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श्रेष्ठ कर्म से ही संभव होती है मोक्ष की प्राप्ति
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झींझक में कथा सुनाते आचार्य सुशील कुमार शुक्ला।
- फोटो : AKBARPUR
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झींझक (कानपुर देहात)। कस्बे के खमहैला रोड मोहल्ले में चल रही श्रीमद्भागवत कथा एवं शिव पुराण में आचार्य ने परीक्षित मोक्ष व शुकदेव पूजा की कथा सुनाई। इसे सुनकर श्रोता भाव विभोर हो गए।
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आचार्य सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि श्रंगी ऋषि के श्राप को पूरा करने के लिए तक्षक नामक सांप भेष बदलकर राजा परीक्षित के पास पहुंचकर उन्हें डंस लेता है। जहर के प्रभाव से राजा का शरीर जल जाता है और मौत हो जाती है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से राजा परीक्षित को मोक्ष प्राप्त होता है। पिता की मौत को देखकर राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय क्रोधित होकर सर्प नष्ट के लिए आहुतियां यज्ञ में डलवाना शुरू कर देते हैं। इसके प्रभाव से संसार के सभी सर्प यज्ञ कुंडों में भस्म होना शुरू हो जाते हैं।
देवता सहित सभी ऋषि-मुनि राजा जनमेजय को समझाते हैं और उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं। आचार्य ने कहा कि कथा के श्रवण प्रवचन करने से जन्म-जन्मांतरों के पापों का नाश होता है और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
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प्रवचन करते हुए कहा कि संसार में मनुष्य को सदा अच्छे कर्म करना चाहिए। तभी उसका कल्याण संभव है। माता-पिता के संस्कार ही संतान में जाते हैं। श्रेष्ठ कर्म से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। इस दौरान जयकारे लगाकर आरती उतारी गई। प्रसाद ग्रहण करने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। इस मौके पर ललित नारायण मिश्रा, सुशील, शैलजा मिश्रा, रामदर्शनी आदि भक्त मौजूद रहे।
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आचार्य सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि श्रंगी ऋषि के श्राप को पूरा करने के लिए तक्षक नामक सांप भेष बदलकर राजा परीक्षित के पास पहुंचकर उन्हें डंस लेता है। जहर के प्रभाव से राजा का शरीर जल जाता है और मौत हो जाती है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से राजा परीक्षित को मोक्ष प्राप्त होता है। पिता की मौत को देखकर राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय क्रोधित होकर सर्प नष्ट के लिए आहुतियां यज्ञ में डलवाना शुरू कर देते हैं। इसके प्रभाव से संसार के सभी सर्प यज्ञ कुंडों में भस्म होना शुरू हो जाते हैं।
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देवता सहित सभी ऋषि-मुनि राजा जनमेजय को समझाते हैं और उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं। आचार्य ने कहा कि कथा के श्रवण प्रवचन करने से जन्म-जन्मांतरों के पापों का नाश होता है और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
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प्रवचन करते हुए कहा कि संसार में मनुष्य को सदा अच्छे कर्म करना चाहिए। तभी उसका कल्याण संभव है। माता-पिता के संस्कार ही संतान में जाते हैं। श्रेष्ठ कर्म से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। इस दौरान जयकारे लगाकर आरती उतारी गई। प्रसाद ग्रहण करने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। इस मौके पर ललित नारायण मिश्रा, सुशील, शैलजा मिश्रा, रामदर्शनी आदि भक्त मौजूद रहे।