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पुलिस की तीसरी आंख की ‘आंख मिचौली’, हैरान कर देगी ये रिपोर्ट
Wed, 06 Feb 2019 01:41 PM IST
शिखा पांडेय
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 06 Feb 2019 01:41 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कानपुर शहर में जब कभी कोई वारदात होती है तो पुलिस निजी मकानों, दुकानों की ओर ताकने लगती है कि कहीं कोई कैमरा लगा हो। उसे वारदात का क्लू मिल सके। तीन दिन पहले बिठूर में हुई साढ़े चार लाख की लूट में पुलिस को घटनास्थल से पैदल गश्त कर कैमरे खोजने पड़े, तब जाकर एक मकान में लगे कैमरे में लुटेरों का क्लू मिला।
ऐसी मजबूरी इसलिए क्योंकि शहर की हाईटेक सिक्योरिटी का हवाला देने वाली पुलिस ही अपनी पड़ताल के लिए गंभीर नहीं है। ऐसा नहीं है कि कैमरे लगाए नहीं गए, योजनाएं भी बनी। जो लापरवाही और नौकरशाही की भेंट चढ़ गईं।
1200 कैमरों का क्या हुआ
2014 में तत्कालीन एसएसपी यशस्वी यादव की पहल पर शहर भर में 1200 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। पर कंट्रोल रूम न होने की वजह हर कैमरे की रिकार्डिंग उसके डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकार्डर) में ही होती थी। पुलिस को जिस जगह के फुटेज की जरूरत होती थी उस सेटअप से डेटा ले लेती थी। कैमरे कम क्षमता वाले थे। साथ ही सिर्फ दस दिनों की रिकार्डिंग होती थी। लापरवाही के कारण न कैमरे अपडेट किए गए, न ही सेटअप ठीक हुआ।
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ऐसी मजबूरी इसलिए क्योंकि शहर की हाईटेक सिक्योरिटी का हवाला देने वाली पुलिस ही अपनी पड़ताल के लिए गंभीर नहीं है। ऐसा नहीं है कि कैमरे लगाए नहीं गए, योजनाएं भी बनी। जो लापरवाही और नौकरशाही की भेंट चढ़ गईं।
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1200 कैमरों का क्या हुआ
2014 में तत्कालीन एसएसपी यशस्वी यादव की पहल पर शहर भर में 1200 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। पर कंट्रोल रूम न होने की वजह हर कैमरे की रिकार्डिंग उसके डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकार्डर) में ही होती थी। पुलिस को जिस जगह के फुटेज की जरूरत होती थी उस सेटअप से डेटा ले लेती थी। कैमरे कम क्षमता वाले थे। साथ ही सिर्फ दस दिनों की रिकार्डिंग होती थी। लापरवाही के कारण न कैमरे अपडेट किए गए, न ही सेटअप ठीक हुआ।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
यहां लगे थे, गायब हो गए
रामादेवी चौराहे, परेड, बड़ा चौराहा, घंटाघर, फूलबाग, चुन्नीगंज, कंपनी बाग में लगे कैमरे गायब हैं। किदवई नगर साइड नंबर एक में मार्बल मार्केट में 20 कैमरे लगे थे। इनमें कुछ ही चल रहे हैं। वो भी व्यापारियों की मेहरबानी पर।
इसलिए नहीं हो सकी देखरेख
सीसीटीवी कैमरे लगाने का अभियान पुलिस ने व्यापारियों के साथ चलाया था। व्यापारियों ने आर्थिक रूप से पूरी मदद की थी। पर, किसी ने इसकी देखरेख की जिम्मेदारी नहीं ली। न पुलिस न व्यापारी। यही वजह थी कि कैमरे खराब और चोरी होते गए।
600 ब्लैक प्वाइंट पर लगने थे 3000 हजार कैमरे
2018 में तत्कालीन एसएसपी अखिलेश मीणा ने शहर में 600 ब्लैक प्वाइंट चिह्नित किए थे। इसमें अपराध बाहुल्य क्षेत्र, भीड़-भाड़ इलाके व प्रमुख चौराहे शामिल थे। इन सभी जगहों पर 3000 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की योजना भी बनाई गई। करीब एक साल बीत गया न बजट मिला न ही किसी ने पहल की। वह भी व्यापारियों के सहयोग से ऐसा करना चाह रहे थे।
रामादेवी चौराहे, परेड, बड़ा चौराहा, घंटाघर, फूलबाग, चुन्नीगंज, कंपनी बाग में लगे कैमरे गायब हैं। किदवई नगर साइड नंबर एक में मार्बल मार्केट में 20 कैमरे लगे थे। इनमें कुछ ही चल रहे हैं। वो भी व्यापारियों की मेहरबानी पर।
इसलिए नहीं हो सकी देखरेख
सीसीटीवी कैमरे लगाने का अभियान पुलिस ने व्यापारियों के साथ चलाया था। व्यापारियों ने आर्थिक रूप से पूरी मदद की थी। पर, किसी ने इसकी देखरेख की जिम्मेदारी नहीं ली। न पुलिस न व्यापारी। यही वजह थी कि कैमरे खराब और चोरी होते गए।
600 ब्लैक प्वाइंट पर लगने थे 3000 हजार कैमरे
2018 में तत्कालीन एसएसपी अखिलेश मीणा ने शहर में 600 ब्लैक प्वाइंट चिह्नित किए थे। इसमें अपराध बाहुल्य क्षेत्र, भीड़-भाड़ इलाके व प्रमुख चौराहे शामिल थे। इन सभी जगहों पर 3000 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की योजना भी बनाई गई। करीब एक साल बीत गया न बजट मिला न ही किसी ने पहल की। वह भी व्यापारियों के सहयोग से ऐसा करना चाह रहे थे।
प्रतीकात्मक तस्वीर
दक्षिण में लगने थे 214 कैमरे
अखिलेश मीणा की योजना के तहत दक्षिण में 214 से अधिक जगहों पर कैमरे लगने थे। यहां पर भी प्रमुख जगहों को चिह्नित कर लिया गया था। इसमें बाबूपुरवा में 17, जूही में 12, किदवई नगर में 19, नजीराबाद में 18, फजलगंज में 29, अर्मापुर में 6, गोविंद नगर में 27, नौबस्ता में 53 व बर्रा में 33 जगहों पर कैमरे लगाए जाने थे, जो लगे ही नहीं।
विधायक निधि की योजना, टेंडर में अटकी
2015 में शहर में विधायक निधि से कैमरे लगाने की योजना बनाई गई थी। इसमें कुल आठ चौराहों को सीसीटीवी कैमरों से लैस करना था। इसमें फूलबाग, जरीब चौकी, यशोदा नगर, शास्त्री चौक, नरौना, बारादेवी, बिल्हौर चौराहा और घाटमपुर शामिल था। इसमें टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। मगर उसके आगे कुछ भी नहीं हो सका था। नतीजतन विधायक निधि में आए 88 लाख रुपए वापस हो गए थे।
अखिलेश मीणा की योजना के तहत दक्षिण में 214 से अधिक जगहों पर कैमरे लगने थे। यहां पर भी प्रमुख जगहों को चिह्नित कर लिया गया था। इसमें बाबूपुरवा में 17, जूही में 12, किदवई नगर में 19, नजीराबाद में 18, फजलगंज में 29, अर्मापुर में 6, गोविंद नगर में 27, नौबस्ता में 53 व बर्रा में 33 जगहों पर कैमरे लगाए जाने थे, जो लगे ही नहीं।
विधायक निधि की योजना, टेंडर में अटकी
2015 में शहर में विधायक निधि से कैमरे लगाने की योजना बनाई गई थी। इसमें कुल आठ चौराहों को सीसीटीवी कैमरों से लैस करना था। इसमें फूलबाग, जरीब चौकी, यशोदा नगर, शास्त्री चौक, नरौना, बारादेवी, बिल्हौर चौराहा और घाटमपुर शामिल था। इसमें टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। मगर उसके आगे कुछ भी नहीं हो सका था। नतीजतन विधायक निधि में आए 88 लाख रुपए वापस हो गए थे।
प्रतीकात्मक तस्वीर
विधायक निधि में इतनी आई थी कैमरों के लिए रकम (2015)
सलिल विश्नोई 15 लाख
इरफान सोलंकी् 15 लाख
अजय कपूर 11 लाख
रघुनंदन भदौरिया 10 लाख
सतीश महाना 10 लाख
अरुणा कोरी 10 लाख
अरुण पाठक 07 लाख
सत्यदेव पचौरी 05 लाख
इंद्रजीत कोरी 05 लाख
सिर्फ 10 चौराहों और थानों की हो रही निगरानी
मौजूदा समय में इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के तहत शहर के दस चौराहों घंटाघर चौराहा, फजलगंज चौराहा, रामादेवी चौराहा, बारादेवी चौराहा, सरसैया घाट चौराहा, चालिस तिराहा, किदवई नगर चौराहा, गोल चौराहा, बड़ा चौराहा और विजय नगर चौराहे पर कैमरे लगे हैं। वहीं मरियमपुर चौराहे पर स्थानीय पुलिस ने व्यापारियों की मदद से कैमरे लगवाए हैं। सजेती थाने को छोड़कर अन्य सभी 43 थानों को सीसीटीवी से लैस किया चुका है। जो सीधे कंट्रोल रूम से जुड़े हुए हैं।
कानपुर के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं दस चौराहों की निगरानी भी सीसीटीवी कैमरों से की जा रही है। बजट के अभाव में पूरे शहर को कैमरों से लैस नहीं किया जा सका है। इस पर काम चल रहा है।
- अनंत देव, एसएसपी
सलिल विश्नोई 15 लाख
इरफान सोलंकी् 15 लाख
अजय कपूर 11 लाख
रघुनंदन भदौरिया 10 लाख
सतीश महाना 10 लाख
अरुणा कोरी 10 लाख
अरुण पाठक 07 लाख
सत्यदेव पचौरी 05 लाख
इंद्रजीत कोरी 05 लाख
सिर्फ 10 चौराहों और थानों की हो रही निगरानी
मौजूदा समय में इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के तहत शहर के दस चौराहों घंटाघर चौराहा, फजलगंज चौराहा, रामादेवी चौराहा, बारादेवी चौराहा, सरसैया घाट चौराहा, चालिस तिराहा, किदवई नगर चौराहा, गोल चौराहा, बड़ा चौराहा और विजय नगर चौराहे पर कैमरे लगे हैं। वहीं मरियमपुर चौराहे पर स्थानीय पुलिस ने व्यापारियों की मदद से कैमरे लगवाए हैं। सजेती थाने को छोड़कर अन्य सभी 43 थानों को सीसीटीवी से लैस किया चुका है। जो सीधे कंट्रोल रूम से जुड़े हुए हैं।
कानपुर के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं दस चौराहों की निगरानी भी सीसीटीवी कैमरों से की जा रही है। बजट के अभाव में पूरे शहर को कैमरों से लैस नहीं किया जा सका है। इस पर काम चल रहा है।
- अनंत देव, एसएसपी