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यूपी: कोरोना निगेटिव होने के बाद भी खराब आ रही एक्सरे रिपोर्ट, बार-बार गंभीर होने वाले रोगियों की होगी ये जांच
Wed, 26 May 2021 06:38 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 26 May 2021 06:38 PM IST
सार
विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाइट फंगस से संक्रमित फेफड़ों की एक्सरे रिपोर्ट उसी तरह आती है, जैसे कोरोना न्यूमोनाइटिस की होती है। कोरोना को हरा चुके रोगियों में बहुतों की स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है। कई रोगी अभी भी ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं और कुछ की तकलीफ बढ़ गई है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कोरोना को हराने के बाद बार-बार गंभीर हो रहे रोगियों में व्हाइट फंगस की जांच की जाएगी। कुछ रोगी कोरोना से ठीक हो गए और चार-पांच दिन के बाद जब उनका एक्सरे कराया गया तो रिपोर्ट पहले जैसी आई। ऐसे रोगियों के व्हाइट फंगस संक्रमित होने का शक किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाइट फंगस से संक्रमित फेफड़ों की एक्सरे रिपोर्ट उसी तरह आती है, जैसे कोरोना न्यूमोनाइटिस की होती है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल ने बताया कि कोविड अस्पतालों में भर्ती रोगियों की एक बार फंगस की भी जांच कराई जाएगी।
कोरोना को हरा चुके रोगियों में बहुतों की स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है। कई रोगी अभी भी ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं और कुछ की तकलीफ बढ़ गई है। इनका नॉन कोविड अस्पतालों में अलग-अलग विशेषज्ञ इलाज कर रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत सांस की है।
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कोरोना निगेटिव होने के बाद रोगियों के फेफड़ों में अभी भी निमोनिया के धब्बे आ रहे हैं। शक किया जा रहा कि ये व्हाइट फंगस के संक्रमण की चपेट में हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाइट फंगस जीभ पर लग जाता है। गालों और मसूढ़ों में भी लग जाती है। इसके बाद खून में मिलकर शरीर के अन्य अंगों में चली जाती है।
सीनियर फिजीशियन डॉ. प्रेम सिंह के मुताबिक अमूमन स्टेरॉयड के बाद फंगल संक्रमण का अंदेशा रहता है। बीते साल कोरोना लहर में दूसरे शहरों मे फंगल संक्रमण के रोगी मिले थे, उस आधार पर इस बार एक दवा नुस्खे में इसकी भी शामिल कर दी गई है। इसी तरह नारायणा मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में रोगियों को कोरोना की दवाओं के साथ फंगल संक्रमण की भी दवा दी गई।
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विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाइट फंगस से संक्रमित फेफड़ों की एक्सरे रिपोर्ट उसी तरह आती है, जैसे कोरोना न्यूमोनाइटिस की होती है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल ने बताया कि कोविड अस्पतालों में भर्ती रोगियों की एक बार फंगस की भी जांच कराई जाएगी।
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कोरोना को हरा चुके रोगियों में बहुतों की स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है। कई रोगी अभी भी ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं और कुछ की तकलीफ बढ़ गई है। इनका नॉन कोविड अस्पतालों में अलग-अलग विशेषज्ञ इलाज कर रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत सांस की है।
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कोरोना निगेटिव होने के बाद रोगियों के फेफड़ों में अभी भी निमोनिया के धब्बे आ रहे हैं। शक किया जा रहा कि ये व्हाइट फंगस के संक्रमण की चपेट में हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाइट फंगस जीभ पर लग जाता है। गालों और मसूढ़ों में भी लग जाती है। इसके बाद खून में मिलकर शरीर के अन्य अंगों में चली जाती है।
सीनियर फिजीशियन डॉ. प्रेम सिंह के मुताबिक अमूमन स्टेरॉयड के बाद फंगल संक्रमण का अंदेशा रहता है। बीते साल कोरोना लहर में दूसरे शहरों मे फंगल संक्रमण के रोगी मिले थे, उस आधार पर इस बार एक दवा नुस्खे में इसकी भी शामिल कर दी गई है। इसी तरह नारायणा मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में रोगियों को कोरोना की दवाओं के साथ फंगल संक्रमण की भी दवा दी गई।