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खुशखबरी: देर आए दुरुस्त आए, रेलवे के कोच मरीजों के लिए बनेंगे संजीवनी, पढ़ें पूरी खबर
Fri, 07 May 2021 03:18 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 07 May 2021 03:18 PM IST
सार
अमर उजाला ने गुरुवार को ‘जिंदगी की गाड़ी छूट रही, आइसोलेशन कोच खड़े के खड़े’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस मुद्दे को उठाया था। जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने इस मुद्दे पर कहा था कि उन्हें ऑक्सीजन युक्त बेड की जरूरत है।
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रेलवे का आइसोलेशन कोच
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना संक्रमितों को भर्ती करने के लिए कानपुर में खड़े रेलवे के 25 आइसोलेशन कोचों के इस्तेमाल होने की संभावना बन रही है। 400 बेड वाले इन कोचों में हर बेड पर ऑक्सीजन सिलिंडर लगाने की व्यवस्था है। महाराष्ट्र के कई शहरों में प्लेटफार्म पर खिड़कियों से कूलर लगाकर आइसोलेशन कोच में मरीजों को भर्ती भी किया गया है।
यहां ऑक्सीजन सिलिंडर लगाकर इलाज किया जा रहा है। अमर उजाला ने गुरुवार को ‘जिंदगी की गाड़ी छूट रही, आइसोलेशन कोच खड़े के खड़े’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस मुद्दे को उठाया था। जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने इस मुद्दे पर कहा था कि उन्हें ऑक्सीजन युक्त बेड की जरूरत है। रेलवे के कानपुर सेंट्रल निदेशक हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा कि अन्य जगहों की तरह यहां भी वह जिला प्रशासन के सहयोग से ऑक्सीजन सिलिंडरों की व्यवस्था कराने को तैयार हैं।
संक्रमित मरीज के लिए पूरी तरह फिट हैं कोच
रेलवे के आइसोलेशन कोच में संक्रमित मरीज को भर्ती करके बेहतर तरीके से इलाज किया जा सकता है। ये कोच रेल पटरी पर ही खड़े हो सकते हैं, लिहाजा किसी भी रेलवे स्टेशन पर इसका इस्तेमाल हो सकता है। इसमें दो सीटों के बीच ऑक्सीजन सिलिंडरों को रखने की व्यवस्था है।
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रोगियों के नहाने के लिए बाथरूम और टॉयलेट भी है। पैरामेडिकल स्टाफ के लिए हर कोच में एक केबिन है, जहां से दवाएं आदि दी जाती हैं। महाराष्ट्र के नंदूरबार, पालघर और एमपी के जबलपुर में कोविड केयर कोचों में हर खिड़की पर कूलर है, जिससे मरीजों को गर्मी न लगे। लोहे के कोच होने की वजह से छत पर गीले बोरों को रखकर तापमान कम किया जाता है। उपयोग में आने वाले सभी कोचों को इसी तरह से व्यवस्थित किया जा रहा है, कि मरीजों को दिक्कत न हो।
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यहां ऑक्सीजन सिलिंडर लगाकर इलाज किया जा रहा है। अमर उजाला ने गुरुवार को ‘जिंदगी की गाड़ी छूट रही, आइसोलेशन कोच खड़े के खड़े’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस मुद्दे को उठाया था। जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने इस मुद्दे पर कहा था कि उन्हें ऑक्सीजन युक्त बेड की जरूरत है। रेलवे के कानपुर सेंट्रल निदेशक हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा कि अन्य जगहों की तरह यहां भी वह जिला प्रशासन के सहयोग से ऑक्सीजन सिलिंडरों की व्यवस्था कराने को तैयार हैं।
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संक्रमित मरीज के लिए पूरी तरह फिट हैं कोच
रेलवे के आइसोलेशन कोच में संक्रमित मरीज को भर्ती करके बेहतर तरीके से इलाज किया जा सकता है। ये कोच रेल पटरी पर ही खड़े हो सकते हैं, लिहाजा किसी भी रेलवे स्टेशन पर इसका इस्तेमाल हो सकता है। इसमें दो सीटों के बीच ऑक्सीजन सिलिंडरों को रखने की व्यवस्था है।
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रोगियों के नहाने के लिए बाथरूम और टॉयलेट भी है। पैरामेडिकल स्टाफ के लिए हर कोच में एक केबिन है, जहां से दवाएं आदि दी जाती हैं। महाराष्ट्र के नंदूरबार, पालघर और एमपी के जबलपुर में कोविड केयर कोचों में हर खिड़की पर कूलर है, जिससे मरीजों को गर्मी न लगे। लोहे के कोच होने की वजह से छत पर गीले बोरों को रखकर तापमान कम किया जाता है। उपयोग में आने वाले सभी कोचों को इसी तरह से व्यवस्थित किया जा रहा है, कि मरीजों को दिक्कत न हो।
अनवरगंज और ब्रह्मावर्त स्टेशन हो सकता है बेहतर विकल्प
इन आइसोलेशन कोच के लिए अनवरगंज स्टेशन पर स्थापित करना आसान होगा। क्योंकि यह स्टेशन दिल्ली-हावड़ा रूट पर नहीं है, लिहाजा ट्रैफिक प्रभावित नहीं होगा। वहीं, अनवरगंज स्टेशन से फर्रुखाबाद रेल लाइन के लिए ट्रेन पकड़नी होगी, वह रावतपुर, कल्याणपुर रेलवे स्टेशन से भी आ जा सकता है। इसके अलावा नया बना बिठूर का ब्रह्मावर्त रेलवे स्टेशन भी उपयुक्त होगा।
इन आइसोलेशन कोच के लिए अनवरगंज स्टेशन पर स्थापित करना आसान होगा। क्योंकि यह स्टेशन दिल्ली-हावड़ा रूट पर नहीं है, लिहाजा ट्रैफिक प्रभावित नहीं होगा। वहीं, अनवरगंज स्टेशन से फर्रुखाबाद रेल लाइन के लिए ट्रेन पकड़नी होगी, वह रावतपुर, कल्याणपुर रेलवे स्टेशन से भी आ जा सकता है। इसके अलावा नया बना बिठूर का ब्रह्मावर्त रेलवे स्टेशन भी उपयुक्त होगा।
राज्य सरकार की मांग पर आइसोलेशन कोचों को रेलवे पहुंचाने को तैयार है। जहां ये कोच इलाज के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं, वहां की तर्ज पर कानपुर में भी रेलवे ऑक्सीजन सिलिंडरों की व्यवस्था जिला प्रशासन के सहयोग से कर सकता है। - हिमांशु शेखर उपाध्याय, निदेशक, कानपुर सेंट्रल
रेलवे की ओर से तैयार किए गए आइसोलेशन कोच बेशक बेहतर विकल्प हैं लेकिन हमारे पास नर्सिंग स्टाफ की कमी है। रेलवे अगर अपने डॉक्टर मुहैया कराता है तो जरूर उनके कोचों की सेवाएं ली जाएंगी। फिलहाल दूसरे विकल्पों पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। - डॉ. राजशेखर, कमिश्नर