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कानपुर देहात : प्रेमी के चक्कर में दहेज उत्पीड़न की कराई झूठी रिपोर्ट, हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, वादी पर हो सकती है कार्रवाई

Wed, 23 Feb 2022 01:13 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Feb 2022 01:13 AM IST
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Kanpur dehat : False report of dowry harassment in the affair of lover, High Court expressed displeasure, action may be taken against the plaintiff
कानपुर देहात। घाटमपुर की युवती ने कानपुर के रहने वाले ससुरालीजनों पर दहेज उत्पीड़न की फर्जी रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने चार्जशीट भी लगा दी। लोवर कोर्ट ने आरोपियों के विरुद्ध वारंट जारी किया तो आरोपी पक्ष हाईकोर्ट चला गया।
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वहां, युवती के प्रेम संबंधों के बाबत पर्याप्त साक्ष्य हाईकोर्ट को दिए, जबकि वादी की तरफ से कोई मजबूत साक्ष्य नहीं दिए जा सके। इस पर हाईकोर्ट ने कानून के दुरुपयोग पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। मामले में एफआईआर कराने वाली युवती पर अब कार्रवाई हो सकती है।
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यशोदा नगर कानपुर के रहने वाले आशीष निगम की शादी घाटमपुर के सियोधी ललाईपुर गांव में शिप्रा निगम के साथ 17 जुलाई 2016 को हुई थी। शादी के कुछ ही दिनों बाद शिप्रा ने पति आशीष, ससुर, सास व ननद के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज करा दी।
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विवेचक उमा सिंह ने मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी। लोवर डिवीजन कोर्ट घाटमपुर से आरोपियों के विरुद्ध वारंट जारी किया गया। इसके बाद आशीष ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
उसने वहां पक्ष रखा कि शादी से पहले से पत्नी शिप्रा के पड़ोस के गांव के रहने वाले एक भट्ठा संचालक से प्रेम संबंध हैं। शादी के बाद भी ये संबंध खत्म नहीं हुए। वह प्रेमी के साथ अक्सर घूमने जाती थी।
इसका विरोध करने पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने की फर्जी रिपोर्ट दर्ज करा दी। आशीष ने कोर्ट को प्रेमी के साथ घूमते हुए पत्नी की फोटो समेत अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य दिए। तर्क रखा कि प्रेम संबंधों में बाधा बनने की वजह से उसने ससुरालीजनों को चुप कराने के लिए दहेज उत्पीड़न के कानून का दुरुपयोग किया है।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने व साक्ष्य देखने के बाद पाया कि वादी को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही जेल भेजने की चेतावनी दी है। रिपोर्ट दर्ज कराने वाली विवाहिता की तरफ से कोर्ट को साक्ष्य नहीं दिए जा सके।
कोर्ट ने महिला से शपथ पत्र मांगा है। कोर्ट ने फर्जी रिपोर्ट दर्ज कराने में शिप्रा निगम, महेश निगम, पुष्पलता निगम, अशोक यादव व घाटमपुर पुलिस को दोषी माना है।
आमतौर पर दहेज उत्पीड़न के मामले में पुलिस कोई पचड़े में नहीं पड़ना चाहती है। झूठे मामलों में भी कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर जिम्मेदारी से बच लेती है। घाटमपुर की शिप्रा के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है।
इस मामले की विवेचना करने वाली तत्कालीन सब इंस्पेक्टर उमा सिंह की भी जांच हो सकती है। कोर्ट पुलिस की भूमिका की भी जांच करा सकता है। आरोप सही न होने पर चार्जशीट दाखिल करने में पुलिस की विवेचना भी संदेह के घेरे में है। - जितेंद्र प्रताप सिंह, अधिवक्ता
नोटिस तामील में बनाए फर्जी हस्ताक्षर
दहेज उत्पीड़न में आरोपी शिप्रा की ननद प्रीती ने हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि वह गुड़गांव में नौकरी करती है। एफआईआर के बाद उसे कोई नोटिस तामील नहीं कराया गया। पुलिस ने नोटिस तामील कराने में उसके फर्जी हस्ताक्षर बना दिए।

प्रीती ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र देकर खुद के हस्ताक्षर न होने की बात कही। उसने कहा कि दहेज उत्पीड़न जैसे मामले से उनका कोई लेना देना भी नहीं है। वारंट जारी कराने के लिए पुलिस ने विरोधी पक्ष से मिलकर फर्जी हस्ताक्षर करके उसके खिलाफ षड्यंत्र किया।
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