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ऑक्सीजन संकट और गहराया: उद्योगों को आपूर्ति रोकी, अस्पतालों में ऑक्सीजन की मांग तीन गुना बढ़ी
Mon, 19 Apr 2021 01:51 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 19 Apr 2021 01:51 PM IST
सार
पहले मरीजों को ऑक्सीजन मिले, इस वजह से उद्योगों के लिए आपूर्ति रोक दी गई है। ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाली फर्मों ने खुद ही यह फैसला लिया है।
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ऑक्सीजन सिलिंडर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : iStock
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विस्तार
कानपुर में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह से ऑक्सीजन का संकट दिन पर दिन गहराता जा रहा है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की मांग तीन गुना बढ़ गई है। पहले मरीजों को ऑक्सीजन मिले, इस वजह से उद्योगों के लिए आपूर्ति रोक दी गई है।
ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाली फर्मों ने खुद ही यह फैसला लिया है। आने वाले दिनों में कई तरह के उद्योगों में उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कानपुर में इन दिनों अस्पताल, होम आइसोलेशन वाले मरीजों और उद्योगों को मिलाकर करीब 5000 सिलिंडर रोज चाहिए।
हालात ये हैं कि अस्पतालों में ही सिलेंडरों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में उद्योगों को 80 फीसदी तक आपूर्ति रोकनी पड़ी। माना जा रहा है कि अगले एक दो दिन में उद्योगों को पूरी तरह आपूर्ति रोक दी जाएगी। जिले में ऑक्सीजन की किल्लत से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा है।
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आपूर्ति बढ़ने की गुंजाइश नहीं
कानपुर में ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली पांच इकाइयां हैं। मुरली गैस और हरिओम नाम की फर्में खुद ही अपने प्लांट में ऑक्सीजन बनाती हैं। इन दोनों फर्मों का औसत उत्पादन रोजाना 1000 से 1200 सिलिंडर प्रतिदिन है। एक सिलिंडर में करीब 1200 लीटर ऑक्सीजन आती है।
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ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाली फर्मों ने खुद ही यह फैसला लिया है। आने वाले दिनों में कई तरह के उद्योगों में उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कानपुर में इन दिनों अस्पताल, होम आइसोलेशन वाले मरीजों और उद्योगों को मिलाकर करीब 5000 सिलिंडर रोज चाहिए।
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हालात ये हैं कि अस्पतालों में ही सिलेंडरों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में उद्योगों को 80 फीसदी तक आपूर्ति रोकनी पड़ी। माना जा रहा है कि अगले एक दो दिन में उद्योगों को पूरी तरह आपूर्ति रोक दी जाएगी। जिले में ऑक्सीजन की किल्लत से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा है।
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आपूर्ति बढ़ने की गुंजाइश नहीं
कानपुर में ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली पांच इकाइयां हैं। मुरली गैस और हरिओम नाम की फर्में खुद ही अपने प्लांट में ऑक्सीजन बनाती हैं। इन दोनों फर्मों का औसत उत्पादन रोजाना 1000 से 1200 सिलिंडर प्रतिदिन है। एक सिलिंडर में करीब 1200 लीटर ऑक्सीजन आती है।
ये दोनों फर्में अपने प्लांट की क्षमता के मुताबिक भरपूर उत्पादन कर रही हैं। इस वजह से अब उत्पादन बढ़ने की कोई गुंजाइश नहीं है। पनकी ऑक्सीजन, बब्बर ऑक्सीजन और भाव्या ऑक्सीजन अन्य राज्यों से ऑक्सीजन के टैंक मंगाकर यहां सिलिंडर भरते हैं। इनकी औसत आपूर्ति रोजाना 800 से 1000 सिलेंडरों की है।
यानी शहर में रोजाना करीब 5000 ऑक्सीजन के सिलिंडर तैयार होते हैं। चूंकि बाहरी राज्यों में भी ऑक्सीजन की कमी है, इस वजह से यहां आपूर्ति बढ़ने की कोई गुंजाइश नहीं। मुरली गैस के अजय मिश्रा बताते हैं कि उनके प्लांट भरपूर क्षमता से उत्पादन कर रहे हैं। प्लांट की क्षमता बढ़ाना तत्काल संभव नहीं है।
जिले में उत्पादन 5000 सिलिंडर ऑक्सीजन
- आसपास के 12 से 15 जिलों को होती है आपूर्ति
- कोरोना काल में कुल मांग 11 से 12 हजार सिलिंडर
- सामान्य दिनों में शहर के अस्पतालों में खपत 1000 सिलिंडर
- कोरोना काल में शहर के अस्पतालों और घरों में कुल खपत 4000 सिलिंडर
इन उद्योगों को होती है आपूर्ति
कानपुर में सबसे ज्यादा सरिया निर्माण इकाइयों, लोहे का कारोबार करने वाली इकाइयों व वेल्डिंग का काम करने वालों के अलावा कुछेक अन्य उद्योगों को रोजाना 2000 से 25000 ऑक्सीजन सिलिंडरों की जरूरत होती है।
यानी शहर में रोजाना करीब 5000 ऑक्सीजन के सिलिंडर तैयार होते हैं। चूंकि बाहरी राज्यों में भी ऑक्सीजन की कमी है, इस वजह से यहां आपूर्ति बढ़ने की कोई गुंजाइश नहीं। मुरली गैस के अजय मिश्रा बताते हैं कि उनके प्लांट भरपूर क्षमता से उत्पादन कर रहे हैं। प्लांट की क्षमता बढ़ाना तत्काल संभव नहीं है।
जिले में उत्पादन 5000 सिलिंडर ऑक्सीजन
- आसपास के 12 से 15 जिलों को होती है आपूर्ति
- कोरोना काल में कुल मांग 11 से 12 हजार सिलिंडर
- सामान्य दिनों में शहर के अस्पतालों में खपत 1000 सिलिंडर
- कोरोना काल में शहर के अस्पतालों और घरों में कुल खपत 4000 सिलिंडर
इन उद्योगों को होती है आपूर्ति
कानपुर में सबसे ज्यादा सरिया निर्माण इकाइयों, लोहे का कारोबार करने वाली इकाइयों व वेल्डिंग का काम करने वालों के अलावा कुछेक अन्य उद्योगों को रोजाना 2000 से 25000 ऑक्सीजन सिलिंडरों की जरूरत होती है।