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Kanpur: गन्ना रस के कचरे से बनाई सीएनजी, 60 फीसदी पड़ेगी सस्ती, ये रही पूरी जानकारी
Tue, 28 Mar 2023 04:03 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 28 Mar 2023 04:03 PM IST
सार
एनएसआई के निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने बताया कि अभी तक प्रेसमड का निस्तारण चीनी मिलों के लिए सबसे बड़ी उलझन होता था, लेकिन गैस बनने से अब यह कीमती हो गया है। एनएसआई के विज्ञानियों की टीम कई सालों से गन्ने के रस के कचरे पर काम कर रही थी। लंबे शोध के बाद इससे सीएनजी बनाने में सफलता मिली है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जो लोग सीएनजी की बढ़ती हुई कीमतों से परेशान हैं, उनके लिए राहत भरी खबर है। अब गन्ने के रस के कचरे (प्रेसमड) से सीएनजी बनेगी। यह सीएनजी 60 प्रतिशत तक सस्ती मिलेगी। नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) की तकनीक पर आधारित सीएनजी प्लांट को कुछ चीनी मिलों ने लगाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा शर्करा उद्योग के अन्य समूह भी एनएसआई से संपर्क किए हुए हैं।
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एनएसआई के निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने बताया कि अभी तक प्रेसमड का निस्तारण चीनी मिलों के लिए सबसे बड़ी उलझन होता था, लेकिन गैस बनने से अब यह कीमती हो गया है। एनएसआई के विज्ञानियों की टीम कई सालों से गन्ने के रस के कचरे पर काम कर रही थी। लंबे शोध के बाद इससे सीएनजी बनाने में सफलता मिली है। पहले यह शोध प्रयोगशाला स्तर पर किया गया। इसमें सफलता के बाद दूसरे चरण का शोध एनएसआई की प्रायोगिक चीनी मिल में किया गया।
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यहां प्रेसमड से सीएनजी बनाने का शोध पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही चीनी मिलों के प्रतिनिधियों को बुलाकर इसका प्रदर्शन किया गया। इथेनॉल बनाने के क्षेत्र में आगे आ रहे शर्करा उद्यमियों ने प्रेसमड से सीएनजी बनाने में भी दिलचस्पी दिखाई। निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने बताया कि इंडियन पोटाश लिमिटेड की मुजफ्फरनगर स्थित चीनी मिल ने गैस प्लांट लगा लिया है।
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उन्होंने बताया कि कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी गैस प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा शर्करा उद्योग के दूसरे ग्रुप भी आगे आ रहे हैं। इथेनॉल की तरह प्रेसमड सीएनजी के रेट केंद्र सरकार तय करेगी। प्रेसमड की कोई कीमत नहीं होती। इस वजह से प्रेसमड से गैस बनाना तकरीबन 60 फीसदी सस्ता पड़ेगा।
खास
- चीनी मिलों से वर्ष में निकलता है एक करोड़ टन प्रेसमड
- 25 किलो प्रेसमड से एक किलो सीएनजी बनेगी
ऐसे बनती है सीएनजी
गन्ने के रस के कचरे को बायोडायजेस्टर में डाला जाता है। इसमें पानी, गोबर, रसायन मिलाए जाते हैं। इसमें आर्गेनिक बैक्टीरिया पैदा हो जाता है। यह बैक्टीरिया बायोगैस बनाता है। इसमें 90 फीसदी मीथेन गैस होती है। इसके अलावा कार्बन डाईआक्साइड और दूसरी गैस होती हैं। बाद में शुद्धिकरण के जरिये मीथेन से बाकी गैस अलग कर ली जाती हैं। इसके बाद मीथेन से सीएनजी बनाई जाती है।
खास
- चीनी मिलों से वर्ष में निकलता है एक करोड़ टन प्रेसमड
- 25 किलो प्रेसमड से एक किलो सीएनजी बनेगी
ऐसे बनती है सीएनजी
गन्ने के रस के कचरे को बायोडायजेस्टर में डाला जाता है। इसमें पानी, गोबर, रसायन मिलाए जाते हैं। इसमें आर्गेनिक बैक्टीरिया पैदा हो जाता है। यह बैक्टीरिया बायोगैस बनाता है। इसमें 90 फीसदी मीथेन गैस होती है। इसके अलावा कार्बन डाईआक्साइड और दूसरी गैस होती हैं। बाद में शुद्धिकरण के जरिये मीथेन से बाकी गैस अलग कर ली जाती हैं। इसके बाद मीथेन से सीएनजी बनाई जाती है।