{"_id":"623cc5665a9cf7181468b915","slug":"kanpur-dehat-even-after-walking-two-to-four-km-toll-tax-has-to-be-paid-in-bara-akbarpur-news-knp687316160","type":"story","status":"publish","title_hn":"कानपुर देहात ः दो-चार किमी चलने पर भी बारा में देना पड़ता टोल टैक्स","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानपुर देहात ः दो-चार किमी चलने पर भी बारा में देना पड़ता टोल टैक्स
विज्ञापन
बारा टोल प्लाजा। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। जिले के बीच में टोल प्लाजा होने की वजह से दो चार किमी की यात्रा करने में भी टैक्स देना पड़ता है। अगर बारा के लोग किसी काम से रनियां जाते हैं तो उन्हें टोल टैक्स का भुगतान करना पड़ता है।
अगर उनके पास गैर जनपद के नंबर की कार या फिर वह किसी आने वाले रिश्तेदार के वाहन का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें टोल के नाम पर 225 रुपये देने पड़ते हैं। इससे टोल के आसपास के गांवों के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने सदन में बारा टोल का मुद्दा उठाया तो फिर से इसके खिलाफ माहौल गरम हो गया है। सदन में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी मान चुके हैं कि 60 किमी के अंदर टोल पर वसूली गलत है।
विज्ञापन
अब लोगों को उम्मीद दिख रही है उन्हें इस समस्या से निजात मिल सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल जिले के बार्डर में होना चाहिए ताकि जिले के अंदर आवागमन करने पर कोई टैक्स न देना पड़े।
अगर जिले के अंदर टोल रहे तो जनपद के वाहनों का आवागमन निशुल्क किया जाए। अपने ही जिले में रहकर दो चार किमी हाईवे का इस्तेमाल करने वाले वाहन सवारों से पूरे 60 किमी का टोल टैक्स वसूला जाता है।
बारा के पास टोल प्लाजा लगाने की मंशा शुरू से ही गलत रही है। जिम्मेदारों ने एनएच 25 से आने वाले वाहनों से जबरन वसूली के लिए बारा के पास टोल प्लाजा बनवाया है। इसे हटाकर एनएच दो में जिले के बार्डर में टोल प्लाजा लगाना चाहिए। - सत्यम, अकबरपुर
कई वर्षों से गलत ढंग से टोल वसूली की बात केंद्रीय परिवहन मंत्री भी मान रहे हैं। 60 किमी में दो टोल वसूली करते रहे। अभी तक जो रकम वसूली जा चुकी है, वाहन सवारों को उसकी भरपाई कैसे होगी, इस पर कुछ गाइड लाइन आनी चाहिए। - कुलदीप शुक्ला, रूरा
जिले के अंदर दो चार किमी यात्रा करने में भी टोल देना बेहद गलत है। निर्माण के समय निजी स्वार्थ के चलते जनप्रतिनिधियों ने कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई। अब टोल स्थापित हो गया है तो हटवाने के लिए सांसद को जूझना पड़ रहा है। - रोहित सक्सेना, नबीपुर
रनियां व बारा के आसपास के गांवों में लोगों के यहां अगर कानपुर शहर के नंबर की गाड़ी है तो भी उसे टोल की आम दरें भुगतान करनी पड़ रही हैं। अगर किसी रिश्तेदार के वाहन का प्रयोग करते हैं तो भी टैक्स देना पड़ता है। इसे जिले के बार्डर में लगाने की जरूरत है। - राममोहन मिश्रा, दस्तमपुर
विज्ञापन
अगर उनके पास गैर जनपद के नंबर की कार या फिर वह किसी आने वाले रिश्तेदार के वाहन का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें टोल के नाम पर 225 रुपये देने पड़ते हैं। इससे टोल के आसपास के गांवों के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
विज्ञापन
सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने सदन में बारा टोल का मुद्दा उठाया तो फिर से इसके खिलाफ माहौल गरम हो गया है। सदन में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी मान चुके हैं कि 60 किमी के अंदर टोल पर वसूली गलत है।
विज्ञापन
अब लोगों को उम्मीद दिख रही है उन्हें इस समस्या से निजात मिल सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल जिले के बार्डर में होना चाहिए ताकि जिले के अंदर आवागमन करने पर कोई टैक्स न देना पड़े।
अगर जिले के अंदर टोल रहे तो जनपद के वाहनों का आवागमन निशुल्क किया जाए। अपने ही जिले में रहकर दो चार किमी हाईवे का इस्तेमाल करने वाले वाहन सवारों से पूरे 60 किमी का टोल टैक्स वसूला जाता है।
बारा के पास टोल प्लाजा लगाने की मंशा शुरू से ही गलत रही है। जिम्मेदारों ने एनएच 25 से आने वाले वाहनों से जबरन वसूली के लिए बारा के पास टोल प्लाजा बनवाया है। इसे हटाकर एनएच दो में जिले के बार्डर में टोल प्लाजा लगाना चाहिए। - सत्यम, अकबरपुर
कई वर्षों से गलत ढंग से टोल वसूली की बात केंद्रीय परिवहन मंत्री भी मान रहे हैं। 60 किमी में दो टोल वसूली करते रहे। अभी तक जो रकम वसूली जा चुकी है, वाहन सवारों को उसकी भरपाई कैसे होगी, इस पर कुछ गाइड लाइन आनी चाहिए। - कुलदीप शुक्ला, रूरा
जिले के अंदर दो चार किमी यात्रा करने में भी टोल देना बेहद गलत है। निर्माण के समय निजी स्वार्थ के चलते जनप्रतिनिधियों ने कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई। अब टोल स्थापित हो गया है तो हटवाने के लिए सांसद को जूझना पड़ रहा है। - रोहित सक्सेना, नबीपुर
रनियां व बारा के आसपास के गांवों में लोगों के यहां अगर कानपुर शहर के नंबर की गाड़ी है तो भी उसे टोल की आम दरें भुगतान करनी पड़ रही हैं। अगर किसी रिश्तेदार के वाहन का प्रयोग करते हैं तो भी टैक्स देना पड़ता है। इसे जिले के बार्डर में लगाने की जरूरत है। - राममोहन मिश्रा, दस्तमपुर