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ऑक्सीजन की कालाबाजारी: एक दिन की 'सांसों' की कीमत 50 हजार रुपये, अवैध नर्सिंग होम्स में सौदेबाजी
Fri, 07 May 2021 09:07 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 07 May 2021 09:07 AM IST
सार
कानपुर में डेढ़ सौ अवैध नर्सिंग होम्स को सीएमओ की टीम ने चिह्नित किया है। सीएमओ कार्यालय 75 से अधिक नर्सिंग होम्स का पंजीकरण मानक पूरे न होने की वजह से ऑनलाइन निरस्त कर चुका है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कानपुर के सरहदी इलाकों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में चल रहे अवैध नर्सिंग होम्स में सांसों की कालाबाजारी चल रही है। एक-एक, दो-दो कमरों में चल रहे इन नर्सिंग होम्स में सिर्फ ऑक्सीजन के लिए रोगियों को भर्ती किया जा रहा है। रोगियों की जांच भी नहीं कराई जाती।
हालत गंभीर हो जाती है, तो हैलट और उर्सला भेज दिया जाता है। इनमें बहुत से रोगी कोविड पॉजिटिव भी निकलते हैं। ये नर्सिंग होम एक दिन का 50-50 हजार रुपये मरीजों से वसूल रहे हैं। शहर में डेढ़ सौ अवैध नर्सिंग होम्स को सीएमओ की टीम ने चिह्नित किया है।
सीएमओ कार्यालय 75 से अधिक नर्सिंग होम्स का पंजीकरण मानक पूरे न होने की वजह से ऑनलाइन निरस्त कर चुका है। ये सभी अवैध की श्रेणी में हैं। इसके बाद भी कई ‘कमरा नर्सिंग होम’ खर्चा पानी देकर चला करते हैं। महामारी आने से इनकी चांदी हो गई है।
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होम आइसोलेशन के रोगियों को सिलिंडर मिलने में मुश्किल है। इसके साथ ही कोविड अस्पताल फुल हैं। इस स्थिति का ये नर्सिंग होम फायदा उठा रहे हैं। ऑक्सीजन की किल्लत के चलते पीड़ित अवैध नर्सिंग होम्स के चंगुल में फंस जा रहे हैं।
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हालत गंभीर हो जाती है, तो हैलट और उर्सला भेज दिया जाता है। इनमें बहुत से रोगी कोविड पॉजिटिव भी निकलते हैं। ये नर्सिंग होम एक दिन का 50-50 हजार रुपये मरीजों से वसूल रहे हैं। शहर में डेढ़ सौ अवैध नर्सिंग होम्स को सीएमओ की टीम ने चिह्नित किया है।
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सीएमओ कार्यालय 75 से अधिक नर्सिंग होम्स का पंजीकरण मानक पूरे न होने की वजह से ऑनलाइन निरस्त कर चुका है। ये सभी अवैध की श्रेणी में हैं। इसके बाद भी कई ‘कमरा नर्सिंग होम’ खर्चा पानी देकर चला करते हैं। महामारी आने से इनकी चांदी हो गई है।
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होम आइसोलेशन के रोगियों को सिलिंडर मिलने में मुश्किल है। इसके साथ ही कोविड अस्पताल फुल हैं। इस स्थिति का ये नर्सिंग होम फायदा उठा रहे हैं। ऑक्सीजन की किल्लत के चलते पीड़ित अवैध नर्सिंग होम्स के चंगुल में फंस जा रहे हैं।
नर्सिंग होम वाले सिर्फ ऑक्सीजन देने के लिए भर्ती करते हैं। यह नहीं देखा जाता कि रोगी कोरोना पॉजिटिव है या निगेटिव। जब रोगी का ऑक्सीजन लेवल 40-50 आ जाता है तो उसे हैलट और उर्सला भेज देते हैं। सवाल यह है कि जब कोविड अस्पतालों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही और आइसोलेशन के रोगियों के तीमारदार भटक रहे हैं तो ये अवैध नर्सिंग होम्स ऑक्सीजन सिलिंडर कहां से पा रहे हैं? इन पर अभी किसी स्तर से निगाह नहीं रखी जा रही है। रोगियों को नुकसान यह हो रहा है कि अंजाने में उनकी जेब भी खाली हो जाती है और मौत के मुंह में भी चले जाते हैं।
