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कानपुर: हैलट में घिसट रहा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट, अजीब है वार्ड-50 की कहानी
Tue, 11 May 2021 12:45 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 11 May 2021 12:45 PM IST
सार
50 कमरों वाला यह वार्ड शुरू हो जाता तो कोरोना काल में कम से कम 100 मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था रहती। हैलट परिसर स्थित वार्ड-50 की कहानी बड़ी अजीब है।
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हैलट अस्पताल
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कोरोना की दूसरी लहर में हायतौबा मची है। तीसरी लहर और खतरनाक बताई जा रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सुविधाएं बढ़ाने के लिए जरा भी गंभीर नजर नहीं आ रहा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का ड्रीम प्रोजेक्ट हैलट का वार्ड-50 तीन साल बाद भी चालू नहीं कराया जा सका है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री बनते ही इसे शुरू कराने की पहल की थी।
उसके बाद प्रस्ताव दर प्रस्ताव भेजे जाते रहे, पिछले साल 17 करोड़ रुपये भी मिले, लेकिन वार्ड का ताला नहीं खुल सका। 50 कमरों वाला यह वार्ड शुरू हो जाता तो कोरोना काल में कम से कम 100 मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था रहती। हैलट परिसर स्थित वार्ड-50 की कहानी बड़ी अजीब है।
अच्छे-खासे वार्ड को 20 साल पहले बंद कर दिया गया था। प्राइवेट अस्पतालों से भी अच्छे किसी होटल के सुईट की तरह इसके कमरे थे। चार्ज भी बहुत कम लिया जाता था। सेवानिवृत्त डॉक्टर नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि नर्सिंगहोमों के चक्कर में यह वार्ड बंद हुआ था।
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कम पैसों में ज्यादा सुविधाओं की वजह से लोग इसे ही पसंद करते थे। इसके कमरे इतने बड़े हैं कि एक साथ दो मरीजों को भर्ती किया जा सकता है। लेकिन, जब भी इसे शुरू कराने की कोशिश हुई तो अड़ंगा लगा दिया गया। डॉ. हर्षवर्धन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पुरातन छात्र हैं।
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उसके बाद प्रस्ताव दर प्रस्ताव भेजे जाते रहे, पिछले साल 17 करोड़ रुपये भी मिले, लेकिन वार्ड का ताला नहीं खुल सका। 50 कमरों वाला यह वार्ड शुरू हो जाता तो कोरोना काल में कम से कम 100 मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था रहती। हैलट परिसर स्थित वार्ड-50 की कहानी बड़ी अजीब है।
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अच्छे-खासे वार्ड को 20 साल पहले बंद कर दिया गया था। प्राइवेट अस्पतालों से भी अच्छे किसी होटल के सुईट की तरह इसके कमरे थे। चार्ज भी बहुत कम लिया जाता था। सेवानिवृत्त डॉक्टर नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि नर्सिंगहोमों के चक्कर में यह वार्ड बंद हुआ था।
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कम पैसों में ज्यादा सुविधाओं की वजह से लोग इसे ही पसंद करते थे। इसके कमरे इतने बड़े हैं कि एक साथ दो मरीजों को भर्ती किया जा सकता है। लेकिन, जब भी इसे शुरू कराने की कोशिश हुई तो अड़ंगा लगा दिया गया। डॉ. हर्षवर्धन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पुरातन छात्र हैं।
केंद्रीय मंत्री बनने के बाद उन्होंने वार्ड-50 के लिए प्रस्ताव तैयार करवाया। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने बताया कि डॉ. हर्षवर्धन की पहल पर ही निर्माण निगम से प्रस्ताव बनवाया गया था। कॉलेज की ओर से प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं बरती।
तीन साल में रिनोवेशन के छह प्रस्ताव
डॉ. आरती लालचंदानी का कहना है कि उनके कार्यकाल में रिनोवेशन के लिए छह प्रस्ताव भेजे गए। इसके साथ ही नए सिरे से बनाने का प्रस्ताव और डीपीआर भी भेजी गई। रिनोवेशन के लिए 12 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था।
बहुत कुछ करने को नहीं, फिर भी देरी
बालकनी, बाथरूम जैसी सर्व सुविधाओं से युक्त वार्ड-50 को चालू करने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं है। साफ-सफाई कराने के साथ ही रिनोवेशन कराकर इसे इस्तेमाल में लाया जा सकता है। दिसंबर में 17 करोड़ रुपये रिनोवेशन के नाम पर मिल भी चुके हैं, लेकिन चार माह बाद भी स्थिति वहीं की वहीं है।
तीन साल में रिनोवेशन के छह प्रस्ताव
डॉ. आरती लालचंदानी का कहना है कि उनके कार्यकाल में रिनोवेशन के लिए छह प्रस्ताव भेजे गए। इसके साथ ही नए सिरे से बनाने का प्रस्ताव और डीपीआर भी भेजी गई। रिनोवेशन के लिए 12 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था।
बहुत कुछ करने को नहीं, फिर भी देरी
बालकनी, बाथरूम जैसी सर्व सुविधाओं से युक्त वार्ड-50 को चालू करने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं है। साफ-सफाई कराने के साथ ही रिनोवेशन कराकर इसे इस्तेमाल में लाया जा सकता है। दिसंबर में 17 करोड़ रुपये रिनोवेशन के नाम पर मिल भी चुके हैं, लेकिन चार माह बाद भी स्थिति वहीं की वहीं है।
वार्ड-50 के रिनोवेशन का काम शुरू हो गया है। छत वगैैरह कराई जा रही है। इसमें सेंट्रल ऑक्सीजन पाइप लाइन भी बिछवाएंगे। यह बहुत शानदार प्राइवेट वार्ड बनेगा। इसे जल्दी से जल्दी तैयार किया जाएगा।- डॉ. आरबी कमल, प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कालेज