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मुसीबत: कोरोना से बचे तो डायरिया और निमोनिया से मरे मासूम, दो माह में 200 बच्चों की मौत
Thu, 27 May 2021 10:02 AM IST
शिखा पांडेय
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 27 May 2021 10:02 AM IST
सार
कानपुर में कोरोना काल के दौरान टीके न लग पाने की वजह से बच्चे निमोनिया, इंसेफलाइटिस, मेनिनजाइटिस जैसी बीमारियों की चपेट में आए। कोविड से तो नहीं लेकिन दूसरी बीमारियों से कई बच्चों की जान चली गई।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कोरोना का यह दौर मासूम बच्चों के लिए भी काल बनकर आया। टीकाकरण अभियान ठप रहने से दूसरी बीमारियों की चपेट में आकर दो माह में 200 बच्चों की मौत हो गई। स्वास्थ्य महकमे में इन मौतों का आंकड़ा कहीं दर्ज नहीं है, लेकिन अस्पतालों के विशेषज्ञों की बातचीत में यह जानकारी सामने आई है।
सबसे ज्यादा निमोनिया और इसके बाद डायरिया से बच्चों की मौत हुई है। इसके अलावा वायरल इंसेफलाइटिस, ट्युबरकुलर मेनिनजाइटिस की भी चपेट में बच्चे आए। दरअसल, जीरो से पांच साल तक के करीब सवा लाख बच्चों को 12 तरह की बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान चलना था।
कोरोना की दूसरी लहर की वजह से अभियान नहीं चल सका। इस वजह से बच्चे बीमारियों की चपेट में आने लगे। हैलट के बालरोग अस्पताल में कोरोना काल में इंसेफलाइटिस, मेनिनजाइटिस, डायरिया, निमोनिया आदि बीमारियों के रोगी भर्ती हुए। शहर के अन्य अस्पतालों में भी ऐसे बाल मरीज पहुंचे।
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कई परिवार वाले तो डॉक्टरों के निर्देशन में घर में ही बच्चों का इलाज करते रहे। डॉक्टरों के मुताबिक जो बच्चे रोग बढ़ने के बाद अस्पतालों में पहुंचे, उनकी जान बचाना मुश्किल रहा। कुछ बच्चों की घर पर भी मौत हुई। कोरोना काल में कई अस्पतालों को कोविड स्टेटस मिलने की वजह से नॉन कोविड रोगियों की तरह बच्चों को भी भर्ती करने में मुश्किल हुई थी। डॉक्टरों के मुताबिक समय से टीके लग जाते तो बच्चों को बीमार पड़ने से बचाया जा सकता था।
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सबसे ज्यादा निमोनिया और इसके बाद डायरिया से बच्चों की मौत हुई है। इसके अलावा वायरल इंसेफलाइटिस, ट्युबरकुलर मेनिनजाइटिस की भी चपेट में बच्चे आए। दरअसल, जीरो से पांच साल तक के करीब सवा लाख बच्चों को 12 तरह की बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान चलना था।
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कोरोना की दूसरी लहर की वजह से अभियान नहीं चल सका। इस वजह से बच्चे बीमारियों की चपेट में आने लगे। हैलट के बालरोग अस्पताल में कोरोना काल में इंसेफलाइटिस, मेनिनजाइटिस, डायरिया, निमोनिया आदि बीमारियों के रोगी भर्ती हुए। शहर के अन्य अस्पतालों में भी ऐसे बाल मरीज पहुंचे।
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कई परिवार वाले तो डॉक्टरों के निर्देशन में घर में ही बच्चों का इलाज करते रहे। डॉक्टरों के मुताबिक जो बच्चे रोग बढ़ने के बाद अस्पतालों में पहुंचे, उनकी जान बचाना मुश्किल रहा। कुछ बच्चों की घर पर भी मौत हुई। कोरोना काल में कई अस्पतालों को कोविड स्टेटस मिलने की वजह से नॉन कोविड रोगियों की तरह बच्चों को भी भर्ती करने में मुश्किल हुई थी। डॉक्टरों के मुताबिक समय से टीके लग जाते तो बच्चों को बीमार पड़ने से बचाया जा सकता था।
इन बीमारियों के लगते हैं टीके
टीबी, रोटा वायरस, पोलियो, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, काली खांसी, न्युमोकोकस निमोनिया, हीमोप्लस इनफ्लेंजी टाइप बी (निमोनिया), खसरा, जापानी इंसेफलाइटिस, टिटनेस, रूबैला।
मौत का आंकड़ा
निमोनिया- 40 रोगी
डायरिया- 25 रोगी
इंफ्लेेंजी टाइप बी- 35
वायरल इंसेफलाइटिस- 25
मेनिनजाइटिस- 21
टीबी- 13
डिप्थीरिया- 05
काली खांसी- 10
अन्य बीमारियां- 26
(मौतों का यह आंकड़ा डॉक्टरों के आकलन के आधार पर है, यह संख्या ज्यादा भी हो सकती है)
कोरोना की वजह से अन्य बीमारियों को टीकाकरण अभियान बंद हुआ। टीका लगाने वाला स्टाफ इधर कोरोना ड्यूटी और वैक्सीनेशन में लग गया। कोरोना की दूसरी लहर धीमी पड़ी है। बहुत जल्दी बच्चों को टीके लगा दिए जाएंगे।- डॉ. नेपाल सिंह, सीएमओ
कोरोना काल के दौरान टीकाकरण बंद नहीं किया गया। बुधवार और शनिवार टीकाकरण दिन निश्चित रहे हैं। -डॉ. जीके मिश्रा, अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
टीबी, रोटा वायरस, पोलियो, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, काली खांसी, न्युमोकोकस निमोनिया, हीमोप्लस इनफ्लेंजी टाइप बी (निमोनिया), खसरा, जापानी इंसेफलाइटिस, टिटनेस, रूबैला।
मौत का आंकड़ा
निमोनिया- 40 रोगी
डायरिया- 25 रोगी
इंफ्लेेंजी टाइप बी- 35
वायरल इंसेफलाइटिस- 25
मेनिनजाइटिस- 21
टीबी- 13
डिप्थीरिया- 05
काली खांसी- 10
अन्य बीमारियां- 26
(मौतों का यह आंकड़ा डॉक्टरों के आकलन के आधार पर है, यह संख्या ज्यादा भी हो सकती है)
कोरोना की वजह से अन्य बीमारियों को टीकाकरण अभियान बंद हुआ। टीका लगाने वाला स्टाफ इधर कोरोना ड्यूटी और वैक्सीनेशन में लग गया। कोरोना की दूसरी लहर धीमी पड़ी है। बहुत जल्दी बच्चों को टीके लगा दिए जाएंगे।- डॉ. नेपाल सिंह, सीएमओ
कोरोना काल के दौरान टीकाकरण बंद नहीं किया गया। बुधवार और शनिवार टीकाकरण दिन निश्चित रहे हैं। -डॉ. जीके मिश्रा, अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण