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कानपुर देहात : लर्निंग लाइसेंस बनवाने में अब आवेदक की जगह दूसरा व्यक्ति नहीं हल कर पाएगा पेपर
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कानपुर देहात। लर्निंग लाइसेंस बनवाने की फेसलेस व्यवस्था में हो रहे खेल को अब साफ्टवेयर रोकेगा। आवेदक के अलावा अगर कोई और परीक्षा देगा तो इसकी जानकारी इसी साफ्टवेयर से आरआई को मिल जाएगी। इस पर आवेदक की लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया रोक दी जाएगी।
अकबरपुर स्थित एआरटीओ कार्यालय की ज्यादातर व्यवस्थाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं। लर्निंग लाइसेंस बनाने की फेसलेस व्यवस्था भी यहां शुरू है। इसके तहत आवेदक को कार्यालय आने के बजाए किसी भी कैफे में जाकर लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन करना होता है।
इसके बाद परीक्षा के लिए तय तारीख पर कैफे जाकर एआरटीओ दफ्तर की वेबसाइट में लॉगिन करना होता है। वहां कंप्यूटर में लगे कैमरे से आवेदक की रेटिना को स्कैन करने के बाद पेपर खुल जाता है। यहां पर कई बार खेल शुरू हो जाता है।
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आवेदक की जगह पेपर कोई दूसरा हल करता था। ऐसे कई शिकायत आरआई सत्येंद्र सिंह के पास आ चुकी हैं। इसको देखते हुए 18 अप्रैल से ऑनलाइन टेस्ट प्रक्रिया में एक नया साफ्टवेयर अपडेट किया गया है।
अब रेटिना स्कैन के बाद अगर आवेदक की जगह कोई दूसरा पेपर देने के लिए बैठता है तो साफ्टवेयर उसे पकड़ लेता है। इसके बाद आरआई प्रक्रिया को रोक कर आवेदक को वापस कर देते हैं।
अभी तक सात लोगों को वापस किया जा चुका है। आरआई सत्येंद्र सिंह ने बताया कि अगर बिना टेस्ट दिए लोग पास हो गए तो यातायात नियमों के बारे में उन्हें जानकारी नहीं हो पाएगी। नई व्यवस्था के तहत अब आवेदक को ही ऑनलाइन टेस्ट देना होगा।
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अकबरपुर स्थित एआरटीओ कार्यालय की ज्यादातर व्यवस्थाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं। लर्निंग लाइसेंस बनाने की फेसलेस व्यवस्था भी यहां शुरू है। इसके तहत आवेदक को कार्यालय आने के बजाए किसी भी कैफे में जाकर लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन करना होता है।
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इसके बाद परीक्षा के लिए तय तारीख पर कैफे जाकर एआरटीओ दफ्तर की वेबसाइट में लॉगिन करना होता है। वहां कंप्यूटर में लगे कैमरे से आवेदक की रेटिना को स्कैन करने के बाद पेपर खुल जाता है। यहां पर कई बार खेल शुरू हो जाता है।
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आवेदक की जगह पेपर कोई दूसरा हल करता था। ऐसे कई शिकायत आरआई सत्येंद्र सिंह के पास आ चुकी हैं। इसको देखते हुए 18 अप्रैल से ऑनलाइन टेस्ट प्रक्रिया में एक नया साफ्टवेयर अपडेट किया गया है।
अब रेटिना स्कैन के बाद अगर आवेदक की जगह कोई दूसरा पेपर देने के लिए बैठता है तो साफ्टवेयर उसे पकड़ लेता है। इसके बाद आरआई प्रक्रिया को रोक कर आवेदक को वापस कर देते हैं।
अभी तक सात लोगों को वापस किया जा चुका है। आरआई सत्येंद्र सिंह ने बताया कि अगर बिना टेस्ट दिए लोग पास हो गए तो यातायात नियमों के बारे में उन्हें जानकारी नहीं हो पाएगी। नई व्यवस्था के तहत अब आवेदक को ही ऑनलाइन टेस्ट देना होगा।