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कार्डियोलॉजी में रैपिड कार्ड से कोरोना की जांच के बाद होगा इलाज, पॉजिटिव आने पर हैलट होंगे रेफर
Tue, 21 Apr 2020 11:35 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 21 Apr 2020 11:35 PM IST
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कोरोना वायरस
- फोटो : PTI
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कानपुर के हृदय रोग संस्थान में आने वाले मरीजों का इलाज रैपिड कार्ड से जांच के बाद किया जाएगा। दो पुराने हृदय रोगियों की कोरोना संक्रमण से मौत के बाद अब तय हुआ है कि कार्डियोलॉजी की इमरजेंसी में आने वाले सभी हृदय रोगियों की पहले रैपिड कार्ड से जांच की जाएगी।
अगर उनमें कोरोना पॉजीटिव के संकेत मिलेंगे तो उन्हें फौरन हैलट रेफर किया जाएगा जो हृदय रोगी कोरोना निगेटिव होंगे उन्हीं का इमरजेंसी में इलाज किया जाएगा। एलपीएस कार्डियोलॉजी संस्थान की इमरजेंसी मेें रोज औसतन 70 हृदय रोगी इलाज के लिए आते हैं।
हार्ट अटैक में सांस लेने में दिक्कत आने की शिकायत होती है। कार्डियोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर डॉ. विनय कृष्ण ने बताया कि इस संबंध में मंगलवार को वीडियो कॉंफ्रेंसिंग में भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि कोरोना संक्रमित हृदय रोगी को इलाज के लिए हैलट शिफ्ट कर दिया जाए।
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उन्होंने बताया कि इमरजेंसी में आने वाले रोगियों की रैपिड कार्ड से जांच होगी। इसका परिणाम जल्द ही आ जाएगा। उन्होंने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल के तहत संक्रमित रोगी के आने पर तुरंत कक्ष को सैनिटाइज करना जरूरी है। इसके साथ ही एयर एक्सचेंज भी जरूरी है ताकि वायरस और प्रभावी न हो सके। इन्हीं सब वजहों से इमरजेंसी का कक्ष बदल दिया गया है।
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अगर उनमें कोरोना पॉजीटिव के संकेत मिलेंगे तो उन्हें फौरन हैलट रेफर किया जाएगा जो हृदय रोगी कोरोना निगेटिव होंगे उन्हीं का इमरजेंसी में इलाज किया जाएगा। एलपीएस कार्डियोलॉजी संस्थान की इमरजेंसी मेें रोज औसतन 70 हृदय रोगी इलाज के लिए आते हैं।
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हार्ट अटैक में सांस लेने में दिक्कत आने की शिकायत होती है। कार्डियोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर डॉ. विनय कृष्ण ने बताया कि इस संबंध में मंगलवार को वीडियो कॉंफ्रेंसिंग में भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि कोरोना संक्रमित हृदय रोगी को इलाज के लिए हैलट शिफ्ट कर दिया जाए।
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उन्होंने बताया कि इमरजेंसी में आने वाले रोगियों की रैपिड कार्ड से जांच होगी। इसका परिणाम जल्द ही आ जाएगा। उन्होंने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल के तहत संक्रमित रोगी के आने पर तुरंत कक्ष को सैनिटाइज करना जरूरी है। इसके साथ ही एयर एक्सचेंज भी जरूरी है ताकि वायरस और प्रभावी न हो सके। इन्हीं सब वजहों से इमरजेंसी का कक्ष बदल दिया गया है।