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Kanpur News: जिला अस्पताल की ओपीडी में एक घंटे देर से पहुंचे डॉक्टर, मरीज करते रहे इंतजार
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कानपुर देहात। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के डॉक्टरों की मनमानी आए दिन सामने आती रहती है। सोमवार को सुबह नौ बजे तक अस्पताल में कोई डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टॉफ नहीं पहुंचा था। जबकि सुबह आठ बजे से ही ओपीडी शुरू होती है। इसके लिए अस्पताल में चिकित्सकों के कमरों के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लगी हुई थी।
जिला अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक में आठ अलग-अलग कमरे बने हैं। इन सभी कमरों में विशेषज्ञ डॉक्टर बैठकर मरीजों का उपचार करते हें। डेंगू और मलेरिया के लक्षण वाले मरीजों की इन दिनों जिला अस्पताल में भरमार है।
ऐसे में हर दिन 200 से 250 बुखार पीड़ित अस्पताल पहुंच रहे हैं। रविवार को ओपीडी न चलने की वजह से सोमवार को अस्पताल में सुबह आठ बजे ही मरीजों की भारी भीड़ जुट गई। सबसे ज्यादा लंबी लाइन फिजिशियन कक्ष के बाहर थी।
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कक्ष का दरवाजा बंद होने की वजह से काफी देर रात मरीज बाहर खड़े होकर इंतजार करते रहे। जब वह थक गए तो जमीन पर ही बैठ गए। इसी तरह बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी के बाहर भी मरीज बैठे थे। जिला अस्पताल से 18 किमी दूर रूरा के अंबियापुर स्टेशन से पहुंचे मानिक सिंह ने बताया कि आठ बजे पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर के कमरे के बाहर बैठ गए।
एक घंटे इंतजार के बाद नौ बजे पहुंचे डाॅक्टर ने उपचार शुरू किया। इसी तरह बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष के बाहर बैठीं बरौर से आईं सौम्या ने बताया कि उनके दो वर्षीय बेटे आरव को बुखार आ रहा था।
सुबह 9:15 बजे ओपीडी खाली रही तो वह कक्ष के बाहर जमीन पर बैठकर इंतजार करने लगीं। इसी तरह मानसिक रोग विशेषज्ञ, ईएनटी डॉक्टर, हड्डी रोग विशेषज्ञ, दंत रोग विशेषज्ञ, सर्जन, चेस्ट फिजिशियन के कमरे खाली रहे। दो बजे तक चली ओपीडी में 1336 मरीजों का उपचार हुआ।
जिले में नहीं रहता कोई डॉक्टर
शासनादेश के अनुसार जिस जिले में डॉक्टर की तैनाती होती है, वहीं पर ही उसे रुकना होता है। यह आदेश कई बार सीएमएस स्तर से जारी हो चुका है, इसके बावजूद कोई भी चिकित्सक जिले में नहीं रुकता है। ज्यादातर डॉक्टर कानपुर नगर से आते जाते हैं।
मरहम पट्टी वाले कमरे में भी लटका रहा ताला
जिला अस्पताल की ओपीडी ब्लॉक में ही मरहम पट्टी और इंजेक्शन कक्ष बना हुआ है। यहां पर कुत्ते के काटने के इंजेक्शन लगाने के साथ चोटिल मरीज की पट्टी की जाती है। यहां पर भी नौ बजे तक ताला लटका रहा।
ओपीडी में कुछ डाॅक्टर समय पर नहीं पहुंचे थे। उनसे जवाब तलब किया जाएगा। सभी को लगातार निर्देशित किया जा रहा है कि समय पर ओपीडी में पहुंचे, ताकि मरीजों को डॉक्टरों का लाभ मिल सके। -डॉ. खालिद रिजवान, सीएमएस, जिला अस्पताल।
डॉक्टर के समय पर नहीं आने पर कार्रवाई होती है। अस्पताल की व्यवस्था बेहतर हो, इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। जिला अस्पताल में लगातार डॉक्टरों की उपलब्धता की जांच कराई जाएगी। - नेहा जैन, डीएम
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जिला अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक में आठ अलग-अलग कमरे बने हैं। इन सभी कमरों में विशेषज्ञ डॉक्टर बैठकर मरीजों का उपचार करते हें। डेंगू और मलेरिया के लक्षण वाले मरीजों की इन दिनों जिला अस्पताल में भरमार है।
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ऐसे में हर दिन 200 से 250 बुखार पीड़ित अस्पताल पहुंच रहे हैं। रविवार को ओपीडी न चलने की वजह से सोमवार को अस्पताल में सुबह आठ बजे ही मरीजों की भारी भीड़ जुट गई। सबसे ज्यादा लंबी लाइन फिजिशियन कक्ष के बाहर थी।
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कक्ष का दरवाजा बंद होने की वजह से काफी देर रात मरीज बाहर खड़े होकर इंतजार करते रहे। जब वह थक गए तो जमीन पर ही बैठ गए। इसी तरह बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी के बाहर भी मरीज बैठे थे। जिला अस्पताल से 18 किमी दूर रूरा के अंबियापुर स्टेशन से पहुंचे मानिक सिंह ने बताया कि आठ बजे पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर के कमरे के बाहर बैठ गए।
एक घंटे इंतजार के बाद नौ बजे पहुंचे डाॅक्टर ने उपचार शुरू किया। इसी तरह बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष के बाहर बैठीं बरौर से आईं सौम्या ने बताया कि उनके दो वर्षीय बेटे आरव को बुखार आ रहा था।
सुबह 9:15 बजे ओपीडी खाली रही तो वह कक्ष के बाहर जमीन पर बैठकर इंतजार करने लगीं। इसी तरह मानसिक रोग विशेषज्ञ, ईएनटी डॉक्टर, हड्डी रोग विशेषज्ञ, दंत रोग विशेषज्ञ, सर्जन, चेस्ट फिजिशियन के कमरे खाली रहे। दो बजे तक चली ओपीडी में 1336 मरीजों का उपचार हुआ।
जिले में नहीं रहता कोई डॉक्टर
शासनादेश के अनुसार जिस जिले में डॉक्टर की तैनाती होती है, वहीं पर ही उसे रुकना होता है। यह आदेश कई बार सीएमएस स्तर से जारी हो चुका है, इसके बावजूद कोई भी चिकित्सक जिले में नहीं रुकता है। ज्यादातर डॉक्टर कानपुर नगर से आते जाते हैं।
मरहम पट्टी वाले कमरे में भी लटका रहा ताला
जिला अस्पताल की ओपीडी ब्लॉक में ही मरहम पट्टी और इंजेक्शन कक्ष बना हुआ है। यहां पर कुत्ते के काटने के इंजेक्शन लगाने के साथ चोटिल मरीज की पट्टी की जाती है। यहां पर भी नौ बजे तक ताला लटका रहा।
ओपीडी में कुछ डाॅक्टर समय पर नहीं पहुंचे थे। उनसे जवाब तलब किया जाएगा। सभी को लगातार निर्देशित किया जा रहा है कि समय पर ओपीडी में पहुंचे, ताकि मरीजों को डॉक्टरों का लाभ मिल सके। -डॉ. खालिद रिजवान, सीएमएस, जिला अस्पताल।
डॉक्टर के समय पर नहीं आने पर कार्रवाई होती है। अस्पताल की व्यवस्था बेहतर हो, इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। जिला अस्पताल में लगातार डॉक्टरों की उपलब्धता की जांच कराई जाएगी। - नेहा जैन, डीएम