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Kanpur News: डेंगू से जिले में पहली मौत, स्वास्थ्य विभाग अनजान, कानपुर नगर में चल रहा था उपचार

Thu, 17 Aug 2023 01:49 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 17 Aug 2023 01:49 AM IST
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Kanpur Dehat : First death due to dengue in the district, health department unaware, treatment was going on in Kanpur city
कानपुर देहात। बदलते मौसम के बीच मच्छरजनित रोग पैर पसार रहे हैं। जिले के जलालपुर नागिन में मलेरिया से बच्ची की मौत के बाद अब बरौर क्षेत्र में एक व्यक्ति की डेंगू से जान चली गई। जिले में इस सीजन में डेंगू से यह पहली मौत है।
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पीड़ित का कानपुर नगर स्थित एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। वहीं, जिले का स्वास्थ्य विभाग डेंगू से किसी व्यक्ति की मौत से इन्कार कर रहा है। तीन दिन बाद भी स्वास्थ्य और पंचायती राज विभाग की ओर से क्षेत्र में न तो साफ-सफाई कराई गई और न ही आसपास के लोगों की जांच की कराई गई।
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मलासा ब्लॉक के बरौर बाजार के पास रहने वाले विजय कुमार (49) को 11 अगस्त से बुखार आ रहा था। खून की उल्टी होने पर परिवार के लोग 12 अगस्त को उन्हें कानपुर नगर के रीजेंसी अस्पताल ले गए। वहां उसे भर्ती कर उपचार शुरू किया गया।
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इस दौरान उनकी किट से डेंगू की जांच की तो वह संक्रमित मिले। इस पर एलाइजा टेस्ट कराया गया जिसमें भी डेंगू की पुष्टि हुई। उपचार के दौरान उनकी प्लेटलेट्स घटती गईं और 13 अगस्त को विजय ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।

निजी अस्पताल की ओर से जारी मृत्यु के कागजातों में भी उनके डेंगू संक्रमित होने की बात लिखी हुई है। विजय कुमार की मौत के तीन दिन भी स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी नहीं हुई। देवीपुर सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. विकास कुमार इसे सामान्य मौत बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। अभी तक विभाग की कोई टीम गांव नहीं पहुुंची।

वहीं, पंचायतीराज विभाग की ओर से भी साफ-सफाई नहीं कराई गई। इससे पहले सरवनखेड़ा ब्लॉक के जलालपुर नागिन गांव के मजरा गोधेपुर में कामता की पांच वर्षीय बेटी परी की मलेरिया से मौत हो गई थी। अखबारों में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन गांव पहुंचा था और लोगों की जांच कराई थी।


घर-घर दस्तक नहीं दे रहीं हैं आशा
संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए दस्तक अभियान चलाया जा रहा है। वहीं, मलासा ब्लॉक के बरौर क्षेत्र में आशा घर-घर दस्तक नहीं दे रही हैं। इस वजह से स्वास्थ्य विभाग को यह नहीं पता कि क्षेत्र में कितने लोग बुखार से पीड़ित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आशा काफी समय से क्षेत्र का सर्वे करने नहीं आई हैं।


सफाई, फॉगिंग व एंटी लार्वा छिड़काव पर नहीं ध्यान
जिस मरीज की रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव आती है, उसके घर के साथ ही आसपास के 50 घरों में लार्वा सर्वे, मिलने पर उसे नष्ट कराने, फॉगिंग, दवाओं का छिड़काव और जागरूकता अभियान चलाने जैसी गतिविधियां करनी होती हैं। इसके पीछे उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद डेंगू फैलाने वाले मच्छरों को नष्ट करना होता है, ताकि कोई और इससे पीड़ित ना हो। क्षेत्र में डेंगू से मौत के बाद भी गांव में साफ-सफाई, फाॅगिंग और दवाओं का छिड़काव नहीं कराया गया। इससे दूसरों के भी बीमारी होने की संभावना बनी है।
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