिवारिक मुन्ना के साथ मिलकर लाठी डंडों और कुल्हाड़ी से उस पर हमला कर दिया। इसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किए थे। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम चंद्रशेखर की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान महावीर की मृत्यु हो गई थी।
बुधवार को अदालत ने तीनों आरोपियों रामदास, हरिशंकर व अन्य आरोपी मुन्ना को हत्या के आरोप में दोषी करार दिया था। शुक्रवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों भाइयों राम दास व हरिशंकर व मुन्ना को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक दोषी पर 26-26 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। वहीं, अर्थदंड अदा न करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा सुनाई है।
तीन प्रत्यक्षदर्शी समेत नौ गवाहों ने दिलाई सजा
सहायक शासकीय अधिवक्ता विवेक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि अभियोजन की ओर से घटना के समय मौजूद रहने वाले तीन प्रत्यक्षदर्शी गवाहों नरेश सिंह, रविंद्र व लउआ समेत नौ अभियोजन के गवाहों को अदालत में पेश किया गया। इन्होंने घटना को साबित किया ।
बचाव पक्ष के गवाह सजा से नहीं बचा सके
सहायक शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि बचाव पक्ष की ओर चार गवाहों मलखान सिंह, घनश्याम, कामता प्रसाद व जीत कुमार को अदालत में पेश कर उनके बयान दर्ज कराए गए थे। इन गवाहों ने दोषियों के घटनास्थल पर न होने की बात अदालत में रखी गई थीं। अभियोजन की ओर से इनसे जिरह की गई तो यह अपनी बात को साबित नहीं कर सके थे।