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कानपुर देहात : बनारअलीपुर स्थित 50 बेड के आयुष अस्पताल में शुरू हुई हिजामा थैरेपी
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कानपुर देहात। बनारअलीपुर स्थित 50 बेड के आयुष अस्पताल मेें यूनानी पद्धति से होने वाली हिजामा थैरेपी शुरू कर दी गई है। इस थैरेपी से शरीर में रुके हुए खराब खून को बाहर निकाल दिया जाता है। इससे शरीर में कोई भी बीमारी पैदा नहीं हो पाती है।
आयुष अस्पताल में धीरे-धीरे सुविधाएं बढ़ती जा रही हैं। अस्पताल में अब हिजामा थेरेपी (कपिंग) शुरू कर दी गई है। इसके लिए अस्पताल में दो यूनानी डॉक्टरों की तैनाती भी की गई है। डॉ. मोहम्मद जकारिया फारुखी ने बताया कि इस पद्धति से शरीर से खराब खून निकालकर बीमारी दूर की जाती है।
हर प्रकार के दर्द, सियाटिक, स्लिप डिस्क, सिरदर्द, चर्मरोग, किडनी, हृदय रोग, लकवा, मिर्गी, महावारी की समस्या, गर्भाशय व हार्मोनल विकार, अस्थमा, थायरॉइड, पेट, चेहरे पर दाने व दाग धब्बे और गंजेपन के उपचार में यह थैरेपी कारगर है।
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अस्पताल की पैथालॉजी में शुरू हुई जांच
आयुष अस्पताल में बनी पैथालॉजी में रखी मशीनें बिजली संकट की वजह से स्थापित नहीं हो पा रही थीं। बिजली व्यवस्था ठीक होने पर लैब में मशीनों को स्थापित करने का काम पूरा हुआ। इससे यहां जांच भी शुरू हो गई है।
अस्पताल में हिजामा थैरेपी के साथ ही पैथालॉजी में जांच चालू हो गई है। इससे मरीजों को अब भटकना नहीं पड़ेगा और अस्पताल में बेहतर उपचार मिलेगा। - डॉ. बृजेश आर्या, सीएमएस।
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आयुष अस्पताल में धीरे-धीरे सुविधाएं बढ़ती जा रही हैं। अस्पताल में अब हिजामा थेरेपी (कपिंग) शुरू कर दी गई है। इसके लिए अस्पताल में दो यूनानी डॉक्टरों की तैनाती भी की गई है। डॉ. मोहम्मद जकारिया फारुखी ने बताया कि इस पद्धति से शरीर से खराब खून निकालकर बीमारी दूर की जाती है।
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हर प्रकार के दर्द, सियाटिक, स्लिप डिस्क, सिरदर्द, चर्मरोग, किडनी, हृदय रोग, लकवा, मिर्गी, महावारी की समस्या, गर्भाशय व हार्मोनल विकार, अस्थमा, थायरॉइड, पेट, चेहरे पर दाने व दाग धब्बे और गंजेपन के उपचार में यह थैरेपी कारगर है।
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अस्पताल की पैथालॉजी में शुरू हुई जांच
आयुष अस्पताल में बनी पैथालॉजी में रखी मशीनें बिजली संकट की वजह से स्थापित नहीं हो पा रही थीं। बिजली व्यवस्था ठीक होने पर लैब में मशीनों को स्थापित करने का काम पूरा हुआ। इससे यहां जांच भी शुरू हो गई है।
अस्पताल में हिजामा थैरेपी के साथ ही पैथालॉजी में जांच चालू हो गई है। इससे मरीजों को अब भटकना नहीं पड़ेगा और अस्पताल में बेहतर उपचार मिलेगा। - डॉ. बृजेश आर्या, सीएमएस।