केस-एक
बर्रा बाईपास स्थित एक नर्सिंग होम में घाटमपुर के 51 साल के रोगी भर्ती किया गया। रोगी की सांस में तकलीफ थी। परिजनों ने बताया कि उसे ऑक्सीजन लगाई जाती रही। एक दिन के 50 हजार रुपये लिए गए। रोगी की मौत हो गई। बाद में रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी।
केस-दो
नौबस्ता के एक नर्सिंग होम में किदवईनगर के रोगी को दो दिन तक भर्ती रखा गया। सपोर्ट के बाद भी जब ऑक्सीजन लेवल नहीं बढ़ा तो उसे उर्सला भेज दिया गया। उसकी कोरोना जांच भी नहीं कराई गई थी। उपचार के दौरान रोगी की मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि एक दिन का 65 हजार रुपये लिया गया।
केस-एक
बर्रा बाईपास स्थित एक नर्सिंग होम में घाटमपुर के 51 साल के रोगी भर्ती किया गया। रोगी की सांस में तकलीफ थी। परिजनों ने बताया कि उसे ऑक्सीजन लगाई जाती रही। एक दिन के 50 हजार रुपये लिए गए। रोगी की मौत हो गई। बाद में रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी।
केस-दो
नौबस्ता के एक नर्सिंग होम में किदवईनगर के रोगी को दो दिन तक भर्ती रखा गया। सपोर्ट के बाद भी जब ऑक्सीजन लेवल नहीं बढ़ा तो उसे उर्सला भेज दिया गया। उसकी कोरोना जांच भी नहीं कराई गई थी। उपचार के दौरान रोगी की मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि एक दिन का 65 हजार रुपये लिया गया।
केस-तीन
हैलट में गोविंदनगर की 56 साल की महिला को रात दो बजे लाया गया। उसका ऑक्सीजन 40 रहा। रोगी का उपचार शुरू किया गया। तब तक उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना था कि नर्सिंग होम के डॉक्टर ने कहा कि अब ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं, वेंटिलेटर से काम चल पाएगा।
बहुत से रोगी गंभीर स्थिति में आ रहे हैं। बताते हैं कि वह किसी मोहल्ले के नर्सिंग होम में रहे हैं। हालत खराब होती है तब अस्पताल आ रहे हैं।- डॉ. शैलेंद्र तिवारी, इमरजेंसी प्रभारी उर्सला
रोगी 30 और 40 आक्सीजन लेवल पर आते हैं। बहुत खराब स्थिति होती है। जांच में फेफड़े सफेद निकलते हैं। नर्सिंग होम्स से देर में आने के कारण बचाना मुश्किल हो जाता है।- डॉ. आरबी कमल, प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
हैलट में गोविंदनगर की 56 साल की महिला को रात दो बजे लाया गया। उसका ऑक्सीजन 40 रहा। रोगी का उपचार शुरू किया गया। तब तक उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना था कि नर्सिंग होम के डॉक्टर ने कहा कि अब ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं, वेंटिलेटर से काम चल पाएगा।
बहुत से रोगी गंभीर स्थिति में आ रहे हैं। बताते हैं कि वह किसी मोहल्ले के नर्सिंग होम में रहे हैं। हालत खराब होती है तब अस्पताल आ रहे हैं।- डॉ. शैलेंद्र तिवारी, इमरजेंसी प्रभारी उर्सला
रोगी 30 और 40 आक्सीजन लेवल पर आते हैं। बहुत खराब स्थिति होती है। जांच में फेफड़े सफेद निकलते हैं। नर्सिंग होम्स से देर में आने के कारण बचाना मुश्किल हो जाता है।- डॉ. आरबी कमल, प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज