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कानपुर: आदेशों की डोज निगल गए निजी अस्पताल, कोरोना रिपोर्ट होने और पैसों की थाह लेने के बाद ही भर्ती कर रहे मरीज

Mon, 10 May 2021 08:53 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 10 May 2021 08:53 AM IST
सार

जिलाधिकारी ने भी कहा था कि पैसों के अभाव में किसी मरीज को लौटाया न जाए। दोनों ही आदेशों का खुलकर मखौल उड़ाया जा रहा है।

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kanpur coronavirus cases covid 19 pandemic, Private hospital
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शासन-प्रशासन की ओर से मरीजों को राहत पहुंचाने के लिए जारी किए जा रहे आदेश निजी अस्पतालों के ठेंगे पर हैं। कोरोना रिपोर्ट होने के साथ ही रुपये की थाह लेने के बाद ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। रिपोर्ट या पैसा नहीं है तो मरीज जिये या मरे इनकी बला से, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने कोविड अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि पहले मरीज को भर्ती कर इलाज शुरू किया जाए। जांच रिपोर्ट जरूरी नहीं। वहीं जिलाधिकारी ने भी कहा था कि पैसों के अभाव में किसी मरीज को लौटाया न जाए। दोनों ही आदेशों का खुलकर मखौल उड़ाया जा रहा है।
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जवान बेटे को लेकर भटकती रही मां
बर्रा स्थित एक कोविड अस्पताल के बाहर कएक महिला कार में अपने 23 साल के बेटे को लेकर पहुंची। महिला ने गेट पर मौजूद टीम से बेटे का इलाज शुरू करने की गुहार लगाई, लेकिन उसके पास कोरोना रिपोर्ट न होने के कारण डॉक्टरों ने लौटा दिया। महिला के अनुसार रविवार को बेटे को अचानक सांस लेने में समस्या होने लगी थी। घबराकर वे लोग उसे अस्पताल लेकर आए थे।
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समझ नहीं आ रहा, चाचा को लेकर कहां जाएं
स्वरूप नगर के कोविड अस्पताल के बाहर एंबुलेंस से मरीज लेकर पहुंचे युवक ने बताया कि वह अपने चाचा रामतेज को लेकर आया है। उन्हें पिछले कई दिनों से बुखार और खांसी की शिकायत है। शनिवार को कोरोना की जांच के लिए सैंपल दिया है, अभी रिपोर्ट नहीं मिली है। तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल लेकर आए लेकिन पॉजिटिव रिपोर्ट न होने की बात कहकर लौटा दिया। अब समझ नहीं आ रहा, कहां जाएं।
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बड़ी मुश्किलों में भर्ती किया, रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो बदल जाएगा पैकेज
कल्याणपुर आवास विकास तीन के एक निजी कोविड अस्पताल के बाहर खड़ी फजलगंज निवासी राधा ने बताया कि उनके भाई सौरभ की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। उनको पनकी के एक अस्पताल में भर्ती करा दिया है। पिता की भी तबीयत गड़बड़ है। सांस लेने में परेशानी है।

आरटीपीसीआर जांच का सैंपल दिया जा चुका है, रिपोर्ट आनी बाकी है। सुबह से कई अस्पतालों के चक्कर काट चुके हैं। रिपोर्ट न होने की वजह से किसी ने भर्ती नहीं किया। यहां भर्ती तो कर लिया, लेकिन रोजाना 70-80 हजार रुपये की व्यवस्था करने की बात कही है। कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो पैकेज बदल जाएगा।

आधा पैसा जमा किया, डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाए तब मिला बेड
नौबस्ता स्थित एक कोविड अस्पताल में पिता को भर्ती कराने वाले व्यक्ति ने पहचान छिपाने की शर्त पर बताया कि भर्ती करने से पहले डॉक्टर ने 1.50 लाख जमा कराने की शर्त रखी थी। किसी तरह आधी रकम का जुगाड़कर सके। कई मिन्नतें की तब जाकर मरीज को भर्ती किया।

डेढ़ लाख नहीं जमा किए तो बोले आईसीयू खाली नहीं 
गूबा गार्डन के रहने वाले रघुनाथ पाल के भाई सुरेंद्र कुमार (45) कोरोना संक्रमित हैं। शनिवार रात ऑक्सीजन लेवल कम होने लगा। कल्याणपुर स्थित एसपीएम हॉस्पिटल में बेड खाली होने की जानकारी मिली। मरीज लेकर अस्पताल पहुंचे तो बाहर खड़े व्यक्ति ने डेढ़ लाख जमा करने के बाद ही मरीज को भर्ती कराने की बात कही। इतने रुपये न होने की बात कही तो आईसीयू खाली न होने की बात कहकर चला गया।

रिपोर्ट नहीं है तो एक लाख जमा करो
मसवानपुर के रहने वाले धीरेंद्र कुमार ने बताया कि पिता राजकुमार को तीन दिनों से बुखार आ रहा था। रविवार को जब सांस लेने में ज्यादा दिक्कत हुई तो भर्ती कराने के लिए शारदा नगर स्थित फॉर्च्यून अस्पताल पहुंचे। गेट पर बैठे व्यक्ति ने कोरोना रिपोर्ट के विषय में पूछा। रिपोर्ट न होने की जानकारी दी तो एक लाख पहले जमा करने की बात कही। असमर्थता जताने पर कहीं और देख लेने की सलाह देकर चलता कर दिया।

पहचान छिपा रहे तीमारदार
कोविड मरीजों के तीमारदार अखबार वालों से बात करके अपनी समस्या तो बता रहे हैं, लेकिन वह अपनी पहचान छिपाने की बात करते हैं। उनका कहना है कि शहर में हर तरफ मारामारी है। अस्पताल वाले पैसे जरुर ज्यादा ले रहे हैं, लेकिन इलाज तो हो रहा है। अगर अखबार में नाम या फोटो छप जाती है, तो अस्पताल वाले गुस्सा होते हैं। बोलते हैं हमसे तकलीफ है तो किसी दूसरे अस्पताल ले जाओ।  डर भी लगता है कहीं मरीज के साथ कुछ गलत न हो जाए। तीमारदारों ने कहा कि भैया नाम और फोटो मत छापना नहीं तो हमारा मरीज मर जाएगा।
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