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CSA कॉन्क्लेव: मंत्री शाही बोले- कृषि और स्टार्टअप से बदलेगी गांवों की तस्वीर; हर ब्लॉक में लगेंगे मौसम उपकरण

Fri, 27 Mar 2026 09:24 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Fri, 27 Mar 2026 09:24 PM IST
सार

Kanpur News: सीएसए कानपुर के स्वर्ण जयंती समारोह में कृषि मंत्री ने मौसम उपकरणों और स्टार्टअप सेंटरों की घोषणा की। प्रदर्शनी में केले के रेशे के कपड़े और औरैया के शुद्ध घी जैसे नवाचारों ने लोगों का ध्यान खींचा।

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Kanpur CSA Conclave  Minister Shahi States Agriculture and Startups Will Transform the Face of Villages
सीएसए का स्वर्ण जयंती कार्यक्रम - फोटो : amar ujala

विस्तार

देश की अर्थव्यवस्था में कृषि का बड़ा योगदान है। कृषि उपज बढ़ाने और किसानों को मौसम के बारे में सटीक जानकारी देने के लिए ग्राम पंचायतों और विकास खंडों में माैसम संबंधी जानकारी देने के उपकरण लगाए जाएंगे। इसके अलावा युवाओं को कृषि आधारित उद्योग स्थापना में मदद देने के लिए आईआईटी की तर्ज पर सभी कृषि विश्वविद्यालयों में इन्क्यूबेशन सेंटर और कॉमन फैसिलिटी सेंटर खोले जाएंगे। यह बातें प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रतापी शाही ने कही। वह चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती वर्ष पर सीएसए सभागार में आयोजित तीन दिवसीय कॉन्क्लेव में आए थे।

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उन्होंने कहा कि सरकार ने दलहन और तिलहन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मिनी किट योजना शुरू की थी। इसके बाद प्रदेश में 35 लाख मीट्रिक टन तिलहन का उत्पादन होने लगा है। यह पहले 12 लाख मीट्रिक टन था। इसी तरह दलहन का उत्पादन 30 लाख मीट्रिक टन हो गया है जो पहले 23 लाख मीट्रिक टन था। उन्होंने दलहन और तिलहन के क्षेत्रफल और उत्पादन बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कृषि स्टार्टअप को बढ़ावा देने की जरूरत है। एमएसएमई एवं कृषि के संयुक्त तत्वावधान में युवाओं को नए सेक्टर में रोजगार के सृजन करने होंगे। इस दौरान तीन पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

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19,40,000 युवाओं को ऋण देकर स्वावलंबी बनाया
इस मौके पर प्रदेश के तीन संस्थानों एचबीटीयू, आईआईटी एवं एफएफडीसी कन्नौज के साथ विश्वविद्यालय ने एमओयू शाइन किए। विशिष्ट अतिथि कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने कहा कि सीएम युवा योजना युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का बड़ा जरिया बन गया है। सरकारी प्रतिष्ठानों के खाली पद जल्द भरे जाएंगे। प्रदेश में 19,40,000 युवाओं को ऋण देकर स्वावलंबी बनाया गया है। इस दौरान एमएसएमई, कृषि विश्वविद्यालय के इतिहास पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई। एचबीटीयू के कुलपति प्रोफेसर शमशेर, विधायक सुरेंद्र मैथानी, नीलिमा कटियार, निदेशक प्रसार डॉ. वीके त्रिपाठी, डॉ. कौशल कुमार, डॉ. महक सिंह, डाॅ. आरके सिंह और उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डाॅ. संजय सिंह आदि मौजूद रहे।

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पश्चिम एशिया संकट पर सरकार की नजर
पत्रकारों से बातचीत में कृषि मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट वैश्विक संकट है। सरकार हर जरूरी कदम आम नागरिकों के हितों के लिए उठा रही है। किसी को भी परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। अफवाहों पर ध्यान न दें। संकट पर सरकार की नजर है।

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दूध से घी बनाने का स्टार्टअप
कॉन्क्लेव में कृषि उत्पादों, तेल पिराई, आटा, चावल चक्की, खेतों में स्प्रे करने वाले ड्रोन आदि का प्रदर्शन किया गया। पहियों में चलने वाले खान-पान के स्टाल भी लगाए गए। औरैया के रहने वाले गोविंद यादव ने बताया कि उन्होंने गिर गाय, देसी गाय और भैंस के दूध से बने घी तैयार करने का स्टार्टअप शुरू किया है। उनका दावा है कि उनका घी पूरी तरह से प्राकृतिक है और 330 मानकों पर तैयार किया जाता है। गायाें को पशु चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाता है। गिर गाय का घी 2251 रुपये किलो है जबकि देसी गाय का घी 1951 और भैंस के दूध से तैयार घी का दाम 1700 रुपये किलो है। उनका कहना है कि कई ऑनलाइन प्लेटफार्म पर उनका घी उपलब्ध है। जल्द ही निर्यात शुरू करेंगे।

केले के रेशे से कपड़ा और मूंगफली के छिलके से डाई की तैयार
सीएसए की प्रोफेसर डाॅ. रितु पांडेय और रिसर्च स्कालर डाॅ. वैशाली सिंह ने बताया कि अलसी, भांग, कमल और केले के पेड़ और पत्तों के रेशों से कपड़ा तैयार किया गया है। यह पूरी तरह से प्राकृतिक और त्वचा के लिए बेहतर है। यह कपड़ा लेनिन फैब्रिक्स से बेहतर है। डाॅ. रितु ने बताया कि उन्होंने मूंगफली के छिलके से रंग वाली डाई तैयार की है। इसकी कपड़ों में कोटिंग करने पर और हर बार धोने पर रंग बढ़ता जाता है। यह प्राकृतिक उत्पाद हैं। इसका पेटेंट कराया गया है।





मूंज और मिट्टी के सजावटी सामान भी
प्रदर्शनी में मूंज से बनी डलिया और मिट्टी से बने गुल्लक, कुल्हड़, फ्लावर पॉट, लैंप, बाउल आदि का प्रदर्शन किया गया। मिट्टी पर ग्लेज की तरह की कोटिंग की गई थी जो सीसा जैसी चमकती है। इन उत्पादों की रेस्टोरेंट और होटलों में बहुत अच्छी मांग है। शिल्पी, संतोषी, विजय और शंकर ने बताया कि उन्नत भारत अभियान से जुड़ी रीता सिंह की देखरेख में उत्पादों को तैयार करते हैं। उत्पादों की कीमत 200 रुपये लेकर 750 रुपये प्रति पीस तक है।

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