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Kanpur: रेत खाते में दर्ज जमीन पर लिया 46 लाख का मुआवजा, गंगा किनारे कटरी की 38 हेक्टेयर जमीन हड़पी, पढ़ें मामला

Fri, 13 Jun 2025 11:51 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 13 Jun 2025 11:51 AM IST
सार

Kanpur News: मामले में जिलाधिकारी ने बताया कि सरकारी जमीन रेत खाते में दर्ज की गई है। तत्कालीन समय में गलत तरीके से सरकारी जमीन पर लोगों के नाम दर्ज किया गया था। उस पर मुआवजा भी ले लिया था। अब मुआवजा वसूली की कार्रवाई होगी। 

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Kanpur Compensation of 46 lakhs taken on land registered in sand account 38 hectares of land grabbed
मनोहर नगर गंगा कटरी क्षेत्र में बंधा बनाने का होता कार्य - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में गंगा किनारे कटरी शंकरपुर सराय की 38 हेक्टेयर जमीन को सरकारी अभिलेखों में हेरफेर कर हड़प लिया गया। वर्ष 2003 में जब गंगा बैराज की सड़क बनाने के लिए 12 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हुआ तो सरकारी जमीन पर ही करीब 46 लाख का मुआवजा भी ले लिया। सहायक अभिलेख अधिकारी उन्नाव ने मामले की जांच की, तो पता चला कि कागजों में हेरफेर कर रेत खाते में दर्ज जमीन पर नाम चढ़वाकर यह कारनामा किया गया।

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सहायक अभिलेख अधिकारी कानपुर/उन्नाव प्रशांत कुमार नायक ने बताया कि कटरी शंकरपुर सराय की 38 हेक्टेयर जमीन की पैमाइश कराने का वाद वर्ष 2024 में एसडीएम कोर्ट में दाखिल हुआ था। जांच की गई तो पता चला कि यह जमीन मिन जुमला नंबर (जिसमें कई खातेदार होते) है। इसी वजह से जमीन का पहले बंटवारा करने के लिए एसडीएम ने अपनी कोर्ट से वाद खारिज कर दिया था। वादी ने हाईकोर्ट जाकर रिट दायर की।

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Kanpur Compensation of 46 lakhs taken on land registered in sand account 38 hectares of land grabbed
जाजमऊ चंदन घाट पर होती कटान - फोटो : amar ujala

खाता संख्या 1356 और 1359 में वादी का नाम ही नहीं
फिर मामले के निस्तारण करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद मामले की जांच उन्हें सौंपी गई। जांच में पता चला कि 2003 में गंगा बैराज का संपर्क मार्ग बनने के चलते 12 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया। बदले में सुषमा देवी और अभिनव को करीब 46 लाख रुपये जमीन का मुआवजा दिया गया। अब जब जांच हुई, तो पता खाता संख्या 1356 और 1359 में वादी का नाम ही नहीं था। जमीन सरकारी भूमि के रूप में रेत के नाम पर दर्ज थी।

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गंगा कटरी का इलाका - फोटो : amar ujala

जांच करने के लिए एसआईटी को भी लिखा
सरकारी दस्तावेजों में फर्जी तरीके से बिना किसी वरासत और रजिस्ट्री के आशीष नारायण का नाम जमीन पर दर्ज किया गया। आशीष की मृत्यु होने के बाद जमीन उनकी पत्नी सुषमा देवी और बेटे अभिनव कुमार के नाम पर दर्ज हो गई। मामले की जांच पूरी होने के बाद सहायक अभिलेख अधिकारी ने सभी के नाम हटाकर जमीन रेत खाते में दर्ज की गई। मामले की सही तरह से जांच करने के लिए एसआईटी को भी लिखा गया है।

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Kanpur Compensation of 46 lakhs taken on land registered in sand account 38 hectares of land grabbed
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह - फोटो : अमर उजाला

सरकारी जमीन रेत खाते में दर्ज की गई है। तत्कालीन समय में गलत तरीके से सरकारी जमीन पर लोगों के नाम दर्ज किया गया था। उस पर मुआवजा भी ले लिया था। अब मुआवजा वसूली की कार्रवाई होगी।  -जितेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी

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